मुख्य तथ्य

  • सूर्यातप पृथ्वी तक पहुंचने वाला छोटी तरंगों का सौर विकिरण है; पृथ्वी ऊर्जा को लंबी तरंगों वाले विकिरण के रूप में लौटाती है, और हरितगृह प्रभाव की बुनिय...
  • अधिकांश मौसम क्षोभमंडल में बनता है; समतापमंडलीय ओज़ोन पराबैंगनी विकिरण सोखता है और ऊपर तापमान बढ़ाता है।
  • दाब पेटियां सूर्य की आभासी गति के साथ खिसकती हैं और स्थल-समुद्र अंतर तथा उच्चावच से टूटती-बिखरती हैं।
  • कोरिऑलिस बल भूमध्य रेखा पर शून्य है, इसलिए उष्णकटिबंधीय चक्रवात सामान्यतः ठीक वहीं नहीं बनते।
  • व्यापारिक पवन, पछुआ पवन और ध्रुवीय पूर्वी पवन दाब पेटियों और घूर्णन से बनी ग्रहीय पवन हैं।

मुख्य बिंदु

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    सूर्यातप पृथ्वी तक पहुंचने वाला छोटी तरंगों का सौर विकिरण है; पृथ्वी ऊर्जा को लंबी तरंगों वाले विकिरण के रूप में लौटाती है, और हरितगृह प्रभाव की बुनियाद यही है।

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    अधिकांश मौसम क्षोभमंडल में बनता है; समतापमंडलीय ओज़ोन पराबैंगनी विकिरण सोखता है और ऊपर तापमान बढ़ाता है।

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    दाब पेटियां सूर्य की आभासी गति के साथ खिसकती हैं और स्थल-समुद्र अंतर तथा उच्चावच से टूटती-बिखरती हैं।

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    कोरिऑलिस बल भूमध्य रेखा पर शून्य है, इसलिए उष्णकटिबंधीय चक्रवात सामान्यतः ठीक वहीं नहीं बनते।

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    व्यापारिक पवन, पछुआ पवन और ध्रुवीय पूर्वी पवन दाब पेटियों और घूर्णन से बनी ग्रहीय पवन हैं।

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    समुद्री समीर, घाटी समीर, लू और फॉन जैसी स्थानीय पवन स्थानीय तापीय या स्थलाकृतिक अंतर से बनती हैं।

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    जेट स्ट्रीम ऊपरी क्षोभमंडल की बहुत तेज पवन पट्टियां हैं; उपोष्ण पछुआ जेट स्ट्रीम सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ को दिशा देती है।

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    मानसून को एक कारण से नहीं समझा जा सकता; अंतःउष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र का खिसकना, स्थल की गरमी, ऊपरी जेट स्ट्रीम और भूमध्य रेखा पार प्रवाह साथ काम करते हैं।

