पर्यावरण प्रदूषण: वायु, जल, मृदा, ध्वनि और तापीय प्रदूषण
मुख्य तथ्य
- प्रदूषण पर सवाल स्रोत, मार्ग और प्रभावित पक्ष के ढांचे से समझें, केवल उदाहरण याद करके नहीं।
- राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक 8 प्रदूषक लेता है; राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक, 2009 में 12 प्रदूषक हैं और वही मानक ढांचा है।
- ऊंची बीओडी सामान्यतः कार्बनिक जल प्रदूषण दिखाती है; घुली ऑक्सीजन का ऊंचा स्तर जलीय जीवन के लिए बेहतर होता है।
- मृदा प्रदूषण भारी धातुओं, कीटनाशकों, लवणों, कचरा-ढेर स्थल और अनौपचारिक ई-कचरा प्रसंस्करण से लंबे समय टिकता है।
- ध्वनि ऊर्जा-आधारित प्रदूषण है; इसका नियंत्रण क्षेत्र-वर्ग, दिन-रात सीमा और स्थानीय अमल से होता है।
मुख्य बिंदु
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प्रदूषण पर सवाल स्रोत, मार्ग और प्रभावित पक्ष के ढांचे से समझें, केवल उदाहरण याद करके नहीं।
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राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक 8 प्रदूषक लेता है; राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक, 2009 में 12 प्रदूषक हैं और वही मानक ढांचा है।
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ऊंची बीओडी सामान्यतः कार्बनिक जल प्रदूषण दिखाती है; घुली ऑक्सीजन का ऊंचा स्तर जलीय जीवन के लिए बेहतर होता है।
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मृदा प्रदूषण भारी धातुओं, कीटनाशकों, लवणों, कचरा-ढेर स्थल और अनौपचारिक ई-कचरा प्रसंस्करण से लंबे समय टिकता है।
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ध्वनि ऊर्जा-आधारित प्रदूषण है; इसका नियंत्रण क्षेत्र-वर्ग, दिन-रात सीमा और स्थानीय अमल से होता है।
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तापीय प्रदूषण स्थानीय ताप भार बढ़ना है, खासकर गरम पानी निकास; यह वैश्विक तापन नहीं है।
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अनुच्छेद 21, अनुच्छेद 48A और अनुच्छेद 51A(g) प्रदूषण नियंत्रण का संवैधानिक आधार बनाते हैं।
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सावधानी सिद्धांत, प्रदूषक भुगतान सिद्धांत और पूर्ण दायित्व प्रदूषण मामलों के अहम न्यायिक सिद्धांत हैं।
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प्रदूषण का ढांचा और UPSC के लिहाज़ से दायरा
प्रदूषण केवल दिखाई देने वाली गंदगी नहीं है; UPSC इसे पारिस्थितिकी, कानून और जन-स्वास्थ्य से जुड़े विषय की तरह पूछता है, जहाँ स्रोत, फैलने का रास्ता और असर झेलने वाले समूह को साथ समझना पड़ता है।
- मूल अर्थ: पर्यावरण प्रदूषण तब होता है जब कोई पदार्थ, ऊर्जा या जैविक कारक वायु, जल, मृदा या आसपास के वातावरण में इतनी मात्रा में मौजूद हो कि जीवन, संपत्ति, पारितंत्र सेवाओं या मानव सुविधा को नुकसान पहुंचे।
- प्रदूषक के प्रकार: प्राथमिक प्रदूषक सीधे निकलते हैं, जैसे सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, उड़न राख, बिना उपचार वाला मलजल, कीटनाशक और भारी धातुएं। द्वितीयक प्रदूषक बाद की अभिक्रियाओं से बनते हैं, जैसे सतह के पास बनने वाला ओजोन, द्वितीयक कणीय पदार्थ और अम्लीय वर्षा।
- माध्यम के आधार पर वर्गीकरण: इस विषय में वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और तापीय प्रदूषण आते हैं। अपशिष्ट, प्लास्टिक अपशिष्ट, ई-कचरा और खतरनाक अपशिष्ट इससे जुड़े हैं, पर वे अलग विषय भी हैं।
- स्रोत, मार्ग और प्रभावित पक्ष का ढांचा: चिमनी, वाहन धुआं, खेत, नाला, लाउडस्पीकर या गरम पानी छोड़ने वाला निकास बिंदु स्रोत है; हवा, बहाव, रिसाव, खाद्य श्रृंखला या ध्वनि तरंग मार्ग है; मानव, फसल, जलीय जीव, इमारतें और स्मारक प्रभावित पक्ष हैं।
- बिंदु स्रोत और फैला हुआ स्रोत: नदी में पाइप से गिरता अपशिष्ट जल नियंत्रित करना आसान है; खेतों से बहकर आने वाला उर्वरक, सड़क की धूल, पराली जलना और घरेलू ठोस ईंधन अधिक फैले हुए स्रोत हैं। UPSC ऐसे अंतर को कथन-समूह में पूछता है।
- वहन क्षमता: प्राकृतिक तंत्र कुछ प्रदूषकों को पतला, विघटित या स्थिर कर सकते हैं, लेकिन उनकी सीमा होती है। सीमा पार होने पर अतिपोषण, धुंध-धुआं, मछलियों की मृत्यु, भूजल प्रदूषण और लंबे समय की बीमारियां दिखती हैं।
- कानूनी आधार: अनुच्छेद 21 को न्यायालयों ने स्वच्छ पर्यावरण से जोड़ा है; अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण संरक्षण का निर्देश देता है; अनुच्छेद 51A(g) नागरिकों का कर्तव्य बताता है। अनुच्छेद 253 अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को लागू करने के लिए केंद्रीय कानून का आधार देता है।
- मुख्य कानून: जल अधिनियम, 1974; वायु अधिनियम, 1981; पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986; राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010; और ध्वनि, अपशिष्ट, खतरनाक रसायन तथा पर्यावरणीय मानकों से जुड़े नियम।
- संस्थागत ढांचा: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मानक बनाते हैं, निगरानी करते हैं, उद्योगों को सहमति देते हैं और निर्देश जारी करते हैं; NGT विशेष पर्यावरणीय विवाद सुनता है; वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की वायु समस्या पर काम करता है; नगर निकाय, परिवहन विभाग, कृषि विभाग और बिजली नियामक लागू करने वाली इकाइयां हैं।
- प्रीलिम्स संकेत: परिभाषा को उपकरणों के साथ याद रखें। वायु गुणवत्ता सूचकांक, राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक, बीओडी, सीओडी, घुली ऑक्सीजन, डेसिबल सीमा, समग्र पर्यावरण प्रदूषण सूचकांक, स्थापना-सहमति, संचालन-सहमति, पर्यावरण प्रभाव आकलन और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति सीधे पूछे जा सकते हैं।
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1MCQभारत के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक पर निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. इसमें पीएम10 और पीएम2.5 शामिल हैं। 2. यह राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों का विकल्प है। 3. इसमें अमोनिया और सीसा भी शामिल हैं। कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
व्याख्या
वायु गुणवत्ता सूचकांक 8 प्रदूषक लेता है, जिनमें पीएम10, पीएम2.5, अमोनिया और सीसा शामिल हैं; पर यह सूचना सूचक है और राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक का विकल्प नहीं है।
~50 शब्द · 1 अंक
