बाह्य क्षेत्र — भुगतान संतुलन, विदेशी मुद्रा भंडार और विनिमय दर
मुख्य तथ्य
- FEMA, 1999 की धारा 5 और 6 चालू खाते की छूट और पूंजी खाते के नियंत्रित लेन-देन को अलग करती हैं।
- संघ सूची प्रविष्टि 36 विदेशी विनिमय को और प्रविष्टि 41 विदेशी व्यापार तथा सीमा शुल्क सीमाओं को संभालती है।
- भारत 1992 के उदारीकृत विनिमय दर प्रबंधन प्रणाली से 1993 की एकीकृत बाज़ार-आधारित विनिमय दर व्यवस्था तक पहुंचा।
- भारत ने IMF अनुच्छेद 8 दायित्व स्वीकार करने के बाद अगस्त 1994 में रुपये को चालू खाते पर परिवर्तनीय बनाया।
मुख्य बिंदु
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भुगतान संतुलन निवासी-अनिवासी लेन-देन दर्ज करता है; यह प्रवाह-विवरण है, जबकि अंतरराष्ट्रीय निवेश स्थिति भंडार-विवरण है।
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चालू खाते में वस्तु, सेवा, प्राथमिक आय और द्वितीयक आय आती है; भारत में सेवा अधिशेष और प्रेषण माल घाटे को संभालते हैं।
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FEMA, 1999 की धारा 5 और 6 चालू खाते की छूट और पूंजी खाते के नियंत्रित लेन-देन को अलग करती हैं।
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संघ सूची प्रविष्टि 36 विदेशी विनिमय को और प्रविष्टि 41 विदेशी व्यापार तथा सीमा शुल्क सीमाओं को संभालती है।
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विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, सोना, विशेष आहरण अधिकार और IMF में आरक्षित अंश स्थिति आती है।
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भारत 1992 के उदारीकृत विनिमय दर प्रबंधन प्रणाली से 1993 की एकीकृत बाज़ार-आधारित विनिमय दर व्यवस्था तक पहुंचा।
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भारत ने IMF अनुच्छेद 8 दायित्व स्वीकार करने के बाद अगस्त 1994 में रुपये को चालू खाते पर परिवर्तनीय बनाया।
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मूल्यह्रास लचीली व्यवस्था में बाज़ार से आई गिरावट है; अवमूल्यन स्थिर या पेग व्यवस्था में आधिकारिक गिरावट है।
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स्थिर FDI चालू खाते के घाटे को अल्पकालिक ऋण या अस्थिर पोर्टफोलियो प्रवाह से अधिक सुरक्षित ढंग से भरता है।
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भंडार परिवर्तन लेन-देन, RBI हस्तक्षेप या मूल्यांकन प्रभाव से हो सकता है; यह हमेशा निर्यात सफलता या संकट नहीं बताता।
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भुगतान संतुलन का ढांचा, कानूनी आधार और परीक्षा मानचित्र
भुगतान संतुलन किसी अवधि में भारत के निवासियों और अनिवासियों के बीच हुए आर्थिक लेन-देन का व्यवस्थित लेखा-जोखा है। यह प्रवाह-विवरण है, भंडार-विवरण नहीं; लेन-देन भुगतान संतुलन में आते हैं, जबकि किसी तारीख पर बाहरी संपत्ति और देनदारी की स्थिति अलग अंतरराष्ट्रीय निवेश स्थिति में दिखती है।
- मूल परिभाषा: भुगतान संतुलन में वस्तु, सेवा, आय, हस्तांतरण, वित्तीय दावे, देनदारियां, मौद्रिक सोना, विशेष आहरण अधिकार और विदेशी मुद्रा भंडार में बदलाव से जुड़े लेन-देन आते हैं।
- लेखा तर्क: हर लेन-देन की दो प्रविष्टियां होती हैं; सिद्धांत में भुगतान संतुलन संतुलित रहता है, पर व्यवहार में समय, मूल्यांकन और सूचना देने की कमी को त्रुटि और चूक मद संभालती है।
