मुख्य तथ्य

  • अनुच्छेद 253 अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय अभिसमयों को भारतीय कानून से लागू करने का संवैधानिक पुल है।
  • जैव विविधता अभिसमय के 3 उद्देश्य हैं: संरक्षण, सतत उपयोग और आनुवंशिक संसाधनों से न्यायपूर्ण लाभ-साझाकरण।
  • सीएमएस में 2 परिशिष्ट हैं और यह प्रवासी प्रजातियों के लिए प्रवास-क्षेत्र वाले देशों के सहयोग पर केंद्रित है।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    अनुच्छेद 253 अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय अभिसमयों को भारतीय कानून से लागू करने का संवैधानिक पुल है।

  2. 2

    जैव विविधता अभिसमय के 3 उद्देश्य हैं: संरक्षण, सतत उपयोग और आनुवंशिक संसाधनों से न्यायपूर्ण लाभ-साझाकरण।

  3. 3

    साइट्स सूचीबद्ध जीव और पौधों के नमूनों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करता है; यह आईयूसीएन लाल सूची नहीं है।

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    सीएमएस में 2 परिशिष्ट हैं और यह प्रवासी प्रजातियों के लिए प्रवास-क्षेत्र वाले देशों के सहयोग पर केंद्रित है।

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    रामसर नामांकन अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि को मान्यता देता है; इससे अपने-आप राष्ट्रीय उद्यान नहीं बनता।

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    यूएनईपी संयुक्त राष्ट्र का कार्यक्रम है; यूएनईए पर्यावरण पर सर्वोच्च वैश्विक निर्णयकारी सभा है।

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    भारत इन्हें जैव विविधता, वन्यजीव, आर्द्रभूमि और पर्यावरण कानूनों से लागू करता है।

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    जैव विविधता अभिसमय, सीएमएस और रामसर की हाल की संख्याएं या नई प्रविष्टियां तारीख वाले आधिकारिक स्रोत से ही लिखें।

ढांचा, कानूनी आधार और परीक्षा मानचित्र

अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय अभिसमय केवल नाम याद करने का विषय नहीं हैं; प्रीलिम्स में इन्हें वैश्विक वचनबद्धता, भारत के कानून और प्रजाति-स्थल सूचियों को मिलाकर पूछा जाता है।

  • मूल बात: अभिसमय एक व्यापक ढांचा देता है; प्रोटोकॉल सामान्यतः उसी ढांचे में खास दायित्व तय करता है; पक्षकार सम्मेलन क्रियान्वयन, तकनीकी सूचियों, लक्ष्यों और मार्गदर्शन की समीक्षा करता है।
  • भारत में संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 253 संसद को किसी संधि, करार, अभिसमय या अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के निर्णय को लागू करने के लिए कानून बनाने की शक्ति देता है। पर्यावरण का संबंध अनुच्छेद 48A, अनुच्छेद 51A(g), अनुच्छेद 21 और हाल की जलवायु मुकदमेबाज़ी के बाद अनुच्छेद 14 से भी जुड़ता है।
  • अहम घरेलू कानून: पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986; वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972; वन संरक्षण अधिनियम, 1980; जैव विविधता अधिनियम, 2002; जैव विविधता संशोधन अधिनियम, 2023; आर्द्रभूमि संरक्षण और प्रबंधन नियम, 2017।
  • परीक्षा में सामान्य भ्रम: भारत किसी अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज़ पर सहमत हो जाए, इसका अर्थ यह नहीं कि वह अपने-आप अदालत में लागू हो गया। घरेलू असर प्रायः कानून, नियम, अधिसूचना, अनुमति-पत्र व्यवस्था या किसी प्राधिकरण के ज़रिए आता है।
  • स्टॉकहोम संबंध: पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 स्टॉकहोम सम्मेलन की पृष्ठभूमि और अनुच्छेद 253 की शक्ति से जुड़ा व्यापक कानून है; इससे केंद्र सरकार को पर्यावरण गुणवत्ता सुधारने और प्रदूषण रोकने की बड़ी शक्ति मिलती है।
  • 42वां संशोधन, 1976: इसी संशोधन से अनुच्छेद 48A और अनुच्छेद 51A(g) आए, यानी पर्यावरण संरक्षण राज्य का नीति-निदेशक दायित्व और नागरिक का मूल कर्तव्य बना।
  • न्यायिक विकास: सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य, 1991 ने प्रदूषण-मुक्त जल और हवा को अनुच्छेद 21 से जोड़ा; वेल्लोर नागरिक कल्याण मंच बनाम भारत संघ, 1996 ने सतत विकास, सावधानी सिद्धांत और प्रदूषक भुगतान सिद्धांत को स्वीकार किया; टी.एन. गोदावर्मन मामलों ने वन और संरक्षण प्रशासन का दायरा बढ़ाया; एम.सी. मेहता मामलों ने पर्यावरणीय जिम्मेदारी को व्यवहार में उतारा।
  • हाल का मामला: एम.के. रंजीतसिंह बनाम भारत संघ, 2024 ने गोडावण संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा की ज़रूरतों में संतुलन बैठाते हुए जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल असर से बचने को अनुच्छेद 14 और 21 से जोड़ा।
  • UPSC के लिहाज़ से: हर अभिसमय के उद्देश्य, कानूनी दर्जे, परिशिष्ट या सूची, भारत में लागू करने वाले कानून, मुख्य समन्वय संस्था और एक समसामयिक बहस को साथ पढ़ें।

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संभावित प्रश्न

अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।

1MCQनिम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. जैव विविधता अभिसमय संरक्षण, सतत उपयोग और न्यायपूर्ण लाभ-साझाकरण को समेटता है। 2. नागोया प्रोटोकॉल जीवित संशोधित जीवों की जैव-सुरक्षा से जुड़ा है। 3. कार्टाजेना प्रोटोकॉल पहुंच और लाभ-साझाकरण से जुड़ा है। कौन-से कथन सही हैं?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aकेवल 1सही
  2. Bकेवल 1 और 2
  3. Cकेवल 2 और 3
  4. D1, 2 और 3

व्याख्या

कथन 1 सही है। नागोया प्रोटोकॉल पहुंच और लाभ-साझाकरण से जुड़ा है; कार्टाजेना प्रोटोकॉल जीवित संशोधित जीवों की जैव-सुरक्षा से जुड़ा है।

~50 शब्द · 1 अंक