भारत की कृषि: फसलें, फसल प्रतिरूप, कृषि क्रांतियां और सिंचाई
मुख्य तथ्य
- खरीफ मानसूनी नमी पर चलती है; रबी ठंडी बढ़वार, सिंचाई और सूखी पकाई पर निर्भर करती है।
- धान कहां उगता है, यह हमेशा सिर्फ प्राकृतिक उपयुक्तता से तय नहीं होता; सिंचाई और खरीद नीति उसे सूखे इलाकों तक भी ले जाती है।
- गेहूं को बढ़वार के समय ठंड और पकते समय साफ धूप चाहिए; मार्च-अप्रैल की बढ़ती गर्मी अब उपज के लिए बड़ा जोखिम बन रही है।
- श्री अन्न और दलहन बरानी सहनशीलता, पोषण और फसल विविधीकरण के लिए अहम हैं।
- प्रति बूंद अधिक फसल टपक और फव्वारा सिंचाई को बढ़ावा देती है; 2022-23 से यह राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत लागू है।
मुख्य बिंदु
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खरीफ मानसूनी नमी पर चलती है; रबी ठंडी बढ़वार, सिंचाई और सूखी पकाई पर निर्भर करती है।
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धान कहां उगता है, यह हमेशा सिर्फ प्राकृतिक उपयुक्तता से तय नहीं होता; सिंचाई और खरीद नीति उसे सूखे इलाकों तक भी ले जाती है।
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गेहूं को बढ़वार के समय ठंड और पकते समय साफ धूप चाहिए; मार्च-अप्रैल की बढ़ती गर्मी अब उपज के लिए बड़ा जोखिम बन रही है।
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श्री अन्न और दलहन बरानी सहनशीलता, पोषण और फसल विविधीकरण के लिए अहम हैं।
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प्रति बूंद अधिक फसल टपक और फव्वारा सिंचाई को बढ़ावा देती है; 2022-23 से यह राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत लागू है।
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कृषि मुख्यतः राज्य सूची प्रविष्टि 14 है, पर केंद्र कीमत, खरीद और व्यापार को प्रभावित करता है।
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गन्ना उच्च-मूल्य लेकिन पानी-प्रधान फसल है; महाराष्ट्र की गन्ना पट्टी टिकाऊपन की प्रमुख बहस है।
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फसल प्रतिरूप तभी बदलता है जब जलवायु, पानी, बाजार, प्रसंस्करण और नीति प्रोत्साहन साथ आएं।
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कृषि को भौगोलिक तंत्र की तरह समझना
- UPSC भूगोल में कृषि केवल फसलों की सूची नहीं है। यह ऐसा स्थानिक तंत्र है जिसमें मानसून का समय, मृदा, उच्चावच, सिंचाई, बाजार, श्रम और नीति मिलकर तय करते हैं कि कौन-सी फसल कहां और कितने जोखिम के साथ उगेगी।
- खेती-तंत्र की समझ: इस तंत्र में भूमि, बीज, पानी, उर्वरक, श्रम, कर्ज, मशीन और जानकारी लागत भी हैं और साधन भी; नतीजे में खाद्यान्न, रेशा, तिलहन, गन्ना, बागानी फसलें, चारा और ग्रामीण आय मिलती है।
- भारत की खासियत: यहां उष्णकटिबंधीय मानसूनी कृषि, भूमि पर जनसंख्या का दबाव, छोटी और बिखरी जोतें, क्षेत्रीय फसल-विशेषीकरण और सिंचित-बरानी खेती के बीच बड़ा अंतर साथ-साथ दिखता है।
- फसल प्रतिरूप का अर्थ: किसी क्षेत्र में साल भर फसलों का क्रम और स्थानिक फैलाव। यह वर्षा की भरोसेमंदी, सिंचाई, सापेक्ष कीमतों, MSP खरीद, मृदा, तकनीक, खान-पान और निर्यात मांग से बदलता है।
- फसल गहनता: सकल बोया क्षेत्र को शुद्ध बोया क्षेत्र से भाग देकर 100 से गुणा किया जाता है। एक ही खेत में साल में दो या अधिक फसलें लेने पर यह बढ़ती है, खासकर जब नमी, जल्दी पकने वाली किस्म और बाजार उपलब्ध हों।
- तीन फसल ऋतुएं: खरीफ दक्षिण-पश्चिम मानसून से जुड़ी है; रबी ठंडी ऋतु और बची हुई नमी पर टिकी है; जायद छोटी गर्मी की अवधि में आती है, जहां सिंचाई मिलती है।
- संवैधानिक और संस्थागत ढांचा: कृषि मुख्यतः राज्य सूची का विषय है, पर खाद्य सुरक्षा, अंतर-राज्यीय व्यापार, MSP संचालन, आयात, उर्वरक, शोध और बड़ी सिंचाई परियोजनाएं केंद्र की भूमिका भी बनाती हैं।
- परीक्षा में आम गलती: कोई फसल एक क्षेत्र में एक ऋतु की और दूसरे क्षेत्र में दूसरी ऋतु की हो सकती है। तिल, अरंडी और कुछ दलहन इसके उदाहरण हैं; हर फसल को एक ही ऋतु से जोड़ना ठीक नहीं।
- आंकड़ों का आधार: कृषि मंत्रालय के 2023-24 अनुमानों में खाद्यान्न उत्पादन 3322.98 लाख टन था; चावल और गेहूं भारत के अनाज उत्पादन का सबसे बड़ा आधार हैं। ऐसे आंकड़ों को संदर्भ की तरह पढ़ें, अलग-थलग याद न करें।
- भूगोल से रिश्ता: भारत की कृषि को पांच मानचित्रों से दोहराना सबसे उपयोगी है: वर्षा, मृदा, सिंचाई, फसल-पट्टी और बाजार। फसल से जुड़े सही उत्तर अक्सर इन्हीं मानचित्रों को जोड़कर बनते हैं।
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1MCQभारतीय फसल ऋतुओं के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. खरीफ फसलें व्यापक रूप से दक्षिण-पश्चिम मानसून की नमी से जुड़ी हैं। 2. रबी फसलों को सामान्यतः ठंडी बढ़वार और सूखी धूप वाली पकाई चाहिए। 3. जायद फसलें सामान्यतः केवल अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में उगती हैं। कौन-से कथन सही हैं?
व्याख्या
जायद मुख्यतः सिंचित गर्मी की छोटी अवधि है, केवल अधिक वर्षा की स्थिति नहीं।
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