- चालू खाता: वस्तु, सेवा, प्राथमिक आय और द्वितीयक आय को दर्ज करता है। चालू खाते का घाटा बताता है कि घरेलू खर्च घरेलू उत्पादन और विदेश से मिली शुद्ध आय-हस्तांतरण से अधिक है।
- पूंजी और वित्तीय पक्ष: भारतीय चर्चा में पूंजी खाता अक्सर निवेश प्रवाह, बाहरी उधारी, बैंकिंग पूंजी और भंडार परिवर्तन को साथ लेकर चलता है; IMF पद्धति में पूंजी खाता और वित्तीय खाता अलग-अलग रखे जाते हैं।
- संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 246 संसद को संघ सूची के विषयों पर अधिकार देता है; सातवीं अनुसूची की सूची 1 प्रविष्टि 36 मुद्रा, वैध मुद्रा और विदेशी विनिमय को, प्रविष्टि 37 विदेशी ऋण को, प्रविष्टि 38 RBI को और प्रविष्टि 41 विदेशी व्यापार तथा सीमा शुल्क सीमाओं को संभालती है।
- संधि और व्यापार संबंध: अनुच्छेद 253 अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करने के लिए संसद को कानून बनाने की शक्ति देता है; अनुच्छेद 286 आयात या निर्यात के दौरान होने वाली आपूर्ति पर राज्यों के कराधिकार को सीमित करता है।
- कानूनी आधार: भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 RBI के केंद्रीय बैंक और भंडार संबंधी कार्यों को आधार देता है; FEMA, 1999 ने पुराना विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम की दंड-प्रधान सोच की जगह विदेशी मुद्रा प्रबंधन की व्यवस्था दी।
- कर और सीमा शुल्क संबंध: अनुच्छेद 265 कहता है कि कर केवल कानून के अधिकार से लगेगा, और संघ सूची प्रविष्टि 83 सीमा शुल्क का आधार देती है। इसलिए व्यापार प्रवाह, सीमा शुल्क राजस्व और बाह्य क्षेत्र नीति संघ के दायरे में मिलते हैं।
- प्रीलिम्स सावधानी: भुगतान संतुलन व्यापार संतुलन से बड़ा है। व्यापार संतुलन केवल माल के निर्यात-आयात को देखता है; भुगतान संतुलन में सेवाएं, प्रेषण, निवेश आय, उधारी, विदेशी निवेश और भंडार भी आते हैं।
- विकास से संबंध: बाहरी स्थिरता मुद्रास्फीति, ऊर्जा सुरक्षा, आयात क्षमता, निर्यात क्षेत्रों के रोज़गार, राजकोषीय गुंजाइश और गरीबों से जुड़ी योजनाओं की लागत को प्रभावित करती है।
- स्रोत को लेकर सावधानी: RBI तिमाही बाह्य क्षेत्र आंकड़े जारी करता है; आर्थिक समीक्षा सालाना रुझान बताती है; वाणिज्य मंत्रालय व्यापार आंकड़े देता है, पर अंतिम भुगतान संतुलन वर्गीकरण RBI पद्धति से तय होता है।
- परीक्षा प्राथमिकता: पहले चालू खाते की मदों को पूंजी और वित्तीय प्रवाह से अलग करें, फिर चालू खाते के घाटे की भरपाई को विनिमय दर दबाव, भंडार परिवर्तन और व्यापक नीति से जोड़ें।
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स्टडी पैक खोलेंसंभावितसंभावित प्रश्न
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1MCQनिम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. कामगारों के प्रेषण चालू खाते में दर्ज होते हैं। 2. सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश चालू खाते की प्राप्ति है। 3. भंडार में गिरावट भुगतान संतुलन में भरपाई मद हो सकती है। कौन-से कथन सही हैं?
व्याख्या
प्रेषण चालू खाते की द्वितीयक आय हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेश वित्तीय खाते का प्रवाह है, चालू आय नहीं। भंडार घटाकर बाहरी कमी की भरपाई हो सकती है।
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