विश्व में खनिज, उद्योग और संसाधनों का वितरण
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 297 अपतटीय संसाधनों को संघ में निहित करता है; संघ सूची प्रविष्टि 53-57 और राज्य सूची प्रविष्टि 23, 50 खनन शक्तियां तय करती हैं।
- 2023 का खनन संशोधन केंद्र को प्रथम अनुसूची के भाग डी में दिए गए अहम और रणनीतिक खनिजों की नीलामी की शक्ति देता है।
- भारत का 2025 राष्ट्रीय अहम खनिज मिशन खोज, विदेशी अधिग्रहण, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और कौशल-विकास को जोड़ता है।
मुख्य बिंदु
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संसाधनों का वितरण केवल भूगर्भ से नहीं; तकनीक, कीमत, कानून, अवसंरचना और पर्यावरणीय मंज़ूरी से भी तय होता है।
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अनुच्छेद 297 अपतटीय संसाधनों को संघ में निहित करता है; संघ सूची प्रविष्टि 53-57 और राज्य सूची प्रविष्टि 23, 50 खनन शक्तियां तय करती हैं।
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2023 का खनन संशोधन केंद्र को प्रथम अनुसूची के भाग डी में दिए गए अहम और रणनीतिक खनिजों की नीलामी की शक्ति देता है।
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कोबाल्ट खनन कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में केंद्रित है, जबकि परिष्करण चीन-केंद्रित है; प्रसंस्करण केंद्रीकरण बड़ा आपूर्ति जोखिम बनता है।
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बॉक्साइट-समृद्ध देश अपने-आप एल्युमिनियम गलाने में आगे नहीं होते, क्योंकि संयंत्र कहां लगेगा यह बिजली की लागत से बहुत प्रभावित होता है।
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गहरे समुद्र के पिंड और सल्फाइड अभी खोज और शासन के विषय हैं, अंतरराष्ट्रीय समुद्र-तल में सामान्य वाणिज्यिक खनन नहीं।
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भारत का 2025 राष्ट्रीय अहम खनिज मिशन खोज, विदेशी अधिग्रहण, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और कौशल-विकास को जोड़ता है।
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अहम खनिज देश-विशेष होते हैं: आर्थिक महत्व और आपूर्ति जोखिम, कोई सार्वभौमिक स्थिर सूची नहीं।
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अवधारणा, दायरा और कानूनी आधार
विश्व के खनिज और औद्योगिक भूगोल में असली सवाल यह है कि कोई संसाधन एक जगह क्यों मिलता है, उसका प्रसंस्करण दूसरी जगह क्यों होता है और खपत तीसरी जगह क्यों केंद्रित रहती है। UPSC के लिए यह खान-नामों की सूची नहीं, बल्कि भूगर्भ, बाज़ार, तकनीक, कानून और पर्यावरणीय सीमाओं को जोड़कर समझने वाला विषय है।
- संसाधन, भंडार और अयस्क: संसाधन वह प्राकृतिक पदार्थ है जिसकी उपयोगिता ज्ञात या संभावित है; भंडार वह हिस्सा है जिसे मौजूदा कीमत, तकनीक और कानून के तहत आर्थिक रूप से निकाला जा सकता है; अयस्क वह शैल है जिसमें खनिज इतनी मात्रा में हो कि निकासी सार्थक हो। इसी फर्क से समझ आता है कि बोलिविया के पास बड़े लिथियम संसाधन हो सकते हैं, फिर भी कठोर-शैल लिथियम उत्पादन में ऑस्ट्रेलिया आगे है।
