पारितंत्र के प्रकार — वन, घासभूमि, मरुस्थल, जलीय पारितंत्र और आर्द्रभूमि
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 48A, 51A(g), 21 और 253 पर्यावरण का मुख्य संवैधानिक ढांचा देते हैं।
- 42वें संशोधन, 1976 ने वन और वन्यजीव संरक्षण को समवर्ती सूची में रखा।
- भारत 01.02.1982 को रामसर का पक्षधर बना; पीआईबी ने 05.06.2026 को 100वां रामसर स्थल दर्ज किया।
- भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2023 ने वनावरण और वृक्षावरण मिलाकर 8,27,357 वर्ग किमी, यानी भारत का 25.17%, बताया।
मुख्य बिंदु
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पारितंत्र क्रियाशील इकाइयां हैं; उन्हें केवल नाम से नहीं, नियंत्रक तत्वों से पहचानें।
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अनुच्छेद 48A, 51A(g), 21 और 253 पर्यावरण का मुख्य संवैधानिक ढांचा देते हैं।
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42वें संशोधन, 1976 ने वन और वन्यजीव संरक्षण को समवर्ती सूची में रखा।
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वनावरण, वृक्षावरण, दर्ज वन और पारिस्थितिक वन अलग परीक्षा-श्रेणियां हैं।
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प्राकृतिक घासभूमि और मरुस्थल खुले पारितंत्र हैं, वृक्षारोपण के लिए अपने-आप बेकार भूमि नहीं।
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आर्द्रभूमि जल-प्रणाली, मृदा, वनस्पति और कार्य पर निर्भर है; हर जल निकाय कानूनी आर्द्रभूमि नहीं।
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भारत 01.02.1982 को रामसर का पक्षधर बना; पीआईबी ने 05.06.2026 को 100वां रामसर स्थल दर्ज किया।
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भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2023 ने वनावरण और वृक्षावरण मिलाकर 8,27,357 वर्ग किमी, यानी भारत का 25.17%, बताया।
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अर्थ, कानूनी आधार और परीक्षा का नक्शा
- पारितंत्र से मतलब ऐसी क्रियाशील इकाई से है जिसमें जीव, उनका भौतिक परिवेश और उनके बीच की क्रियाएं मिलकर एक व्यवस्था बनाते हैं। वन, घासभूमि, मरुस्थल, जलीय और आर्द्रभूमि पारितंत्र जलवायु, जल-उपलब्धता, मृदा, प्रमुख उत्पादक, उपभोक्ता, अपघटक और प्राकृतिक व्यवधान से अलग होते हैं।
- UPSC के लिहाज़ से दायरा: यहां हर जीव-प्रदेश की विशेषज्ञ सूची नहीं चाहिए। मुख्य बात यह है कि विद्यार्थी पारितंत्र-प्रकार पहचान सके, उदाहरण मिला सके, अनुकूलन समझ सके और पारिस्थितिकी को भारतीय कानून व संरक्षण संस्थाओं से जोड़ सके।
- वैचारिक आधार: हर पारितंत्र में अजैविक घटक, उत्पादक, उपभोक्ता, अपघटक, खाद्य श्रृंखला, खाद्य जाल, पोषण स्तर, पोषक-तत्व चक्र, उत्पादकता और पारिस्थितिक अनुक्रमण होते हैं। वही प्रजाति आवास बदलने पर अलग भूमिका निभा सकती है।
- भारत में संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण सुधारने और वन व वन्यजीवों की रक्षा करने का निर्देश देता है। अनुच्छेद 51A(g) नागरिकों का पर्यावरणीय कर्तव्य बताता है। अनुच्छेद 21 को न्यायालयों ने पर्यावरणीय गुणवत्ता से जोड़ा है। अनुच्छेद 253 अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय वचनों को घरेलू कानून में लागू करने में संसद की मदद करता है।
- सातवीं अनुसूची संबंध: 42वें संविधान संशोधन, 1976 से वन और वन्य पशु-पक्षियों की रक्षा समवर्ती सूची में प्रविष्टि 17A और प्रविष्टि 17B के रूप में आए। इसलिए संरक्षण के प्रश्न में संघ का कानून, राज्य के नियम और स्थानीय प्रबंधन साथ-साथ आ सकते हैं।
- मुख्य कानून: भारतीय वन अधिनियम, 1927; वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972; वन संरक्षण अधिनियम, 1980; पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986; जैव विविधता अधिनियम, 2002; वन अधिकार अधिनियम, 2006; राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010; आर्द्रभूमि नियम, 2017।
