मुख्य तथ्य

  • अनुच्छेद 21 और 14 अब जलवायु-अधिकार तर्क को आधार देते हैं; अनुच्छेद 48A और 51A(g) पर्यावरणीय कर्तव्य बताते हैं।
  • भारत की 2030 वचनबद्धता में उत्सर्जन-तीव्रता 45% घटाना और लगभग 50% गैर-जीवाश्म विद्युत स्थापित क्षमता शामिल है।
  • एम.के. रणजीतसिंह, 2024 ने जलवायु के प्रतिकूल असर को अनुच्छेद 21 और 14 से जोड़ा।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    जलवायु परिवर्तन वैश्विक तापन से बड़ा है; इसमें वर्षा, महासागर, चरम घटनाएं, पारितंत्र और स्वास्थ्य असर शामिल हैं।

  2. 2

    प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव जीवन के लिए जरूरी है; मानव गतिविधियों से बढ़ा प्रभाव चिंता का विषय है।

  3. 3

    अनुच्छेद 21 और 14 अब जलवायु-अधिकार तर्क को आधार देते हैं; अनुच्छेद 48A और 51A(g) पर्यावरणीय कर्तव्य बताते हैं।

  4. 4

    भारत की 2030 वचनबद्धता में उत्सर्जन-तीव्रता 45% घटाना और लगभग 50% गैर-जीवाश्म विद्युत स्थापित क्षमता शामिल है।

  5. 5

    शमन उत्सर्जन घटाता है या गैसों को हटाने की क्षमता बढ़ाता है; अनुकूलन उन असर के लिए तैयारी करता है जिन्हें टाला नहीं जा सकता।

  6. 6

    सकल, शुद्ध, प्रति व्यक्ति, संचयी और तीव्रता-आधारित उत्सर्जन अलग संकेतक हैं।

  7. 7

    पेरिस सभी पक्षों के राष्ट्रीय योगदान पर चलता है; क्योटो के पहले ढांचे में विकसित देशों के लक्ष्य प्रमुख थे।

  8. 8

    एम.के. रणजीतसिंह, 2024 ने जलवायु के प्रतिकूल असर को अनुच्छेद 21 और 14 से जोड़ा।

  9. 9

    जलवायु नीति में ऊर्जा सुरक्षा, जैव विविधता, वित्त, आजीविका और विकास की गुंजाइश के बीच संतुलन चाहिए।

अवधारणा, परिभाषाएं और संवैधानिक आधार

UPSC में जलवायु परिवर्तन केवल विज्ञान का तथ्य नहीं है; इसमें वायुमंडल, पारिस्थितिकी, कानून, अर्थव्यवस्था और वैश्विक न्याय एक साथ आते हैं।

