ब्रह्मांड, सौरमंडल और पृथ्वी की गतियां
मुख्य तथ्य
- सौरमंडल में 8 ग्रह हैं; 2006 की अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ परिभाषा ग्रह, बौने ग्रह और छोटे सौरमंडलीय पिंड अलग करती है।
- ऋतुओं का कारण सूर्य से दूरी बदलना नहीं, बल्कि पृथ्वी की लगभग 23.5 अंश अक्षीय झुकाव है।
- भारतीय भूगोल में खगोल-विज्ञान भारतीय मानक समय, देशांतर, दूरसंवेदन तकनीक, अंतरिक्ष नीति और अनुच्छेद 51A(h) के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जुड़ता है।
- चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 जैसे भारतीय अभियान स्थिर खगोल-विज्ञान को मानचित्र, संसाधन, तकनीक और हालिया घटनाओं वाले प्रश्नों से जोड़ते हैं।
मुख्य बिंदु
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ब्रह्मांड वाले प्रश्नों में पैमाना, क्रम और प्रमाण पूछा जाता है: आकाशगंगा, नीहारिका, तारा, ग्रह, उपग्रह, क्षुद्रग्रह, धूमकेतु और उल्काभ एक जैसे नहीं हैं।
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सौरमंडल में 8 ग्रह हैं; 2006 की अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ परिभाषा ग्रह, बौने ग्रह और छोटे सौरमंडलीय पिंड अलग करती है।
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ऋतुओं का कारण सूर्य से दूरी बदलना नहीं, बल्कि पृथ्वी की लगभग 23.5 अंश अक्षीय झुकाव है।
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घूर्णन से दिन-रात, आकाशीय पिंडों की दैनिक आभासी गति और समय पेटियां बनती हैं; परिक्रमण और झुकाव से अयनांत, विषुव और ऋतुएं बनती हैं।
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चंद्रमा की कलाएं, ग्रहण और ज्वार-भाटा ज्यामिति के प्रश्न हैं: संरेखण, छाया और सापेक्ष अवस्थिति याद तारीखों से अधिक अहम हैं।
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भारतीय भूगोल में खगोल-विज्ञान भारतीय मानक समय, देशांतर, दूरसंवेदन तकनीक, अंतरिक्ष नीति और अनुच्छेद 51A(h) के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जुड़ता है।
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चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 जैसे भारतीय अभियान स्थिर खगोल-विज्ञान को मानचित्र, संसाधन, तकनीक और हालिया घटनाओं वाले प्रश्नों से जोड़ते हैं।
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UPSC अक्सर लगभग-सही कथनों से भ्रम बनाता है: शुक्र सबसे गर्म है, अरुण का अक्षीय झुकाव बहुत अधिक है, और प्लूटो ग्रह नहीं है।
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ब्रह्मांड: पैमाना, क्रम और प्रमाण
- परिभाषा: ब्रह्मांड में स्थान, समय, पदार्थ, ऊर्जा और भौतिक नियमों की पूरी व्यवस्था आती है। प्रीलिम्स में इसे दार्शनिक वाक्य नहीं, बल्कि पैमाने के क्रम के रूप में पढ़ें: सूक्ष्म कणों से लेकर आकाशगंगा-समूहों और दृश्य ब्रह्मांड तक।
- दृश्य ब्रह्मांड: हम वही हिस्सा देख पाते हैं, जहां से प्रकाश अब तक हम तक पहुंच सका है। इसलिए पूरे ब्रह्मांड और दृश्य ब्रह्मांड पर दिए गए कथन हमेशा एक जैसे नहीं माने जा सकते।
- बिग बैंग मॉडल: मानक मॉडल के अनुसार ब्रह्मांड बेहद गर्म और घनी शुरुआती अवस्था से फैलता गया। इसका आधार आकाशगंगाओं का लाल-विस्थापन, ब्रह्मांडीय सूक्ष्मतरंग पृष्ठभूमि विकिरण और हल्के तत्वों की मात्रा का स्वरूप है। इसे खाली जगह में विस्फोट न समझें; यहां स्वयं स्थान का विस्तार मुख्य बात है।