- न्यायिक आधार: ग्रामीण मुकदमा एवं हकदारी केंद्र मामला, 1985 ने खनन को पारिस्थितिक हानि से जोड़ा; एम.सी. मेहता मामला, 1987 ने पर्यावरणीय दायित्व मजबूत किया; सुभाष कुमार मामला, 1991 ने प्रदूषण-मुक्त जल और वायु को अनुच्छेद 21 से जोड़ा; टी.एन. गोदावर्मन मामला, 1996 ने वन का व्यावहारिक अर्थ विस्तृत किया; वेल्लोर नागरिक कल्याण मंच मामला, 1996 ने सतत विकास, सावधानी सिद्धांत और प्रदूषक भुगतान सिद्धांत को मान्यता दी।
- दायरे की सीमा: पारितंत्र वर्गीकरण अपने-आप कोई अलग संवैधानिक अधिकार नहीं बनाता। कानूनी असर तब आता है जब भूमि मोड़ना, प्रदूषण, आवास-हानि, समुदाय अधिकार, संरक्षित क्षेत्र या पर्यावरणीय मंज़ूरी का प्रश्न हो।
- परीक्षा में तरीका: पहले नियंत्रक तत्व पहचानें: वनों में छत्र और वर्षा; घासभूमि में मौसमी जल-संकट और आग-चराई; मरुस्थल में शुष्कता; जलीय पारितंत्र में लवणता और प्रवाह; आर्द्रभूमि में समय-समय पर जलभराव और जलसंतृप्त मृदा।
- दूसरे अध्यायों से संबंध: यह अध्याय पारिस्थितिकी के मूल सिद्धांत, जैव विविधता, संरक्षित क्षेत्र, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, पर्यावरण प्रभाव आकलन, वन, आर्द्रभूमि और अंतरराष्ट्रीय अभिसमयों को जोड़ता है। मजबूत तैयारी नामों से आगे जाकर प्रकार, प्रक्रिया और कानून को साथ पढ़ती है।
- प्रक्रिया से पहचानें: पारितंत्र-प्रकार का प्रश्न अक्सर किसी कानूनी प्रक्रिया को छिपाकर पूछता है। वन भूमि मोड़ने में वन-संरक्षण कानून के तहत केंद्र की मंज़ूरी चाहिए; संरक्षित क्षेत्र के भीतर वन्यजीव आवास हो तो वन्यजीव कानून की राह आएगी; आर्द्रभूमि के लिए 2017 नियमों के तहत पहचान, अधिसूचना और समेकित प्रबंधन योजना चाहिए; प्रदूषण छोड़ने पर प्रदूषण-नियंत्रण कानूनों में सहमति और मानक लागू होते हैं।
- अनुसूची याद रखें: समवर्ती सूची में प्रविष्टि 17A वन और प्रविष्टि 17B वन्य पशु-पक्षियों की रक्षा से जुड़ी है, जबकि इसी सूची की प्रविष्टि 20 आर्थिक और सामाजिक नियोजन से संबंधित है। इसलिए जलवायु, भूमि-उपयोग योजना और प्राकृतिक आवास संरक्षण एक ही कथन-समूह प्रश्न में साथ आ सकते हैं।
- न्यायिक सिद्धांत का उपयोग: एम.सी. मेहता बनाम कमल नाथ, 1997 इसलिए अहम है क्योंकि सार्वजनिक न्यास सिद्धांत कुछ प्राकृतिक संसाधनों को राज्य के पास जनता के उपयोग के लिए रखी संपत्ति मानता है, सामान्य निजी संपत्ति नहीं। पारितंत्र-प्रकार के प्रश्नों में यह सिद्धांत तब जुड़ता है जब नदी-तल, झील, वन या तट को सीमित कारोबारी उपयोग में बदला जाए।
- अंतरराष्ट्रीय कानून से संबंध: रामसर, जैव विविधता अभिसमय, संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय और संकटग्रस्त वन्य जीव-वनस्पति व्यापार अभिसमय अलग-अलग डिब्बे नहीं हैं। आर्द्रभूमियां प्रवासी पक्षियों को सहारा देती हैं, वन और मैंग्रोव कार्बन सोखने वाला भंडार बनते हैं, और संरक्षित प्राकृतिक आवास प्रजाति-व्यापार के दबाव को नियंत्रित करते हैं। अनुच्छेद 253 बताता है कि संधि-प्रतिबद्धताओं को घरेलू कानून में लाने के लिए संसद कैसे कानून बना सकती है।
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1MCQनिम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. वन और वन्य पशु-पक्षियों की रक्षा 42वें संशोधन, 1976 के बाद समवर्ती सूची में हैं। 2. अनुच्छेद 51A(g) केवल राज्य पर बाध्य नीति-निदेशक तत्व है। 3. अनुच्छेद 253 अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय वचनों को लागू करने वाले कानूनों का आधार बन सकता है। कौन-से कथन सही हैं?
व्याख्या
कथन 2 गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 51A(g) नागरिकों का मूल कर्तव्य है, नीति-निदेशक तत्व नहीं।
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