  • जलवायु परिवर्तन: तापमान, वर्षा, हवा, समुद्र और चरम मौसम की लंबी अवधि वाली बदलती प्रवृत्ति। प्राकृतिक कारण हो सकते हैं, पर आज का बदलाव मुख्य रूप से मानव गतिविधियों से जुड़ा है।
  • मौसम और जलवायु: मौसम कम समय की स्थिति है; जलवायु लंबी अवधि की प्रवृत्ति है, जिसे सामान्यतः लगभग 30 वर्षों के औसत से समझा जाता है। एक ठंडा सप्ताह वैश्विक तापन को गलत साबित नहीं करता।
  • ग्रीनहाउस प्रभाव: सूर्य से आने वाला छोटा तरंग विकिरण वायुमंडल से गुजरता है; पृथ्वी लंबी तरंग ऊष्मा विकिरण छोड़ती है; ग्रीनहाउस गैसें उसका एक हिस्सा रोककर फिर छोड़ती हैं, इसलिए निचला वायुमंडल गर्म रहता है।
  • बढ़ा हुआ ग्रीनहाउस प्रभाव: मानव गतिविधियां अतिरिक्त ग्रीनहाउस गैसें जोड़ती हैं और कार्बन, नाइट्रोजन तथा जल चक्र को बिगाड़ती हैं। प्राकृतिक ऊष्मा-कवच मोटा हो जाता है और ऊष्मा कम बाहर निकलती है।
  • वैश्विक तापन: पृथ्वी के औसत सतही तापमान में बढ़ोतरी। आईपीसीसी की छठी आकलन रिपोर्ट के अनुसार मानव गतिविधियों ने स्पष्ट रूप से तापन बढ़ाया है और 2011-2020 का तापमान 1850-1900 से लगभग 1.1 डिग्री सेल्सियस अधिक था।
  • जलवायु परिवर्तन तापन से बड़ा विषय है: इसमें लू, तेज़ वर्षा, सूखा, चक्रवात, हिमनदों का पीछे हटना, समुद्र का गर्म होना, समुद्र-स्तर बढ़ना, अम्लीकरण, फसल पर असर, रोगों का क्षेत्र बदलना और जैव विविधता पर दबाव शामिल हैं।
  • भारत में संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 21 जीवन और स्वच्छ पर्यावरण से जुड़ता है; अनुच्छेद 14 अहम है क्योंकि जलवायु नुकसान समान रूप से नहीं पड़ता; अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण बचाने का निर्देश देता है; अनुच्छेद 51A(g) नागरिकों का पर्यावरणीय कर्तव्य बताता है।
  • कानूनी आधार: पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 केंद्र को व्यापक शक्ति देता है; वायु अधिनियम, 1981 और जल अधिनियम, 1974 प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े हैं; वन संरक्षण अधिनियम, 1980 और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 कार्बन सोखने वाले भंडारों और प्राकृतिक आवासों की रक्षा करते हैं; राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 विशेषज्ञ मंच देता है।
  • परीक्षा में अहम गलती: संविधान में जलवायु परिवर्तन पर अलग अनुच्छेद नहीं है। जलवायु सुरक्षा मौजूदा अधिकारों, कर्तव्यों, नीति-निदेशक तत्वों और पर्यावरण कानूनों से पढ़ी जाती है।
  • दायरे की सीमा: भारत में जलवायु कानून अभी बिखरा हुआ है। नीति, मिशन और वचनबद्धताएं हैं, पर एक समग्र जलवायु परिवर्तन कानून नहीं है।
  • पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की शब्दावली: अधिनियम में जलवायु परिवर्तन को अलग अपराध की तरह नहीं लिखा गया, पर पर्यावरण, पर्यावरण प्रदूषक और पर्यावरण प्रदूषण की व्यापक परिभाषाएं वायु, जल, भूमि और पारिस्थितिक प्रणालियों को बिगाड़ने वाली गतिविधियों के नियमन की गुंजाइश देती हैं। इसलिए अपशिष्ट, तटीय क्षेत्र, पर्यावरणीय मंज़ूरी और औद्योगिक मानक अप्रत्यक्ष रूप से जलवायु से जुड़े हैं।
  • सूचियां और विषय-वितरण: सातवीं अनुसूची में वन, वन्यजीव और पक्षी संरक्षण, बिजली, जल, कृषि और लोक स्वास्थ्य जैसे विषय संघ, राज्य और समवर्ती जिम्मेदारियों में फैले हैं। इसलिए जलवायु कार्रवाई किसी एक केंद्रीय आदेश से नहीं, सहकारी संघवाद से चलती है।
  • अंतरराष्ट्रीय कानून की स्थिति: संधि वचनबद्धताओं को सामान्यतः घरेलू कानून, नीति या कार्यपालिका कार्रवाई से लागू करना पड़ता है। यदि UPSC कथन कहे कि पेरिस की हर वचनबद्धता सीधे भारतीय अदालत में प्रवर्तनीय है, तो सावधानी रखें।

पूरा नोट खोलें

यह सार्वजनिक पृष्ठ पहला उपलब्ध खंड दिखाता है। स्टडी पैक पूरा विषय और सभी पुनरावलोकन सामग्री खोलता है।

9 और खंड पूरे नोट में हैं

स्टडी पैक खोलें

संभावित प्रश्न

अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।

1MCQग्रीनहाउस प्रभाव के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव पृथ्वी को रहने योग्य बनाए रखने के लिए जरूरी है। 2. मानव-जनित तापन मुख्यतः बढ़े हुए ग्रीनहाउस प्रभाव से जुड़ा है। 3. मौजूदा तापन के पीछे जलवाष्प मुख्य सीधा मानव-जनित कारण है। कौन-सा/से कथन सही है/हैं?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aकेवल 1 और 2सही
  2. Bकेवल 2 और 3
  3. Cकेवल 1 और 3
  4. D1, 2 और 3

व्याख्या

कथन 1 और 2 सही हैं। जलवाष्प अहम है, पर मौजूदा तापन में मुख्यतः जलवायु प्रतिपुष्टि की तरह काम करता है; कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और अन्य मानव-जनित गैसें मुख्य सीधे कारण हैं।

~50 शब्द · 1 अंक