- मुख्य क्रम: सौरमंडल → तारकीय पड़ोस → आकाशगंगा → स्थानीय समूह → आकाशगंगा-समूह → ब्रह्मांडीय जाल। UPSC यह पूछ सकता है कि क्या सौरमंडल आकाशगंगा के केंद्र में है; ऐसा नहीं है।
- आकाशगंगा: तारों, गैस, धूल और अदृश्य द्रव्य से बना गुरुत्वीय तंत्र। हमारी आकाशगंगा दंडीय सर्पिल प्रकार की है; सूर्य इसी में एक सामान्य तारा है।
- नीहारिका: गैस और धूल का बादल। कुछ नीहारिकाएं तारों के जन्म-क्षेत्र हैं, कुछ मृत तारों के अवशेष हैं; हर चमकीला बादल आकाशगंगा नहीं होता।
- तारा: गर्म प्लाज़्मा का स्वयं-प्रकाशी गोल पिंड, जिसमें नाभिकीय संलयन से ऊर्जा निकलती है। सूर्य मध्यम आकार का तारा है, ग्रह नहीं और सबसे बड़ा तारा भी नहीं।
- परीक्षा में भ्रम: पृथ्वी से दिखने वाली चमक वास्तविक चमक और दूरी, दोनों पर निर्भर करती है। पास का सामान्य तारा दूर के अधिक चमकीले तारे से ज्यादा चमकदार दिख सकता है।
- भारत से संबंध: संविधान का अनुच्छेद 51A(h) नागरिकों से वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद और जिज्ञासा-सुधार की भावना विकसित करने की अपेक्षा करता है। इस विषय में इसका अर्थ प्रमाण-आधारित खगोलीय समझ है; इससे अंतरिक्ष-विज्ञान का अलग प्रवर्तनीय अधिकार नहीं बनता।
- मापन का आधार: खगोलीय दूरियां बताने में खगोलीय इकाई, प्रकाश-वर्ष और पारसेक काम आते हैं। ये लंबाई की इकाइयां हैं, समय की नहीं; प्रकाश-वर्ष का अर्थ है एक साल में प्रकाश जितनी दूरी तय करता है।
- आस्था नहीं, प्रमाण: प्राचीन आकाश-अवलोकन से पंचांग और नौवहन बने, लेकिन आधुनिक भौतिक भूगोल जांचे जा सकने वाले प्रमाणों पर चलता है: वर्णक्रम, लंबन, विकिरण अभिलेख, उल्कापिंडों का रासायनिक अध्ययन और अंतरिक्ष अभियानों के अवलोकन।
- अदृश्य द्रव्य सावधानी: आकाशगंगाओं के घूर्णन और गुरुत्वीय लेंसिंग से अदृश्य द्रव्यमान का संकेत मिलता है, पर अदृश्य द्रव्य साधारण अंधेरा, धूल या केवल कृष्ण विवर नहीं है। UPSC में इसे किसी भी अज्ञात चीज़ का नाम मान लेने वाला कथन गलत हो सकता है।
- विस्तार वाला भ्रम: ब्रह्मांड का विस्तार बड़े पैमाने पर देखा जाता है। इसका मतलब यह नहीं कि सौरमंडल, पृथ्वी-चंद्र दूरी या भारत की स्थल सीमाएं रोज़मर्रा वाले अर्थ में फैल रही हैं।
- भौतिक भूगोल से संबंध: पैमाने की समझ गलत तुलना रोकती है: मौसम-तंत्र वायुमंडलीय है, मानसून मौसमी परिसंचरण है, आकाशगंगा की भुजा आकाशगंगा स्तर की बात है, और आकाशगंगा-समूह पृथ्वी-तंत्र से बहुत बड़ा पैमाना है।
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स्टडी पैक खोलेंसंभावितसंभावित प्रश्न
अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।
1MCQ2006 की अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ वर्गीकरण पर निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. ग्रह को सूर्य की परिक्रमा करनी चाहिए। 2. बौने ग्रह को अपनी कक्षा के आसपास का क्षेत्र साफ कर लेना चाहिए। 3. सीरीस को बौना ग्रह माना जाता है। ऊपर दिए गए कथनों में कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या
ग्रह और बौना ग्रह दोनों सूर्य की परिक्रमा करते हैं, पर कक्षा के आसपास का क्षेत्र साफ करना ग्रह की शर्त है, बौने ग्रह की नहीं। सीरीस बौना ग्रह है।
~50 शब्द · 1 अंक
