प्रदर्शन कलाएं — शास्त्रीय संगीत, नृत्य और रंगमंच
मुख्य तथ्य
- मानक आठ शास्त्रीय नृत्य रूप हैं: भरतनाट्यम, कथक, कथकली, कुचिपुड़ी, मणिपुरी, मोहिनीयाट्टम, ओडिसी और सत्रिया।
- हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत में राग-ताल साझा हैं, लेकिन इतिहास, रूप और प्रस्तुति की शैली अलग हैं।
- नाट्यशास्त्र नृत्य, नाटक, संगीत, रस, भाव, अभिनय और वाद्य-वर्गीकरण को जोड़ता है।
- वाद्यों की श्रेणियां अवनद्ध, तत, घन और सुषिर हैं; आधार ध्वनि बनने का तरीका है।
- लोक नृत्य समुदाय-केंद्रित होते हैं और अनुष्ठान, संगीत, रंगमंच, मुखौटे तथा मौसमी उत्सव को साथ ला सकते हैं।
मुख्य बिंदु
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मानक आठ शास्त्रीय नृत्य रूप हैं: भरतनाट्यम, कथक, कथकली, कुचिपुड़ी, मणिपुरी, मोहिनीयाट्टम, ओडिसी और सत्रिया।
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हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत में राग-ताल साझा हैं, लेकिन इतिहास, रूप और प्रस्तुति की शैली अलग हैं।
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नाट्यशास्त्र नृत्य, नाटक, संगीत, रस, भाव, अभिनय और वाद्य-वर्गीकरण को जोड़ता है।
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वाद्यों की श्रेणियां अवनद्ध, तत, घन और सुषिर हैं; आधार ध्वनि बनने का तरीका है।
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लोक नृत्य समुदाय-केंद्रित होते हैं और अनुष्ठान, संगीत, रंगमंच, मुखौटे तथा मौसमी उत्सव को साथ ला सकते हैं।
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संगीत नाटक अकादमी संस्कृति मंत्रालय के अधीन संगीत, नृत्य और रंगमंच की राष्ट्रीय अकादमी है।
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UNESCO मान्यता संरक्षण को बल देती है; इससे अपने-आप शास्त्रीय दर्जा या मालिकाना अधिकार नहीं बनता।
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प्रारंभिक परीक्षा के भटकाने वाले सवाल प्रायः क्षेत्र, विधा, संस्था, ग्रंथ और धरोहर-दर्जा को मिला देते हैं।
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ढांचा, स्रोत और UPSC के लिहाज़ से महत्व
- भारतीय संस्कृति में प्रदर्शन कलाएं गायन, वादन, नृत्य और रंगमंच को साथ लेकर चलती हैं। NCERT इन्हें सिर्फ संग्रहालय में रखी चीज़ नहीं मानता; प्रदर्शन में शरीर, आवाज़, मंच/स्थान, अभ्यास और दर्शक मिलकर कला को जीवित बनाते हैं।
- मुख्य शास्त्रीय आधार भरत मुनि का नाट्यशास्त्र है, जिसे सामान्यतः 200 ईसा पूर्व से 200 ईस्वी के बीच रखा जाता है। संस्कृति मंत्रालय भी वाद्यों की चार श्रेणियां समझाते समय यही व्यापक अवधि देता है।
- UPSC के लिए सबसे सुरक्षित तरीका तीन स्तर अलग रखना है: शास्त्रीय परंपरा, लोक और जनजातीय परंपरा, तथा सरकारी संरक्षण। सवाल अक्सर इन्हीं स्तरों को मिलाकर गलत जोड़ी बनाते हैं।
- राष्ट्रीय संस्था के रूप में संगीत नाटक अकादमी सबसे अहम है। यह संस्कृति मंत्रालय के अधीन संगीत, नृत्य और रंगमंच की शीर्ष संस्था है और पुरस्कार, दस्तावेज़ीकरण, प्रशिक्षण-सहायता तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान से जुड़ी है।
- संवैधानिक आधार सीधे किसी एक कला-रूप का नाम नहीं लेता, फिर भी ज़रूरी है: अनुच्छेद 29 किसी नागरिक-समूह को अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति बचाने का अधिकार देता है; अनुच्छेद 51A(f) भारत की समन्वयवादी संस्कृति की धरोहर को बचाना नागरिक कर्तव्य बनाता है।
- अनुच्छेद 49 राज्य को राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों और वस्तुओं की रक्षा का निर्देश देता है। यह प्रदर्शन कलाओं का अनुच्छेद नहीं है, लेकिन धरोहर-संरक्षण के उसी बड़े दायरे में आता है और परीक्षा में भटकाने वाला सवाल बन सकता है।
- कानूनी और नीतिगत संदर्भ यहां अधिकतर योजनाओं, अकादमियों और UNESCO प्रक्रिया से आते हैं, न कि अदालती फैसलों से। नृत्य या संगीत पर मुकदमे गढ़ने के बजाय रूप, क्षेत्र, वाद्य, ग्रंथ, संस्था और धरोहर-सूची पर टिकें।
- ठीक उत्तर में शास्त्रीय और लोक कला का फर्क दिखना चाहिए, पर लोक कला को कमतर नहीं दिखाना चाहिए। शास्त्रीय दर्जा आम तौर पर व्याकरण, ग्रंथ, गुरु-परंपरा और राष्ट्रीय मान्यता से जुड़ता है; लोक रूप समुदाय-केंद्रित और ज़्यादा लचीले रहते हैं।
- सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले समूह हैं: आठ शास्त्रीय नृत्य रूप, हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत, वाद्यों की श्रेणियां, कूटियाट्टम और रामलीला जैसी रंगमंच परंपराएं, तथा UNESCO में दर्ज प्रदर्शन परंपराएं।
- नाम सावधानी से याद रखें: भरतनाट्यम, कथक, कथकली, कुचिपुड़ी, मणिपुरी, मोहिनीयाट्टम, ओडिसी और सत्रिया सामान्य UPSC तैयारी में मानक आठ शास्त्रीय नृत्य रूप हैं। छऊ को अक्सर अलग से अर्ध-शास्त्रीय या लोक-युद्धक परंपरा तथा UNESCO तत्व के रूप में पढ़ा जाता है।
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1MCQनिम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. सत्रिया असम के वैष्णव सत्रों से जुड़ा है। 2. मोहिनीयाट्टम और कथकली दोनों केरल से जुड़े हैं। 3. मानक UPSC सूची में छऊ मानक आठ शास्त्रीय नृत्यों में है। कौन-से कथन सही हैं?
व्याख्या
सत्रिया असम के सत्रों से जुड़ा है और केरल से कथकली तथा मोहिनीयाट्टम दोनों जुड़े हैं। छऊ महत्वपूर्ण और UNESCO में दर्ज है, पर मानक आठ में सामान्यतः नहीं रखा जाता।
~50 शब्द · 1 अंक