- खनिजों के प्रकार: धात्विक खनिजों में लौह अयस्क, तांबा, बॉक्साइट, मैंगनीज़, निकेल, कोबाल्ट और दुर्लभ मृदा तत्व आते हैं; अधात्विक खनिजों में चूना पत्थर, फॉस्फेट, पोटाश, अभ्रक और जिप्सम हैं; ईंधन खनिजों में कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और यूरेनियम रखे जाते हैं।
- संसाधनों का वितरण असमान है: आंतरिक भूगर्भीय प्रक्रियाएं तांबा, निकेल, प्लैटिनम समूह और दुर्लभ मृदा तत्वों को केंद्रित करती हैं; अवसादी द्रोणी कोयला, तेल, गैस, फॉस्फेट और वाष्पीकरण से बने खनिज देते हैं; उष्णकटिबंधीय अपक्षय से बॉक्साइट और लैटेराइट-आधारित निकेल बनता है।
- भारत का संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 297 के अनुसार प्रादेशिक जल, महाद्वीपीय मग्नतट और विशेष आर्थिक क्षेत्र में मिलने वाली मूल्यवान वस्तुएं संघ में निहित हैं। संघ सूची की प्रविष्टि 53-57 तेलक्षेत्र, खनिज तेल संसाधन, संघ नियंत्रण में खनिज विकास, खानों में श्रम-सुरक्षा और अंतर-राज्यीय नदियों से जुड़ती हैं। राज्य सूची की प्रविष्टि 23 खानों और खनिज विकास पर है, पर यह संघ सूची की प्रविष्टि 54 के अधीन है; राज्य सूची की प्रविष्टि 50 खनिज अधिकारों पर कर से जुड़ती है, पर संसद की सीमाओं के अधीन रहती है।
- नीति-निदेशक और पर्यावरणीय आधार: अनुच्छेद 39(b) भौतिक संसाधनों को सामूहिक हित में बांटने की बात करता है; अनुच्छेद 48A पर्यावरण की रक्षा का निर्देश देता है; अनुच्छेद 51A(g) नागरिकों पर प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का कर्तव्य रखता है; अनुच्छेद 21 को कई पर्यावरणीय मामलों में जीवन-गुणवत्ता से जोड़कर पढ़ा गया है।
- भारत के मुख्य कानून: खनन और खनिज विकास विनियमन अधिनियम, 1957 खोज, पूर्वेक्षण, अन्वेषण, खनन पट्टा, नीलामी, रॉयल्टी और दंड की व्यवस्था बनाता है। खान अधिनियम, 1952 खानों में सुरक्षा से जुड़ा है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, वन संरक्षण अधिनियम, 1980 और पर्यावरणीय मंज़ूरी के नियम तय करते हैं कि निकासी हो सकती है या नहीं।
- हाल की कानूनी व्यवस्था: 1957 के खनन कानून में 2023 के संशोधन ने प्रथम अनुसूची के भाग डी में दिए गए कुछ अहम और रणनीतिक खनिजों की केंद्रीय नीलामी का रास्ता खोला; अपतटीय क्षेत्र खनिज विकास विनियमन संशोधन अधिनियम, 2023 ने समुद्री खनिज ब्लॉकों में नीलामी-आधारित आवंटन जोड़ा।
- परीक्षा में अहम बात: भूगोल के प्रश्नों में कानून अक्सर स्थान वाले प्रश्नों के भीतर छिपा रहता है। समुद्री पिंड, अपतटीय हाइड्रोकार्बन और तटीय खनिजों को सिर्फ भौतिक भूगोल से नहीं, अनुच्छेद 297 और समुद्री क्षेत्रों से भी पढ़ना चाहिए।
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1MCQनिम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. अनुच्छेद 297 महाद्वीपीय मग्नतट और विशेष आर्थिक क्षेत्र के संसाधनों को संघ में निहित करता है। 2. राज्य सूची की प्रविष्टि 23 खानों पर संघ सूची की प्रविष्टि 54 से स्वतंत्र रूप से काम करती है। 3. राज्य सूची की प्रविष्टि 50 संसद की सीमाओं के अधीन खनिज अधिकारों पर कर से जुड़ती है। कौन-से कथन सही हैं?
व्याख्या
अनुच्छेद 297 और प्रविष्टि 50 का कथन सही है। प्रविष्टि 23 स्पष्ट रूप से संघ सूची की प्रविष्टि 54 के अधीन है, इसलिए कथन 2 गलत है।
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