मुख्य तथ्य

  • स्थलमंडलीय प्लेटें एस्थेनोस्फीयर पर चलती हैं; वे तरल मैग्मा पर तैरते महाद्वीप नहीं हैं।
  • अपसारी सीमांत भू-पर्पटी बनाते हैं, अभिसारी सीमांत उसे नष्ट या मोटा करते हैं, और रूपांतर सीमांत पर उसका न निर्माण होता है, न विनाश।
  • परिमाण भूकंप की ऊर्जा बताता है; तीव्रता किसी स्थान पर दिखे असर को बताती है।
  • 2026 में संशोधित भूकंपीय क्षेत्र-विभाजन वापस होने के बाद भारत का मौजूदा भूकंपीय संदर्भ आईएस 1893 भाग 1:2016 है।
  • बैरन द्वीप अंडमान चाप का भारत का ऐतिहासिक सक्रिय ज्वालामुखी है; दक्कन ट्रैप बड़े लावा-प्रवाहों से बने बेसाल्ट हैं।

मुख्य बिंदु

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    स्थलमंडलीय प्लेटें एस्थेनोस्फीयर पर चलती हैं; वे तरल मैग्मा पर तैरते महाद्वीप नहीं हैं।

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    अपसारी सीमांत भू-पर्पटी बनाते हैं, अभिसारी सीमांत उसे नष्ट या मोटा करते हैं, और रूपांतर सीमांत पर उसका न निर्माण होता है, न विनाश।

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    परिमाण भूकंप की ऊर्जा बताता है; तीव्रता किसी स्थान पर दिखे असर को बताती है।

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    2026 में संशोधित भूकंपीय क्षेत्र-विभाजन वापस होने के बाद भारत का मौजूदा भूकंपीय संदर्भ आईएस 1893 भाग 1:2016 है।

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    बैरन द्वीप अंडमान चाप का भारत का ऐतिहासिक सक्रिय ज्वालामुखी है; दक्कन ट्रैप बड़े लावा-प्रवाहों से बने बेसाल्ट हैं।

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    अपक्षय शैल को जगह पर बदलता है; अपरदन ढीली या अपक्षयित सामग्री को हटाकर ढोता है।

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    नदीय, हिमानी, पवनजनित और कार्स्ट कारक अलग, पर कई बार मिले-जुले स्थलरूप समूह बनाते हैं।

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    शैल-प्रकार, संरचना, जलवायु और आधार तल तय करते हैं कि प्रक्रिया आखिर कौन-सा स्थलरूप बनाएगी।

