आर्द्रभूमि, रामसर स्थल, मैंग्रोव और प्रवाल भित्तियां
मुख्य तथ्य
- आर्द्रभूमि नियम, 2017 पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत हैं और राज्य या केंद्रशासित प्रदेश आर्द्रभूमि प्राधिकरणों पर टिके हैं।
- 21 अप्रैल 2026 तक भारत में 26 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 99 रामसर स्थल हैं, जिनका क्षेत्र लगभग 13.84 लाख हेक्टेयर है।
- सीआरजेड अधिसूचना, 2019 मैंग्रोव, प्रवाल भित्ति और जैविक रूप से सक्रिय कीचड़-मैदान को सीआरजेड-एक ए संवेदनशील क्षेत्र में रखती है।
- आईएसएफआर 2023 के अनुसार भारत का मैंग्रोव आवरण 4,991.68 वर्ग किमी है, जो भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 0.15% है।
- वेल्लोर 1996, कमल नाथ 1997 और रंजीतसिंह 2024 आवास संरक्षण के प्रमुख सिद्धांत देते हैं।
मुख्य बिंदु
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आर्द्रभूमि नियम, 2017 पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत हैं और राज्य या केंद्रशासित प्रदेश आर्द्रभूमि प्राधिकरणों पर टिके हैं।
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21 अप्रैल 2026 तक भारत में 26 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 99 रामसर स्थल हैं, जिनका क्षेत्र लगभग 13.84 लाख हेक्टेयर है।
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रामसर सूची, घरेलू आर्द्रभूमि अधिसूचना, संरक्षित क्षेत्र और सीआरजेड श्रेणी आपस में जुड़ सकते हैं, पर अलग-अलग हैं।
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सीआरजेड अधिसूचना, 2019 मैंग्रोव, प्रवाल भित्ति और जैविक रूप से सक्रिय कीचड़-मैदान को सीआरजेड-एक ए संवेदनशील क्षेत्र में रखती है।
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आईएसएफआर 2023 के अनुसार भारत का मैंग्रोव आवरण 4,991.68 वर्ग किमी है, जो भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 0.15% है।
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वेल्लोर 1996, कमल नाथ 1997 और रंजीतसिंह 2024 आवास संरक्षण के प्रमुख सिद्धांत देते हैं।
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प्रवाल भित्तियों को गर्म, साफ, उथला और धूपदार पानी चाहिए; विरंजन तनाव का संकेत है, हमेशा तुरंत मृत्यु नहीं।
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समझदारी से उपयोग पारिस्थितिक चरित्र बचाते हुए संगत आजीविका उपयोग की अनुमति देता है; यह पूर्ण मानव-बहिष्कार मॉडल नहीं है।
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अवधारणा मानचित्र: एक विषय, चार जुड़ी हुई श्रेणियां
आर्द्रभूमि, रामसर स्थल, मैंग्रोव और प्रवाल भित्तियां अलग-अलग रटने की चीजें नहीं हैं। UPSC इन्हें जल, जैव विविधता, तटीय सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के साझा ढांचे में पूछता है।
- आर्द्रभूमि का मूल अर्थ: जहां पानी मिट्टी, वनस्पति और जीव-जंतुओं की प्रकृति तय करता है, वह क्षेत्र आर्द्रभूमि हो सकता है। यह प्राकृतिक या मानव-निर्मित, स्थायी या मौसमी, मीठे पानी वाला, खारा या मिश्रित खारा हो सकता है।
- रामसर परिभाषा झील तक सीमित नहीं: रामसर अभिसमय में दलदल, पीटभूमि, बाढ़भूमि, झील, नदी, मुहाना, डेल्टा, ज्वारीय मैदान, मैंग्रोव, प्रवाल भित्ति और कम ज्वार पर 6 मीटर तक गहरे समुद्री क्षेत्र भी आ सकते हैं।
- UPSC की आम गलती: हर रामसर स्थल अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि है, पर हर महत्वपूर्ण भारतीय आर्द्रभूमि अपने-आप रामसर स्थल नहीं बनती। इसके लिए मानदंड और सरकारी नामांकन चाहिए।
- मैंग्रोव आर्द्रभूमि-वन हैं: मैंग्रोव खारेपन को सहने वाले ज्वारीय पौध-समुदाय हैं, जो डेल्टा, मुहानों, ज्वारीय खाड़ियों और शांत तटीय हिस्सों में मिलते हैं। इसलिए उन पर आर्द्रभूमि, वन, वन्यजीव और तटीय नियम साथ-साथ असर डालते हैं।
- प्रवाल भित्तियां समुद्री आर्द्रभूमि हैं: प्रवाल भित्तियां मुख्यतः प्रवाल पॉलीप और सहजीवी शैवाल से बनी जीवित कैल्शियम-कार्बोनेट संरचनाएं हैं। भारत में इनके मुख्य क्षेत्र कच्छ की खाड़ी, मन्नार की खाड़ी, लक्षद्वीप, अंडमान-निकोबार और मालवन हैं।
- परीक्षा में अहम हिस्सा: परिभाषा, भारतीय नियमों में अपवाद, रामसर मानदंड, सीआरजेड-एक ए, मोंट्रेक्स रिकॉर्ड और नए स्थल-संख्याओं पर कथन अक्सर उलझाए जाते हैं।
- कामकाजी संबंध: आर्द्रभूमि पानी रोकती और साफ करती है; मैंग्रोव तूफानी लहरों की ताकत घटाते हैं; प्रवाल भित्तियां मत्स्य संसाधन और तटीय सुरक्षा देती हैं। मिलकर ये भारत की नीली-हरी प्राकृतिक सुरक्षा हैं।
- सावधानी वाला ताजा तथ्य: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की 21 अप्रैल 2026 की सूची में भारत के 99 रामसर स्थल और लगभग 13.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र दर्ज हैं। संख्या के साथ तारीख याद रखें, क्योंकि सूची बदलती रहती है।
- जुड़े हुए विषय: यह अध्याय जैव विविधता के अति-समृद्ध क्षेत्र, संरक्षित क्षेत्र, जलवायु अनुकूलन, पर्यावरण प्रभाव आकलन, तटीय विनियमन, बाहरी आक्रामक प्रजाति, जल प्रदूषण और आपदा प्रबंधन से सीधे जुड़ता है।
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1MCQआर्द्रभूमि नियम, 2017 पर निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. ये पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत जारी किए गए। 2. ये राष्ट्रीय आर्द्रभूमि समिति को हर अधिसूचित आर्द्रभूमि की रोजमर्रा की प्रबंधक संस्था बनाते हैं। 3. ये समझदारी से उपयोग और पारिस्थितिक चरित्र पर ध्यान देते हैं। कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
व्याख्या
नियम पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत हैं और समझदारी से उपयोग की सोच अपनाते हैं। रोजमर्रा की पहचान और प्रबंधन राज्य या केंद्रशासित प्रदेश आर्द्रभूमि प्राधिकरणों पर केंद्रित है, राष्ट्रीय आर्द्रभूमि समिति पर नहीं।
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