भारत की जलवायु कार्रवाई: राष्ट्रीय कार्ययोजना, राज्य कार्ययोजनाएं और मिशन
मुख्य तथ्य
- राष्ट्रीय कार्ययोजना 2008 में भारत की व्यापक जलवायु नीति बनी; हाल की सरकारी भाषा 9 मिशन बताती है, जबकि मूल ढांचा 8 मिशनों का था।
- अनुच्छेद 21, 14, 48A, 51A(g) और 253 जलवायु कार्रवाई के प्रमुख संवैधानिक आधार हैं।
- भारत के 2022 राष्ट्रीय योगदान में 2030 तक उत्सर्जन तीव्रता में 45% कमी और लगभग 50% गैर-जीवाश्म स्थापित बिजली क्षमता का लक्ष्य है।
- 2020 में बनी शीर्ष समिति पेरिस समझौते के क्रियान्वयन और अनुच्छेद 6 कार्बन बाज़ार मामलों का समन्वय करती है।
- एम. के. रणजीतसिंह, 2024 ने जलवायु नुकसान से सुरक्षा को अनुच्छेद 14 और 21 से जोड़ा।
मुख्य बिंदु
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राष्ट्रीय कार्ययोजना 2008 में भारत की व्यापक जलवायु नीति बनी; हाल की सरकारी भाषा 9 मिशन बताती है, जबकि मूल ढांचा 8 मिशनों का था।
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राज्य कार्ययोजनाएं राष्ट्रीय मिशनों को राज्य-विशिष्ट जोखिम, क्षेत्र, वित्त और विभागीय कार्रवाई में बदलती हैं।
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अनुच्छेद 21, 14, 48A, 51A(g) और 253 जलवायु कार्रवाई के प्रमुख संवैधानिक आधार हैं।
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भारत के 2022 राष्ट्रीय योगदान में 2030 तक उत्सर्जन तीव्रता में 45% कमी और लगभग 50% गैर-जीवाश्म स्थापित बिजली क्षमता का लक्ष्य है।
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2020 में बनी शीर्ष समिति पेरिस समझौते के क्रियान्वयन और अनुच्छेद 6 कार्बन बाज़ार मामलों का समन्वय करती है।
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एम. के. रणजीतसिंह, 2024 ने जलवायु नुकसान से सुरक्षा को अनुच्छेद 14 और 21 से जोड़ा।
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हरित भारत मिशन वन, जैव विविधता, आजीविका और भारत के कार्बन सोखने वाले भंडार से जुड़े लक्ष्यों को जोड़ता है।
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गैर-जीवाश्म स्थापित क्षमता वास्तविक उत्पादन हिस्से या कुल उत्सर्जन कमी के बराबर नहीं होती।
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ढांचा, संवैधानिक आधार और परीक्षा की सीमा
भारत की जलवायु कार्रवाई कोई एक कानून या किसी एक मंत्रालय की योजना नहीं है। प्रारंभिक परीक्षा के लिए इसे कई परतों में पढ़ें: संवैधानिक कर्तव्य, पर्यावरण कानून, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं, राष्ट्रीय मिशन, राज्य कार्ययोजनाएं और क्षेत्रवार उपाय।
- मूल अर्थ: जलवायु कार्रवाई का मतलब शमन, अनुकूलन, जलवायु-लचीलापन, जलवायु वित्त, तकनीकी बदलाव और जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र जलवायु अभिसमय के ढांचे के तहत रिपोर्ट देने से जुड़ी नीतियां और उनका क्रियान्वयन है।
- राष्ट्रीय कार्ययोजना की भूमिका: जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्ययोजना 30 जून 2008 को शुरू हुई। यह भारत का व्यापक घरेलू ढांचा है, जो विकास को जलवायु के हिसाब से अधिक टिकाऊ बनाने के लिए ऊर्जा, जल, कृषि, वन, शहर, स्वास्थ्य और ज्ञान जैसे क्षेत्रों को मिशन-आधारित ढंग से जोड़ता है।
- राज्यों की भूमिका: जलवायु परिवर्तन पर राज्य कार्ययोजनाएं राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को राज्य की अपनी जोखिम-स्थिति, विभागीय जिम्मेदारी, बजट और क्षेत्रवार कार्यक्रमों में बदलती हैं। यह ज़रूरी है, क्योंकि जल, कृषि, स्वास्थ्य, भूमि-उपयोग, आपदा प्रबंधन और शहरी सेवाओं का बड़ा हिस्सा राज्यों और स्थानीय निकायों से लागू होता है।
- संवैधानिक आधार:
- अनुच्छेद 21 जीवन के अधिकार का आधार है; उच्चतम न्यायालय ने इसी के भीतर स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण को पढ़ा है।
- अनुच्छेद 14 एम. के. रणजीतसिंह बनाम भारत संघ, 2024 में अहम हुआ, क्योंकि जलवायु नुकसान का असमान असर समानता के प्रश्न से जोड़ा गया।
- अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण की रक्षा और सुधार तथा वन और वन्यजीव की सुरक्षा का निर्देश देता है।
- अनुच्छेद 51A(g) हर नागरिक का कर्तव्य बताता है कि वह प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करे।
- अनुच्छेद 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करने के लिए कानून बनाने की शक्ति देता है; कई पर्यावरण कानूनों के पीछे यही आधार दिखता है।
- सातवीं अनुसूची से संबंध: वन और वन्यजीव समवर्ती सूची की प्रविष्टि 17A और 17B में हैं; जल मुख्यतः राज्य सूची की प्रविष्टि 17 में है, लेकिन अंतर-राज्यीय नदियों पर संघ की शक्ति अलग से आती है; अंतरराष्ट्रीय संधियां संघ सूची की प्रविष्टि 13 और 14 से जुड़ती हैं।
- कानूनी तंत्र: पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986; वायु अधिनियम, 1981; जल अधिनियम, 1974; वन संरक्षण अधिनियम, 1980; जैव विविधता अधिनियम, 2002; ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 और 2022 का संशोधन जलवायु कार्रवाई के अलग-अलग हिस्सों को सहारा देते हैं।
- UPSC की सीमा: यहां जलवायु मॉडल विश्लेषण नहीं पूछा जाता। ज़्यादा अहम यह है कि कौन-सा साधन क्या करता है, कौन-सा मिशन कहां बैठता है, हाल में क्या बदला और कानून, संघवाद और क्रियान्वयन के बीच टकराव कहां आता है।
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1MCQभारत की जलवायु कार्रवाई की व्यवस्था पर विचार करें: 1. राष्ट्रीय कार्ययोजना घरेलू नीति ढांचा है। 2. राष्ट्रीय योगदान पेरिस समझौते के तहत भेजी गई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता है। 3. राज्य कार्ययोजनाएं राज्य-स्तरीय योजना दस्तावेज़ हैं। कौन-से कथन सही हैं?
व्याख्या
तीनों फर्क सही हैं और साधनों को आपस में मिलाने वाली गलती से बचने के लिए ज़रूरी हैं।
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