दायरा, क्रम और प्रीलिम्स रोडमैप

  • मुख्य ढांचा: UPSC प्रीलिम्स में जलवायु विज्ञान की शुरुआत ऊर्जा-श्रृंखला से करें: सूर्य → सूर्यातप → असमान गरमी → तापमान का असमान वितरण → वायुदाब का अंतर → पवन → नमी का स्थानांतरण → मौसम तंत्र। पहली कड़ी कमजोर रही तो मानसून, चक्रवात और पश्चिमी विक्षोभ भी बस रटने वाली चीज बन जाते हैं।
  • पहले वायुमंडल: वायुमंडल गैसों, जलवाष्प, धूल-कणों और सूक्ष्म कणों का वह आवरण है जिसे पृथ्वी का गुरुत्व पकड़े रखता है। यह एक-सा कंबल नहीं है; तापमान, संघटन और काम के आधार पर इसकी परतें बदलती हैं। सबसे निचली परत क्षोभमंडल है, और अधिकांश मौसम इसी में बनता है क्योंकि जलवाष्प भी अधिकतर यहीं है और गरमी नीचे से मिलती है।
  • इस नोट का दायरा: वायुमंडल का संघटन और ऊर्ध्व संरचना; सूर्यातप को नियंत्रित करने वाले कारण; तापमान का क्षैतिज और ऊर्ध्व वितरण; तापमान प्रतिलोमन; दाब पेटियां; पवन को नियंत्रित करने वाले बल; ग्रहीय पवन; स्थानीय पवन; जेट स्ट्रीम; और भारत से जुड़े उपयोग।
  • प्रीलिम्स की मांग: UPSC अलग-अलग परिभाषा कम, प्रक्रिया का तर्क अधिक पूछता है। सवाल यह हो सकता है कि 30° के पास उपोष्ण उच्च दाब क्यों बनता है, भूमध्य रेखा पर चक्रवात क्यों नहीं बनते, या मानसून से पहले उपोष्ण पछुआ जेट स्ट्रीम उत्तर की ओर क्यों हटती है।
  • मानचित्र को लेकर सावधानी: अक्षांशीय पट्टियों को मोटे दायरे के रूप में याद रखें, पतली स्थिर रेखा की तरह नहीं। विषुवतीय निम्न दाब, उपोष्ण उच्च दाब, उपध्रुवीय निम्न दाब और ध्रुवीय उच्च दाब सूर्य की आभासी गति के साथ खिसकते हैं; स्थल-समुद्र का अंतर इन्हें कोशिकाओं में तोड़ देता है।
  • भारत से रिश्ता: पश्चिमी विक्षोभ, उत्तर-पश्चिम भारत की शीतकालीन वर्षा, ताप-लहर, लू, समुद्री समीर, घाटी पवन, प्रतिलोमन से जुड़ा कोहरा और मानसून की शुरुआत इसी तापमान-दाब-पवन कड़ी से समझ आते हैं।
  • अहम भ्रम: मौसम थोड़े समय की वायुमंडलीय दशा है; जलवायु लंबे समय का औसत प्रतिरूप है। दाब पेटी व्यापक अक्षांशीय प्रवृत्ति है; दाब कोशिका किसी मानचित्र पर दिखने वाला अधिक स्थानीय उच्च या निम्न दाब केंद्र है।
  • पढ़ने का तरीका: त्रि-कोशिकीय परिसंचरण का एक साफ चित्र बनाएं और उस पर व्यापारिक पवन, पछुआ पवन, ध्रुवीय पूर्वी पवन, अंतःउष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र और जेट स्ट्रीम लिखें। फिर हर प्रक्रिया के साथ भारतीय उदाहरण जोड़ें।
  • स्रोत को लेकर सावधानी: इस बुनियादी विषय में पहले NCERT के चित्रों को आधार बनाएं, फिर मानक भौतिक भूगोल पुस्तकों से विस्तार लें। हर पवन प्रश्न में आपदा-प्रबंधन वाले चक्रवात तथ्य न घुसाएं; UPSC केवल मूल तापमान-दाब तंत्र पूछ रहा हो सकता है।
  • क्रम याद रखें: वायुमंडल और सूर्यातप व्यवहार में अलग अध्याय नहीं हैं। सूर्यातप तापीय अंतर बनाता है, तापीय अंतर दाब अंतर बनाता है, दाब अंतर पवन शुरू करता है, और पवन ऊष्मा तथा नमी का पुनर्वितरण करती है।
  • चित्र क्यों जरूरी है: एक लेबल लगा परिसंचरण चित्र तीन सामान्य गलतियां रोकता है: मरुस्थल को भूमध्य रेखा पर रखना, 30° उच्च दाब को ठंडा उच्च दाब मानना, और कोरिऑलिस विचलन के बिना व्यापारिक पवन बनाना।

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संभावित प्रश्न

अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।

1MCQदाब पेटियों के बारे में निम्न कथनों पर विचार करें: 1. विषुवतीय निम्न दाब मजबूत संवहन से जुड़ा है। 2. उपोष्ण उच्च दाब मुख्यतः हैडली परिसंचरण की अवरोही शाखा से बनता है। 3. ध्रुवीय उच्च दाब ध्रुवों के पास गर्म वायु के ऊपर उठने से बनता है। कौन-से कथन सही हैं?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aकेवल 1 और 2सही
  2. Bकेवल 2 और 3
  3. Cकेवल 1 और 3
  4. D1, 2 और 3

व्याख्या

कथन 1 और 2 सही हैं। ध्रुवीय उच्च दाब ठंडी घनी वायु के नीचे बैठने से जुड़ा है, गर्म वायु के ऊपर उठने से नहीं।

~50 शब्द · 1 अंक