प्रीलिम्स में भू-आकृति विज्ञान का दायरा

  • मुख्य विचार: भू-आकृति विज्ञान स्थलरूपों, उन्हें बनाने वाली सामग्री और उन प्रक्रियाओं का अध्ययन है जो धरातल को बनाती, काटती, ढोती और जमा करती हैं। UPSC में सवाल केवल परिभाषा पर नहीं रुकता; वह किसी प्रक्रिया को स्थलरूप, प्लेट सीमांत, शैल-प्रकार या भारतीय उदाहरण से जोड़ता है।
  • दो प्रक्रिया-समूह: अंतर्जनित बल पृथ्वी के भीतर से आते हैं और वलन, भ्रंश, प्लेट गति, भूकंप तथा ज्वालामुखीयता से उच्चावच बनाते हैं। बहिर्जनित बल सतह पर या सतह के पास अपक्षय, ढाल-गतियां, अपरदन, परिवहन और निक्षेपण से काम करते हैं।
  • पैमाने की गलती: वलित पर्वत, रिफ्ट द्रोणी, महासागरीय गर्त और ज्वालामुखीय द्वीप-चाप बड़े विवर्तनिक परिणाम हैं; विसर्प, ड्रमलिन, बालू-टीला या गुफा में लटकता स्टैलेक्टाइट जैसे छोटे स्थलरूप सतही प्रक्रियाओं से बनते हैं।
  • सामग्री और प्रक्रिया का रिश्ता: शैल केवल पृष्ठभूमि नहीं हैं। आग्नेय शैल मैग्मा या लावा के ठंडे होने से जुड़ते हैं; अवसादी शैल निक्षेपण और संपीड़न के प्रमाण संजोते हैं; कायांतरित शैल ताप, दाब और रासायनिक द्रवों का असर दिखाते हैं। उनकी कठोरता, दरारें और परतें तय करती हैं कि नदी, हिमानी, पवन और भूमिगत जल उन्हें कैसे काटेंगे।
  • भारत से संबंध: हिमालय भारत-यूरेशिया टक्कर का परिणाम है; दक्कन ट्रैप क्रेटेशियस के अंत में हुए बड़े बेसाल्टी ज्वालामुखी उद्गारों से जुड़ा है; नर्मदा-सोन रिफ्ट पट्टी और कच्छ अंतःप्लेट विवर्तनिकी के लिए अहम हैं; अंडमान-निकोबार भारतीय प्लेट के पूर्व में अधःसरण से जुड़े द्वीप-चाप क्षेत्र में आता है।
  • प्रीलिम्स की आदत: हर तथ्य पर 4 सवाल पूछें: ऊर्जा का स्रोत क्या है, गति कैसी है, प्रमुख कारक कौन है, और बनने वाला स्थलरूप कौन-सा होगा। यही आदत प्लेट सीमांत की विशेषताओं को अपरदनी और निक्षेपण-जन्य स्थलरूपों से अलग कर देती है।
  • समसामयिकी से संबंध: आपदा और अवसंरचना से जुड़े प्रश्न अब भू-आकृति विज्ञान को जोखिम-मानचित्रण से जोड़ते हैं। पीआईबी ने 2026 में बताया कि संशोधित भूकंपीय क्षेत्र-विभाजन मार्च 2026 में वापस लिया गया, इसलिए आईएस 1893 भाग 1:2016 ही भारत का मौजूदा भूकंपीय मानक है; इसलिए क्षेत्र 2-5 का ढांचा अब भी वस्तुनिष्ठ प्रश्न के लिए प्रासंगिक है।
  • इस नोट की सीमा: विषय भौतिक भूगोल है, पर सामाजिक और आर्थिक महत्व भूकंपीय जोखिम, ज्वालामुखी निगरानी, भूस्खलन, तटीय अधिवास, कार्स्ट भूजल, नदी प्रबंधन और अवसंरचना-स्थान चयन में साफ दिखता है।
  • प्रश्न की बनावट: UPSC अक्सर भू-आकृति विज्ञान को ऐसे कथन-युग्मों में छिपाता है जैसे 'सभी युवा वलित पर्वत ज्वालामुखीय हैं' या 'सभी प्लेट सीमांत पतले होते हैं'। ऐसे सीमित और पूर्ण संकेतों को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
  • कारण-क्रम: पृथ्वी की आंतरिक ऊष्मा और गुरुत्व विवर्तनिक उच्चावच बनाते हैं; जलवायु और सतही कारक बाद में उसे बदलते हैं। सही उत्तर में यह क्रम उल्टा नहीं होना चाहिए, जैसे नदियों को हिमालयी पट्टी बनाने वाला कारण मान लेना।

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संभावित प्रश्न

अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।

1MCQप्लेट सीमांतों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. नई महासागरीय भू-पर्पटी सामान्यतः अपसारी सीमांतों पर बनती है। 2. महाद्वीपीय-महाद्वीपीय अभिसरण सामान्यतः गहरे महासागरीय गर्त और ज्वालामुखीय द्वीप-चाप बनाता है। 3. रूपांतर सीमांत सामान्यतः उथले भूकंपों से जुड़े होते हैं। कौन-सा/से कथन सही है/हैं?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aकेवल 1 और 2
  2. Bकेवल 1 और 3सही
  3. Cकेवल 2 और 3
  4. D1, 2 और 3

व्याख्या

कथन 1 सही है। कथन 2 गलत है, क्योंकि महाद्वीपीय टक्कर मुख्यतः भू-पर्पटी को मोटा कर वलित पर्वत बनाती है। कथन 3 सही है।

~50 शब्द · 1 अंक