मुख्य तथ्य

  • श्रम मुख्यतः समवर्ती सूची में है; प्रविष्टि 22, 23 और 24 प्रीलिम्स के लिए अहम हैं।
  • चार श्रम संहिताएं 21 नवंबर 2025 से प्रभावी हुईं और 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को बदला।
  • अनुच्छेद 23 जबरन श्रम से जुड़ा है; जनवादी अधिकार संगठन मामला, 1982 न्यूनतम मजदूरी न देने को अनुच्छेद 23 से जोड़ता है।
  • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों को पहचानती है।
  • विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 मौजूदा ग्रामीण मजदूरी-रोज़गार की कानूनी गारंटी है; पुराना मनरेगा कानून 01 जुलाई 2026 से निरस्त हो गया।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण में बेरोज़गारी दर का भाजक श्रम बल है, कुल आबादी नहीं।

  2. 2

    श्रम मुख्यतः समवर्ती सूची में है; प्रविष्टि 22, 23 और 24 प्रीलिम्स के लिए अहम हैं।

  3. 3

    चार श्रम संहिताएं 21 नवंबर 2025 से प्रभावी हुईं और 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को बदला।

  4. 4

    अनुच्छेद 23 जबरन श्रम से जुड़ा है; जनवादी अधिकार संगठन मामला, 1982 न्यूनतम मजदूरी न देने को अनुच्छेद 23 से जोड़ता है।

  5. 5

    अनौपचारिक क्षेत्र और अनौपचारिक रोज़गार जुड़े हुए, पर अलग-अलग वर्ग हैं।

  6. 6

    सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों को पहचानती है।

  7. 7

    विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 मौजूदा ग्रामीण मजदूरी-रोज़गार की कानूनी गारंटी है; पुराना मनरेगा कानून 01 जुलाई 2026 से निरस्त हो गया।

  8. 8

    कर्मचारी भविष्य निधि संगठन का पेरोल, GST और ई-श्रम जैसे औपचारिकता संकेतक अलग-अलग चीजें मापते हैं।

अवधारणा, संकेतक और रोज़गार मानचित्र

रोज़गार का अर्थ केवल नौकरी मिलना नहीं है; इसमें मजदूरी का काम, स्वरोज़गार, सार्वजनिक काम, छोटे उद्यम, सेवा-क्षेत्र का काम और परिवार से जुड़ी उत्पादन गतिविधियां भी आती हैं। UPSC में असली फर्क यह है कि काम होना और सुरक्षित, उत्पादक, नियमित रोज़गार होना एक ही बात नहीं है।

