मुख्य तथ्य

  • 1987 की ब्रुंटलैंड रिपोर्ट सतत विकास को आज की ज़रूरतों और आने वाली पीढ़ियों की क्षमता से जोड़ती है।
  • 1976 के 42वें संशोधन ने अनुच्छेद 48A और अनुच्छेद 51A(g) जोड़कर पर्यावरणीय कर्तव्यों को भारतीय आधार दिया।
  • 2015 में अपनाए गए 2030 एजेंडा में सभी देशों के लिए 17 सतत विकास लक्ष्य और 169 लक्ष्यांक हैं।
  • सतत विकास लक्ष्य भारत सूचकांक 2023-24 ने 113 संकेतकों का उपयोग किया और भारत का समग्र अंक 71 बताया।
  • वेल्लोर नागरिक कल्याण मंच, 1996 ने सावधानी और प्रदूषक भुगतान सिद्धांतों को भारतीय पर्यावरण कानून में मान्यता दी।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    1987 की ब्रुंटलैंड रिपोर्ट सतत विकास को आज की ज़रूरतों और आने वाली पीढ़ियों की क्षमता से जोड़ती है।

  2. 2

    1976 के 42वें संशोधन ने अनुच्छेद 48A और अनुच्छेद 51A(g) जोड़कर पर्यावरणीय कर्तव्यों को भारतीय आधार दिया।

  3. 3

    2015 में अपनाए गए 2030 एजेंडा में सभी देशों के लिए 17 सतत विकास लक्ष्य और 169 लक्ष्यांक हैं।

  4. 4

    भारत में नीति आयोग सतत विकास लक्ष्य निगरानी का समन्वय करता है; राष्ट्रीय संकेतक ढांचा सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय चलाता है।

  5. 5

    सतत विकास लक्ष्य भारत सूचकांक 2023-24 ने 113 संकेतकों का उपयोग किया और भारत का समग्र अंक 71 बताया।

  6. 6

    वेल्लोर नागरिक कल्याण मंच, 1996 ने सावधानी और प्रदूषक भुगतान सिद्धांतों को भारतीय पर्यावरण कानून में मान्यता दी।

  7. 7

    NGT अधिनियम, 2010 की धारा 20 सतत विकास, सावधानी सिद्धांत और प्रदूषक भुगतान सिद्धांत लागू करने को कहती है।

  8. 8

    सतत विकास लक्ष्य नीति और निगरानी के लक्ष्य हैं, सीधे लागू होने वाले घरेलू वैधानिक अधिकार नहीं।

अवधारणा, विकास और UPSC के लिहाज़ से महत्व

अर्थव्यवस्था में सतत विकास सिर्फ नारा नहीं है; गरीबी, अवसंरचना, ऊर्जा, शहरीकरण और पर्यावरणीय नियमन को समझने का यह जरूरी आधार है।

