वन-प्रकार और वन संरक्षण - वन अधिकार अधिनियम और वन स्थिति रिपोर्ट
मुख्य तथ्य
- 42वें संशोधन से वन समवर्ती सूची में आए; प्रविष्टि 17A वन और प्रविष्टि 17B वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी है।
- भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट 2023 कुल वन और वृक्षावरण 8,27,357 वर्ग किमी, यानी भारत के 25.17% भौगोलिक क्षेत्र, बताती है।
- गोदावर्मन 1996 ने 1980 अधिनियम के लिए वन को स्वामित्व या वर्गीकरण से परे व्यापक शब्दकोश अर्थ में पढ़ा।
- वन अधिकार अधिनियम, 2006 अधिकार और जिम्मेदारियां मानता है; धारा 6 ग्राम सभा से शुरू होती है और धारा 4(5) समयपूर्व बेदखली रोकती है।
- 2023 वन-संरक्षण संशोधन ने दायरा, छूटें और अनुमति-योग्य गतिविधियां बदलीं, जिससे कानूनी-नीतिगत बहस चल रही है।
मुख्य बिंदु
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42वें संशोधन से वन समवर्ती सूची में आए; प्रविष्टि 17A वन और प्रविष्टि 17B वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी है।
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भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट 2023 कुल वन और वृक्षावरण 8,27,357 वर्ग किमी, यानी भारत के 25.17% भौगोलिक क्षेत्र, बताती है।
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वनावरण वृक्ष-छत्र आधारित माप है; दर्ज वन क्षेत्र कानूनी-प्रशासनिक श्रेणी है, इसलिए दोनों समान नहीं हैं।
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गोदावर्मन 1996 ने 1980 अधिनियम के लिए वन को स्वामित्व या वर्गीकरण से परे व्यापक शब्दकोश अर्थ में पढ़ा।
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वन अधिकार अधिनियम, 2006 अधिकार और जिम्मेदारियां मानता है; धारा 6 ग्राम सभा से शुरू होती है और धारा 4(5) समयपूर्व बेदखली रोकती है।
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2023 वन-संरक्षण संशोधन ने दायरा, छूटें और अनुमति-योग्य गतिविधियां बदलीं, जिससे कानूनी-नीतिगत बहस चल रही है।
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प्रतिपूरक वनीकरण क्षेत्र की भरपाई कर सकता है, पर परिपक्व प्राकृतिक वन या वन्यजीव गलियारे की स्वतः भरपाई नहीं करता।
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UPSC अक्सर 1 हेक्टेयर से अधिक, 10%, 40%, 70%, 4 हेक्टेयर, 13 दिसंबर 2005 और 12 दिसंबर 1996 जैसी सीमाएं मिलाकर पूछता है।
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वन को पारिस्थितिक आधार मानकर पढ़ना
वन को केवल पेड़ों वाली जमीन मानकर पढ़ना UPSC में अधूरा है। यहां वन एक कानूनी श्रेणी भी है, जलवायु नीति का साधन भी, जैव विविधता का आवास भी और आजीविका का आधार भी।
- पारिस्थितिक अर्थ: वन पौधों, जीव-जंतुओं, मिट्टी के जीवों और स्थानीय जलवायु का ऐसा समुदाय है जो अपने भीतर कई प्रक्रियाएं चलाता है। परीक्षा में इसका महत्व कार्बन सोखने वाले भंडार, जलग्रहण सुरक्षा, मिट्टी को बांधने, प्राकृतिक आवास जोड़ने, स्थानीय तापमान संभालने और आजीविका देने से बनता है।
- संवैधानिक आधार: 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 से वन राज्य सूची से समवर्ती सूची में आए। प्रविष्टि 17A वन से और प्रविष्टि 17B वन्यजीवों तथा पक्षियों की रक्षा से जुड़ी है। इसलिए संसद और राज्य विधानमंडल दोनों कानून बना सकते हैं, पर संविधान की सीमाएं लागू रहती हैं।
- कर्तव्य और नीति: अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण सुधारने और वन व वन्यजीवों की रक्षा करने का निर्देश देता है। अनुच्छेद 51A(g) नागरिक का मूल कर्तव्य बताता है। अनुच्छेद 21 को उच्चतम न्यायालय ने स्वस्थ पर्यावरण से जोड़ा है।
- कानूनी ढांचा: भारतीय वन अधिनियम, 1927 आरक्षित वन, संरक्षित वन और ग्राम वन को नियंत्रित करता है; वन संरक्षण अधिनियम, 1980 वन भूमि के गैर-वन उपयोग पर केंद्र की मंज़ूरी मांगता है; वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 प्रजातियों और आवास की रक्षा करता है; पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 व्यापक शक्तियां देता है; वन अधिकार अधिनियम, 2006 वनवासियों के अधिकार और जिम्मेदारियां मानता है।
- नीति लक्ष्य: राष्ट्रीय वन नीति, 1988 देश के कम से कम एक-तिहाई भौगोलिक क्षेत्र को वन या वृक्षावरण के तहत देखना चाहती है, पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अपेक्षा और अधिक है।
- UPSC के लिहाज़ से सावधानी: उपग्रह से दिखा वनावरण और कानून में दर्ज वन भूमि एक चीज़ नहीं हैं। निजी बागान वनावरण में गिन सकता है, जबकि दर्ज वन भूमि खराब हालत में होने पर भी कानूनी वन बनी रहती है।
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1MCQभारतीय वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. वनावरण भारत के भौगोलिक क्षेत्र का 21.76% बताया गया है। 2. वृक्षावरण केवल दर्ज वन क्षेत्र के भीतर शामिल होता है। 3. रिपोर्ट भारतीय वन सर्वेक्षण जारी करता है। कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
व्याख्या
वनावरण 7,15,343 वर्ग किमी यानी 21.76% है और रिपोर्ट भारतीय वन सर्वेक्षण जारी करता है। वृक्षावरण अलग बताया जाता है और केवल दर्ज वन क्षेत्र तक सीमित नहीं है।
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