आर्थिक भूगोल - प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों की अवस्थिति के कारक
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 19(1)(जी), 19(6), 301-307, 246 और सातवीं अनुसूची भारत में अवस्थिति-निर्णय को आकार देते हैं।
- पर्यावरण कानून और एम. सी. मेहता 1986 तथा वेल्लोर नागरिक कल्याण मंच 1996 जैसे निर्णय पारिस्थितिक जोखिम को अवस्थिति-सीमा बनाते हैं।
- गतिशक्ति 2021, राष्ट्रीय माल-ढुलाई नीति 2022, सागरमाला 2015 और भारतमाला 2017 केवल अवसंरचना योजनाएं नहीं, स्थानिक हस्तक्षेप हैं।
मुख्य बिंदु
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अवस्थिति संसाधन, लागत, श्रम, बाजार, संपर्क, नीति और पर्यावरणीय कारकों का समूह है; यह एक-कारण निर्णय नहीं है।
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प्राथमिक गतिविधियां सबसे अधिक संसाधन-बंधी हैं, पर तकनीक, संपत्ति-अधिकार, जलवायु जोखिम और बाजार तक पहुंच आर्थिक उपयोग तय करते हैं।
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द्वितीयक गतिविधियां कच्चे माल, बाजार, ऊर्जा, श्रम, औद्योगिक समूह, माल-ढुलाई और विनियमन का संतुलन साधती हैं।
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तृतीयक गतिविधियां न्यूनतम ग्राहक-आधार, क्रय-शक्ति, कौशल, भरोसे, डिजिटल संपर्क और संस्थागत सघनता का अनुसरण करती हैं।
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अनुच्छेद 19(1)(जी), 19(6), 301-307, 246 और सातवीं अनुसूची भारत में अवस्थिति-निर्णय को आकार देते हैं।
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पर्यावरण कानून और एम. सी. मेहता 1986 तथा वेल्लोर नागरिक कल्याण मंच 1996 जैसे निर्णय पारिस्थितिक जोखिम को अवस्थिति-सीमा बनाते हैं।
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गतिशक्ति 2021, राष्ट्रीय माल-ढुलाई नीति 2022, सागरमाला 2015 और भारतमाला 2017 केवल अवसंरचना योजनाएं नहीं, स्थानिक हस्तक्षेप हैं।
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आधुनिक अवस्थिति सिद्धांत में जलवायु जोखिम, आपूर्ति-श्रृंखला लचीलापन, स्वच्छ ऊर्जा पहुंच और सामाजिक स्वीकृति शामिल करनी होगी।
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आर्थिक भूगोल और अवस्थिति का तर्क
आर्थिक भूगोल यह समझाता है कि उत्पादन, विनिमय और सेवाएं कुछ जगहों पर क्यों सघन होती हैं और कुछ जगहों से दूर क्यों रहती हैं। UPSC के लिहाज़ से असली बात उद्योगों की सूची नहीं, बल्कि अवस्थिति-निर्णय की पूरी कड़ी है।
- मूल अर्थ: आर्थिक गतिविधि की अवस्थिति वह स्थानिक चुनाव है जहां भूमि, श्रम, पूंजी, तकनीक, बाजार और संस्थाएं कम लागत तथा कम जोखिम के साथ जुड़ सकें।
- तीन-क्षेत्रीय ढांचा:
- प्राथमिक गतिविधियां संसाधन उगाती या निकालती हैं: कृषि, मत्स्यन, वानिकी, खनन, उत्खनन और संबद्ध काम।
- द्वितीयक गतिविधियां कच्चे माल को बदलती हैं: विनिर्माण, निर्माण, बिजली उत्पादन, परिशोधन और प्रसंस्करण।
- तृतीयक गतिविधियां सेवाएं देती हैं: परिवहन, व्यापार, वित्त, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म।
- परंपरागत अवस्थिति-विचार:
- वॉन थ्यूनन कृषि को भूमि-भाड़ा, बाजार से दूरी और परिवहन लागत से जोड़ते हैं।
- वेबर उद्योग को सामग्री सूचकांक, श्रम लागत और संकेंद्रण लाभ से जोड़ते हैं।
- क्रिस्टालर सेवाओं को न्यूनतम ग्राहक-आधार, सेवा की पहुंच और केंद्रीय-स्थान क्रम से जोड़ते हैं।
- आधुनिक सुधार: अब अवस्थिति केवल कच्चे माल या दूरी से तय नहीं होती; आपूर्ति-श्रृंखला की भरोसेमंदी, नीति-स्थिरता, पर्यावरणीय मंजूरी, कौशल-समूह, डिजिटल संपर्क, डेटा सेंटर, जलवायु जोखिम और वैश्विक मूल्य-श्रृंखला तक पहुंच भी निर्णायक हैं।
- भारत वाला परीक्षा-दृष्टिकोण: भारत में सभी अवस्थाएं साथ-साथ दिखती हैं: पंजाब-हरियाणा का गेहूं क्षेत्र, छोटानागपुर की खनिज पट्टी, गुजरात का पेट्रोरसायन, बेंगलुरु की सेवाएं, तटीय गलियारे और नए माल-ढुलाई प्लेटफ़ॉर्म। UPSC अक्सर पूछता है कि कोई कारक एक क्षेत्र तक सीमित है या तीनों क्षेत्रों में काम करता है।
- काम की बात: प्राथमिक क्षेत्र अपेक्षाकृत संसाधन-बंधे होते हैं, द्वितीयक क्षेत्र लागत और समूह-लाभ से चलते हैं, तथा तृतीयक क्षेत्र बाजार, कौशल और संपर्क पर टिकते हैं। अपवाद बहुत हैं, इसलिए अवस्थिति को अकेले कारण से नहीं, पूरे कारक-समूह से पढ़ना चाहिए।
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स्टडी पैक खोलेंसंभावितसंभावित प्रश्न
अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।
1MCQअवस्थिति-कारकों पर निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. प्रसंस्करण में वजन घटाने वाले उद्योग सामान्यतः कच्चे माल के पास रहना पसंद करते हैं। 2. तेज इंटरनेट संपर्क उपलब्ध होते ही उच्च-स्तरीय सेवाएं पूरी तरह स्थान-विहीन हो जाती हैं। 3. संकेंद्रण लाभ साझा आपूर्तिकर्ताओं और श्रम-समूहों से लागत घटा सकते हैं। कौन-से कथन सही हैं?
व्याख्या
कथन 2 बहुत पूर्ण है; उच्च-स्तरीय सेवाओं को तेज इंटरनेट संपर्क के साथ कौशल, भरोसा, विनियमन और संपर्क-तंत्र भी चाहिए।
~50 शब्द · 1 अंक