  • मुख्य परिभाषा: 1987 की ब्रुंटलैंड रिपोर्ट ने सतत विकास को ऐसा विकास बताया जो आज की ज़रूरतें पूरी करे, पर आने वाली पीढ़ियों की अपनी ज़रूरतें पूरी करने की क्षमता को कम न करे। UPSC इसी परिभाषा से दो बातें पूछता है: बुनियादी ज़रूरतों को प्राथमिकता और यह कि तकनीक, समाज और पर्यावरण की सीमाएं विकास को कैसे बांधती हैं।
  • तीन आधार: आर्थिक व्यावहारिकता, सामाजिक समावेशन और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलें। कोई परियोजना GDP बढ़ा दे पर आजीविका खत्म करे, या कोई कल्याण योजना राजकोषीय और पर्यावरणीय सीमा को न देखे, तो वह इस कसौटी पर अधूरी है।
  • विकास का कालक्रम: 1972 का स्टॉकहोम सम्मेलन पर्यावरण को वैश्विक एजेंडा पर लाया; 1976 के 42वें संशोधन ने अनुच्छेद 48A और अनुच्छेद 51A(g) जोड़े; 1992 के रियो पृथ्वी सम्मेलन से एजेंडा 21 और रियो सिद्धांत आए; 2000 से 2015 तक सहस्राब्दी विकास लक्ष्य चले; 2015 में 2030 एजेंडा और 17 सतत विकास लक्ष्य अपनाए गए।
  • UPSC की बारीकी: वृद्धि का अर्थ उत्पादन या आय बढ़ना है; विकास में स्वास्थ्य, शिक्षा, गरिमा, अवसर, लैंगिक समानता, पर्यावरणीय सुरक्षा और संस्थाओं की गुणवत्ता शामिल है। सतत विकास इसी व्यापक विकास में पीढ़ियों के बीच न्याय जोड़ता है।
  • भारत में महत्व: भारत को तेज़ अवसंरचना निर्माण, गरीबी घटाने, ऊर्जा पहुंच, खाद्य सुरक्षा और जलवायु जोखिमों को साथ लेकर चलना है। इसलिए सतत विकास लक्ष्य अर्थव्यवस्था को पर्यावरण, राजव्यवस्था, भूगोल और सामाजिक न्याय से जोड़ते हैं।
  • प्रीलिम्स में ध्यान दें: कालक्रम, संस्थागत भूमिका और सिद्धांत याद रखें: साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियां, सावधानी सिद्धांत, प्रदूषक भुगतान सिद्धांत, सार्वजनिक न्यास सिद्धांत, वहन क्षमता, पीढ़ियों के बीच न्याय और किसी को पीछे न छोड़ना।
  • दोनों को एक न मानें: सतत विकास व्यापक अवधारणा और भारतीय पर्यावरण न्यायशास्त्र में कानूनी सिद्धांत है; सतत विकास लक्ष्य 2015 का वैश्विक लक्ष्य ढांचा है, जिसमें लक्ष्य और संकेतक मापे जाते हैं।
  • रियो सिद्धांतों को अर्थव्यवस्था की भाषा में पढ़ें: रियो घोषणा ने पर्यावरण संरक्षण को विकास की ज़रूरत, जन-भागीदारी, प्रभाव आकलन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जोड़कर सतत विकास को व्यावहारिक बनाया। प्रीलिम्स में इसका अर्थ है कि यह अवधारणा न विकास-विरोधी है, न असीम संसाधन-दोहन की छूट।
  • साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियां: यह वाक्यांश इसलिए अहम है, क्योंकि विकासशील देश ऐतिहासिक उत्सर्जन और अलग-अलग क्षमताओं को जलवायु तथा वित्तीय जिम्मेदारियों से जोड़ते हैं। यह वैश्विक न्याय का सिद्धांत है, कोई घरेलू आरक्षण सूत्र नहीं।
  • वहन क्षमता: कोई क्षेत्र आबादी, उद्योग, पर्यटन या संसाधन-दोहन का एक निश्चित स्तर ही बिना संसाधन आधार बिगाड़े संभाल सकता है। हिमालयी सड़कें, तटीय पर्यटन और शहरी वायु-क्षेत्र इसके सामान्य उदाहरण हैं।
  • क्षमता दृष्टिकोण से संबंध: मानव विकास सोच पूछती है कि लोगों के पास स्वास्थ्य, शिक्षा और विकल्प सचमुच हैं या नहीं। सतत विकास पूछता है कि ये उपलब्धियां टिकाऊ, समावेशी और पर्यावरणीय रूप से संभव हैं या नहीं।

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संभावित प्रश्न

अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।

1MCQसतत विकास के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. ब्रुंटलैंड रिपोर्ट ने इसे आज की ज़रूरतों और आने वाली पीढ़ियों से जोड़ा। 2. यह पर्यावरण संरक्षण के समान है। 3. इसमें गरीबी और सामाजिक समावेशन पर ध्यान ज़रूरी है। ऊपर दिए गए कौन-से कथन सही हैं?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aकेवल 1 और 2
  2. Bकेवल 1 और 3सही
  3. Cकेवल 2 और 3
  4. D1, 2 और 3

व्याख्या

कथन 1 वर्ष 1987 की प्रसिद्ध परिभाषा है। कथन 2 गलत है, क्योंकि संरक्षण केवल एक घटक है। कथन 3 सही है, क्योंकि ज़रूरतें, गरीबी और समावेशन इसके केंद्र में हैं।

~50 शब्द · 1 अंक