  • मूल शब्द: श्रम बल में वे लोग आते हैं जो काम कर रहे हैं, काम खोज रहे हैं या काम के लिए उपलब्ध हैं। कार्यबल में केवल काम कर रहे लोग आते हैं। बेरोज़गारी दर बेरोज़गार लोगों का श्रम बल में हिस्सा है, पूरी आबादी में हिस्सा नहीं।
  • आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण का ढांचा: आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण श्रम बल भागीदारी दर, कार्यकर्ता-जनसंख्या अनुपात और बेरोज़गारी दर बताता है। इसमें पिछले 365 दिनों के आधार पर सामान्य स्थिति और पिछले 7 दिनों के आधार पर वर्तमान साप्ताहिक स्थिति ली जाती है; दोनों से अलग संकेत मिल सकते हैं।
  • काम की श्रेणियां: UPSC अक्सर स्वरोज़गार, नियमित वेतनभोगी काम और आकस्मिक मजदूरी को अलग करता है। स्वरोज़गार हमेशा उद्यमिता नहीं होता; कई बार यह मजबूरी का काम, बिना वेतन पारिवारिक काम या अपना छोटा काम भी हो सकता है।
  • गुणवत्ता का पहलू: अच्छे रोज़गार में ठीक कमाई, सामाजिक सुरक्षा, सुरक्षित काम-स्थल, तय काम के घंटे, कौशल का उपयोग, बातचीत की ताकत और कानूनी संरक्षण शामिल होते हैं। बेरोज़गारी दर घटने पर भी अधूरा रोज़गार या कम उत्पादक काम बना रह सकता है।
  • औपचारिक-अनौपचारिक फर्क: औपचारिकता को उद्यम के पंजीकरण, लिखित अनुबंध, सामाजिक सुरक्षा, कर अनुपालन या वेतन सहित छुट्टी से मापा जा सकता है। कोई व्यक्ति संगठित उद्यम में काम करके भी अनौपचारिक कामगार हो सकता है।
  • क्षेत्रवार विश्लेषण: कृषि अभी भी GDP में अपने हिस्से से अधिक श्रम समेटती है; उद्योग और निर्माण मजदूरी वाला काम देते हैं लेकिन चक्रों से प्रभावित होते हैं; सेवा-क्षेत्र में उच्च उत्पादक पेशेवर काम से लेकर कम वेतन वाली निजी सेवाएं तक आती हैं।
  • विकास से रिश्ता: रोज़गार आर्थिक वृद्धि को गरीबी घटाने, समावेशन, जनसांख्यिकीय लाभांश और सामाजिक क्षेत्र से जोड़ता है। श्रम को साथ लिए बिना वृद्धि हो तो लाभांश कमजोर पड़ता है; उत्पादक रोज़गार के बिना कल्याण योजनाओं पर राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है।
  • प्रीलिम्स सावधानी: सर्वेक्षण में बेरोज़गार का मतलब हर वह व्यक्ति नहीं है जिसके पास नौकरी नहीं। आम तौर पर काम खोजना या उपलब्ध होना भी जरूरी है। संख्या मिलाने से पहले संदर्भ अवधि, आयु-समूह, लिंग और ग्रामीण-शहरी आधार देखें।
  • रोज़गार लोच: रोज़गार लोच बताती है कि उत्पादन बढ़ने पर रोज़गार कितना बदलता है। कोई क्षेत्र पूंजी-प्रधान हो, तकनीक पर अधिक निर्भर हो या मौजूदा कामगारों से ही अधिक काम ले, तो GDP तेज बढ़ सकती है लेकिन श्रम उतना नहीं जुड़ता।
  • खुली बेरोज़गारी बनाम छिपी बेरोज़गारी: खुली बेरोज़गारी उन लोगों की दिखने वाली बेरोज़गारी है जो काम खोज रहे हैं या उपलब्ध हैं। छिपी बेरोज़गारी तब होती है जब जरूरत से अधिक लोग लगे हों और अतिरिक्त कामगार की उत्पादकता बहुत कम या लगभग शून्य हो।
  • कमाई का पहलू: गरीब परिवार के लिए समस्या कई बार काम न होना नहीं, बल्कि बहुत कम कमाई होना होती है। इसलिए गरीबी, आकस्मिक काम और काम करने के बावजूद गरीब रहने की बहस को बेरोज़गारी आंकड़ों के साथ पढ़ना चाहिए।
  • आयु और शिक्षा आधार: युवा बेरोज़गारी, स्नातक बेरोज़गारी और महिला भागीदारी अलग-अलग भाजक इस्तेमाल करते हैं। एक अखिल भारतीय बेरोज़गारी दर हर श्रम-बाज़ार सवाल का जवाब नहीं दे सकती।

पूरा नोट खोलें

यह सार्वजनिक पृष्ठ पहला उपलब्ध खंड दिखाता है। स्टडी पैक पूरा विषय और सभी पुनरावलोकन सामग्री खोलता है।

7 और खंड पूरे नोट में हैं

स्टडी पैक खोलें

संभावित प्रश्न

अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।

1MCQनिम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. श्रम बल भागीदारी दर में काम कर रहे और श्रम बल में बेरोज़गार, दोनों व्यक्ति शामिल होते हैं। 2. कार्यकर्ता-जनसंख्या अनुपात आबादी में बेरोज़गार व्यक्तियों का हिस्सा है। 3. आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण में सामान्य स्थिति 365 दिनों की संदर्भ अवधि का उपयोग करती है। कौन-से कथन सही हैं?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aकेवल 1 और 2
  2. Bकेवल 1 और 3सही
  3. Cकेवल 2 और 3
  4. D1, 2 और 3

व्याख्या

श्रम बल भागीदारी दर में श्रम बल के काम कर रहे और बेरोज़गार दोनों लोग आते हैं; कार्यकर्ता-जनसंख्या अनुपात आबादी में काम कर रहे लोगों का हिस्सा है, इसलिए कथन 2 गलत है। सामान्य स्थिति पिछले 365 दिनों पर आधारित है।

~50 शब्द · 1 अंक