भारत की जैव विविधता — वनस्पति, जीव-जंतु, स्थानिक और आधारभूत भूमिका वाली प्रजातियां
मुख्य तथ्य
- भारत में 10 जैव-प्रदेश हैं और 4 वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट उसके क्षेत्र से जुड़े हैं।
- अनुच्छेद 48A, अनुच्छेद 51A(g), अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 253 संवैधानिक पर्यावरण आधार बनाते हैं।
- भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार वनावरण और वृक्षावरण 827,357 वर्ग किमी है, यानी भारत के भौगोलिक क्षेत्र का 25.17%।
मुख्य बिंदु
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जैव विविधता में आनुवंशिक, प्रजातीय और पारितंत्रीय विविधता आती है; वन्यजीव इसका केवल एक हिस्सा है।
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भारत में 10 जैव-प्रदेश हैं और 4 वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट उसके क्षेत्र से जुड़े हैं।
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अनुच्छेद 48A, अनुच्छेद 51A(g), अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 253 संवैधानिक पर्यावरण आधार बनाते हैं।
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वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूचियां, IUCN श्रेणियां और वन्यजीव और वनस्पति के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय के परिशिष्ट अलग-अलग वर्गीकरण हैं।
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स्थानिक का अर्थ सीमित प्राकृतिक फैलाव है; लुप्तप्राय का अर्थ अधिक विलुप्ति जोखिम। दोनों समानार्थी नहीं हैं।
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आधारभूत, प्रतीक और छत्र प्रजातियां क्रमशः पारिस्थितिक भूमिका, जन-आकर्षण और आवास-सुरक्षा मूल्य से पहचानी जाती हैं।
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भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार वनावरण और वृक्षावरण 827,357 वर्ग किमी है, यानी भारत के भौगोलिक क्षेत्र का 25.17%।
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हाल की बहसों में चीता पुनर्प्रवेश, गोडावण पर बिजली लाइन जोखिम, वन कानून दायरा और जैव विविधता अनुपालन सुधार शामिल हैं।
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परिभाषा, स्तर और परीक्षा का दायरा
जैव विविधता केवल सुंदर प्रजातियों की सूची नहीं है। इसका अर्थ जीवन की विविधता से है, जो आनुवंशिक, प्रजातीय और पारितंत्रीय स्तरों पर दिखाई देती है। UPSC इसी परतदार समझ को भारतीय उदाहरणों से जोड़कर पूछता है।
- तीन स्तर: आनुवंशिक विविधता एक ही प्रजाति के भीतर अंतर है, जैसे धान की स्थानीय किस्में, मोटे अनाज, फसलों के जंगली रिश्तेदार और स्थानीय पशु नस्लें। प्रजातीय विविधता प्रजातियों की संख्या और उनके अनुपात से जुड़ी है। पारितंत्रीय विविधता वन, घासभूमि, आर्द्रभूमि, मरुस्थल, द्वीप, तट और समुद्री क्षेत्रों में दिखती है।
- भारतीय दायरा: भारत को महाविविध देश माना जाता है, क्योंकि दुनिया के भू-भाग में उसका हिस्सा छोटा होते हुए भी यहां दर्ज प्रजातियों, जैव-प्रदेशों, 4 वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट और पारंपरिक ज्ञान का बड़ा भंडार मिलता है।
- वनस्पति और जीव-जंतु: वनस्पति में पौधे, शैवाल, कई संदर्भों में कवक और वनस्पति प्रकार आते हैं। जीव-जंतु में कीट, मोलस्क, मछलियां, उभयचर, सरीसृप, पक्षी और स्तनधारी सभी शामिल हैं। परीक्षा में जीव-जंतु को केवल बड़े स्तनधारियों तक सीमित मानना गलती है।
- स्थानिकता: स्थानिक प्रजाति प्राकृतिक रूप से किसी सीमित क्षेत्र तक सीमित रहती है। यह क्षेत्र कोई पर्वत-श्रृंखला, द्वीप-समूह, नदी घाटी या जैव विविधता हॉटस्पॉट हो सकता है। अधिक स्थानिकता और आवास हानि साथ हों, तो संरक्षण प्राथमिकता बढ़ जाती है।
- आधारभूत भूमिका: आधारभूत भूमिका वाली प्रजाति का पारिस्थितिक असर उसकी संख्या से कहीं बड़ा होता है। शीर्ष शिकारी, बड़े शाकाहारी, परागण करने वाली प्रजातियां, बीज फैलाने वाले जीव और प्रवाल बनाने वाले जीव खाद्य जाल, वनस्पति संरचना या पोषक-तत्व चक्र को संभाल सकते हैं।
- परीक्षा की आम गलती: बाघ या हाथी जैसी प्रतीक प्रजातियां लोगों का ध्यान खींचती हैं। छत्र प्रजाति का आवास बचाने से कई दूसरी प्रजातियां भी बचती हैं। आधारभूत भूमिका वाली प्रजाति की पहचान लोकप्रियता से नहीं, पारिस्थितिक काम से होती है।
- स्थिर और समसामयिक मेल: यह अध्याय NCERT की पारिस्थितिकी, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूचियों, जैव विविधता अधिनियम की संस्थाओं, वनावरण आंकड़ों और गलियारों, बाहरी आक्रामक प्रजातियों तथा विकास परियोजनाओं की बहसों से जुड़ता है।
- पढ़ने का तरीका: उदाहरणों को भूमिका और आवास से जोड़ें। बाघ वन परिदृश्य में शीर्ष शिकारी और छत्र प्रजाति है। हाथी बीज फैलाता है और आवास को बदलता है। मैंग्रोव तटीय आवास हैं। प्रवाल भित्ति समुद्री जैव विविधता का केंद्र है। पश्चिमी घाट के उभयचर स्थानिकता के अच्छे संकेतक हैं।
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स्टडी पैक खोलेंसंभावितसंभावित प्रश्न
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1MCQभारत में जैव विविधता के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. आनुवंशिक विविधता में स्थानीय फसल किस्में और फसलों के जंगली रिश्तेदार आते हैं। 2. पारितंत्रीय विविधता केवल वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अधिसूचित संरक्षित क्षेत्रों तक सीमित है। 3. स्थानिकता का अर्थ किसी प्रजाति का प्राकृतिक रूप से किसी तय क्षेत्र तक सीमित होना है। ऊपर दिए गए कौन-से कथन सही हैं?
व्याख्या
कथन 1 और 3 सही हैं। पारितंत्रीय विविधता में वन, आर्द्रभूमि, घासभूमि, तट, द्वीप, मरुस्थल और कृषि पारितंत्र आते हैं; यह केवल कानूनी संरक्षित क्षेत्रों तक सीमित नहीं है।
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