लोक वित्त और राजकोषीय संघवाद: वित्त आयोग की सिफारिशों से होने वाला हस्तांतरण
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 280 वित्त आयोग बनाता है; अनुच्छेद 281 उसकी सिफारिशों और की गई कार्रवाई पर स्पष्टीकरण को संसद के सामने रखने को कहता है।
- 15वें वित्त आयोग ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन के समायोजन के बाद 2021-26 के लिए 41% ऊर्ध्वाधर हस्तांतरण सुझाया।
- अनुच्छेद 275 अनुदान, अनुच्छेद 282 विवेकाधीन अनुदान, GST निपटान और कर हस्तांतरण अलग रास्ते हैं।
- 1951 का अधिनियम आयोग के लिए योग्यता का ढांचा तय करता है और साक्ष्य तथा अभिलेखों के लिए दीवानी अदालत जैसी शक्तियां देता है।
- 73वें और 74वें संशोधनों ने केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिशों को पंचायत और नगरपालिका संसाधनों से जोड़ा।
मुख्य बिंदु
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अनुच्छेद 280 वित्त आयोग बनाता है; अनुच्छेद 281 उसकी सिफारिशों और की गई कार्रवाई पर स्पष्टीकरण को संसद के सामने रखने को कहता है।
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हस्तांतरण प्रतिशत विभाज्य पूल पर लागू होता है, संघ के सकल कर राजस्व, GDP या कुल बजट व्यय पर नहीं।
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15वें वित्त आयोग ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन के समायोजन के बाद 2021-26 के लिए 41% ऊर्ध्वाधर हस्तांतरण सुझाया।
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क्षैतिज हस्तांतरण जरूरत, समानता, पारिस्थितिकी और प्रदर्शन संकेतकों से तय होता है; आय दूरी समानता लाने का मुख्य आधार है।
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अनुच्छेद 275 अनुदान, अनुच्छेद 282 विवेकाधीन अनुदान, GST निपटान और कर हस्तांतरण अलग रास्ते हैं।
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1951 का अधिनियम आयोग के लिए योग्यता का ढांचा तय करता है और साक्ष्य तथा अभिलेखों के लिए दीवानी अदालत जैसी शक्तियां देता है।
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73वें और 74वें संशोधनों ने केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिशों को पंचायत और नगरपालिका संसाधनों से जोड़ा।
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हाल की बहसें उपकर, जनसंख्या आधार, राजस्व घाटा अनुदान, GDP योगदान, आपदा वित्त और राज्यों पर उधारी के दबाव पर केंद्रित हैं।
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मूल बात: भारतीय संघवाद में लोक वित्त
लोक वित्त का मूल सवाल है कि सरकार पैसा कहां से जुटाती है, कहां खर्च करती है और विकास के लिए धन का प्रवाह कितना भरोसेमंद रहता है। राजकोषीय संघवाद यही सवाल संघ, राज्य और स्थानीय निकायों के बीच रखता है।
- UPSC के लिहाज़ से अर्थ: वित्त आयोग की सिफारिशों से होने वाला हस्तांतरण वह संवैधानिक तरीका है जिससे संघ केंद्रीय करों की आय और अनुदानों का हिस्सा राज्यों तक पहुंचाता है। यह कोई सामान्य बजट घोषणा, योजना सहायता या कल्याण योजना नहीं है।
- ऊर्ध्वाधर पक्ष: संघ से सभी राज्यों को मिलकर कितना हिस्सा जाएगा। 15वें वित्त आयोग ने 2021-26 के लिए 41% हिस्सा सुझाया; 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के आधिकारिक पेज और पीआरएस सार में 2026-31 के लिए भी 41% दर्ज है।
- क्षैतिज पक्ष: राज्यों के कुल हिस्से को अलग-अलग राज्यों में कैसे बांटा जाएगा। यहीं आय दूरी, जनसंख्या, क्षेत्रफल, वन और पारिस्थितिकी, जनसांख्यिकीय प्रदर्शन, कर प्रयास या GDP योगदान जैसे बिंदु परीक्षा में उलझाते हैं।
- आर्थिक और सामाजिक विकास से संबंध: स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा, पुलिस, कृषि सहायता, स्थानीय सेवाएं और सामाजिक क्षेत्र की कई योजनाएं राज्य चलाते हैं। इसलिए राज्यों की राजकोषीय गुंजाइश गरीबी घटाने, समावेशन और सतत विकास पर सीधे असर डालती है।
- संवैधानिक स्वरूप: वित्त आयोग अनुच्छेद 280 के तहत बना संवैधानिक निकाय है, कोई सामान्य नियामक संस्था नहीं। 1951 का अधिनियम उसकी योग्यता, चयन और दीवानी अदालत जैसी शक्तियों को स्पष्ट करता है।
- परीक्षा की सीमा: इसे अनुच्छेद 268-281, अनुच्छेद 279A की GST परिषद, अनुच्छेद 275 के अनुदान, 73वें और 74वें संशोधन के स्थानीय निकायों और अनुच्छेद 293 की उधारी व्यवस्था के साथ पढ़ें।
- बचने योग्य गलती: वित्त आयोग के हस्तांतरण को केंद्र से राज्यों को जाने वाले हर धन-प्रवाह के बराबर न मानें। केंद्र प्रायोजित योजनाएं, अनुच्छेद 282 के विवेकाधीन अनुदान, GST क्षतिपूर्ति और उधारी अनुमति अलग लेकिन जुड़े हुए चैनल हैं।
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स्टडी पैक खोलेंसंभावितसंभावित प्रश्न
अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।
1MCQवित्त आयोग के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. इसका गठन राष्ट्रपति अनुच्छेद 280 के तहत करते हैं। 2. इसकी सिफारिशें संसद के सामने रखे बिना अपने-आप कानून बन जाती हैं। 3. इसमें अध्यक्ष और 4 अन्य सदस्य होते हैं। कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
व्याख्या
कथन 1 और 3 सही हैं। अनुच्छेद 281 सिफारिशों और की गई कार्रवाई पर स्पष्टीकरण को संसद के सामने रखने की बात करता है; वे अपने-आप कानून नहीं बनतीं।
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