भारतीय दर्शन के संप्रदाय, धार्मिक परंपराएं और त्योहार
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 25-28 धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं; अनुच्छेद 29-30 सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों की रक्षा करते हैं।
- अनुच्छेद 49 और अनुच्छेद 51A(f) धरोहर-संरक्षण को राज्य के निर्देश और नागरिक कर्तव्य से जोड़ते हैं।
- 1958 का स्मारक-संरक्षण ढांचा राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों के आसपास संरक्षित, प्रतिबंधित और विनियमित क्षेत्रों की व्यवस्था करता है।
- उपासना स्थल अधिनियम 1991 अपवादों के अधीन 15 अगस्त 1947 की धार्मिक स्थिति बनाए रखने की बात करता है।
मुख्य बिंदु
- 1
आस्तिक का अर्थ वेद-प्रामाण्य स्वीकार करना है; यह सृष्टिकर्ता ईश्वर में विश्वास के बराबर नहीं है।
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बौद्ध और जैन धर्म श्रमण परंपराएं हैं, जिन्होंने महाजनपद युग में वैदिक कर्मकांड को चुनौती दी।
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अनुच्छेद 25-28 धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं; अनुच्छेद 29-30 सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों की रक्षा करते हैं।
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अनुच्छेद 49 और अनुच्छेद 51A(f) धरोहर-संरक्षण को राज्य के निर्देश और नागरिक कर्तव्य से जोड़ते हैं।
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1958 का स्मारक-संरक्षण ढांचा राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों के आसपास संरक्षित, प्रतिबंधित और विनियमित क्षेत्रों की व्यवस्था करता है।
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UNESCO मान्यता में कुंभ मेला, दुर्गा पूजा, गरबा, रामलीला और दीपावली जैसे जीवित धरोहर उदाहरण पूछे जाते हैं।
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उपासना स्थल अधिनियम 1991 अपवादों के अधीन 15 अगस्त 1947 की धार्मिक स्थिति बनाए रखने की बात करता है।
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UPSC दर्शन, संप्रदाय, ग्रंथ, त्योहार, संरक्षण और कानूनी स्थिति को एक ही कथन-समूह में मिला देता है।
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समेकित ढांचा: दर्शन, धर्म और त्योहार
भारतीय दर्शन, धार्मिक परंपराएं और पर्व-त्योहार तीन अलग सूचियां नहीं हैं; इन्हें एक जुड़े हुए सांस्कृतिक तंत्र की तरह पढ़ना चाहिए।
- मूल ढांचा: भारतीय दर्शन में वैदिक और उपनिषद परंपरा, छह आस्तिक दर्शन और बौद्ध-जैन जैसे श्रमण मार्ग आते हैं। परीक्षा अक्सर यह जांचती है कि छात्र सभी को एक ही तरह का धर्म मान रहा है या नहीं; ऐसा करना गलत है।
- आस्तिक और नास्तिक: शास्त्रीय वर्गीकरण में आस्तिक दर्शन वेद-प्रामाण्य स्वीकार करते हैं। नास्तिक दर्शन वेद-प्रामाण्य स्वीकार नहीं करते। यह ईश्वरवादी और नास्तिक का सीधा विभाजन नहीं है, क्योंकि सांख्य ईश्वर-केंद्रित न होते हुए भी आस्तिक दर्शन में आता है।
- धार्मिक परंपराएं: हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख, इस्लामी, ईसाई, पारसी, यहूदी, जनजातीय और क्षेत्रीय परंपराओं ने संस्थाएं, ग्रंथ, अनुष्ठान, तीर्थस्थल, संगीत, भोजन-रीति, पंचांग और त्योहार गढ़े। UPSC सामान्य प्रशंसा नहीं, सही संबंध पूछता है।
- त्योहार का दृष्टिकोण: त्योहार जीवित धरोहर हैं। वे अनुष्ठान, ऋतु, कृषि, तीर्थ, शिल्प, प्रदर्शन, सामुदायिक अर्थव्यवस्था और स्थानीय स्मृति को एक साथ लाते हैं। कुंभ मेला, दुर्गा पूजा, गरबा, रामलीला और दीपावली दिखाते हैं कि धार्मिक आचरण सार्वजनिक संस्कृति कैसे बनता है।
- संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 25-28 अंतःकरण और धर्म की स्वतंत्रता देते हैं; अनुच्छेद 29-30 सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों की रक्षा करते हैं; अनुच्छेद 49 स्मारकों की रक्षा का निर्देश देता है; अनुच्छेद 51A(f) साझा संस्कृति को मूल्यवान मानने को कहता है।
- कानूनी आधार: प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 प्राचीन स्मारकों और पुरातात्त्विक स्थलों की रक्षा करता है; प्राचीन वस्तु और कला-निधि अधिनियम 1972 पुरावस्तुओं को नियंत्रित करता है; उपासना स्थल अधिनियम 1991 कुछ अपवादों के साथ 15 अगस्त 1947 की धार्मिक स्थिति को सुरक्षित रखता है।
- प्रक्रिया: संस्कृति का संचालन मंत्रालयों, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण, संगीत नाटक अकादमी, राज्य विभागों, मंदिर और वक्फ संस्थाओं, अदालतों, समुदायों और UNESCO नामांकन प्रक्रिया से होता है।
- सीमा: संविधान विश्वास और आवश्यक धार्मिक आचरण की रक्षा करता है, लेकिन धर्म से जुड़े आर्थिक, राजनीतिक, लौकिक और सामाजिक-सुधार पक्षों के नियमन की अनुमति भी देता है।
- परीक्षा पद्धति: हर तथ्य के लिए चार बिंदु तय करें: दर्शन या परंपरा, ग्रंथ या प्रामाणिक आधार, अनुष्ठान या संस्था, और आज की कानूनी या धरोहर स्थिति।
- दोहराव का आधार: कालक्रम, सिद्धांत, संस्था, स्थल और कानूनी स्थिति को हमेशा साथ दोहराएं।
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स्टडी पैक खोलेंसंभावितसंभावित प्रश्न
अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।
1MCQजैन शिक्षाओं के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. त्रिरत्न में सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र शामिल हैं। 2. पार्श्वनाथ को परंपरागत रूप से पांच महाव्रतों से जोड़ा जाता है। 3. अनेकांतवाद का अर्थ है कि वास्तविकता को कई दृष्टियों से समझा जा सकता है। इन कथनों में कौन-से सही हैं?
व्याख्या
कथन 1 सही है। कथन 2 गलत है क्योंकि पार्श्वनाथ सामान्यतः चार व्रतों से जुड़े हैं; पांच महाव्रत महावीर से जोड़े जाते हैं। कथन 3 अनेकांतवाद को सही बताता है।
~50 शब्द · 1 अंक
