डिजिटल अर्थव्यवस्था, वित्तीय तकनीक, यूपीआई और नई वित्तीय संस्थाएं
मुख्य तथ्य
- भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 RBI को भुगतान प्रणालियों का नियामक बनाता है; एनपीसीआई यूपीआई ढांचा चलाता है।
- यूपीआई बैंक जमा स्थानांतरित करता है; यह न भुगतान बटुआ है, न निजी आभासी मुद्रा, न डिजिटल रुपया।
- भुगतान बैंक कर्ज़ नहीं दे सकते; लघु वित्त बैंक कम सेवा प्राप्त वर्गों को कर्ज़ दे सकते हैं।
- खाता संकलक सहमति आधारित वित्तीय डेटा साझाकरण करते हैं; वे साख सूचना ब्यूरो नहीं हैं।
- पुट्टस्वामी (2017) के बाद वित्तीय तकनीक, डेटा और डिजिटल कल्याण में निजता को केंद्र में रखना जरूरी हो गया।
मुख्य बिंदु
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भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 RBI को भुगतान प्रणालियों का नियामक बनाता है; एनपीसीआई यूपीआई ढांचा चलाता है।
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यूपीआई बैंक जमा स्थानांतरित करता है; यह न भुगतान बटुआ है, न निजी आभासी मुद्रा, न डिजिटल रुपया।
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भुगतान बैंक कर्ज़ नहीं दे सकते; लघु वित्त बैंक कम सेवा प्राप्त वर्गों को कर्ज़ दे सकते हैं।
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खाता संकलक सहमति आधारित वित्तीय डेटा साझाकरण करते हैं; वे साख सूचना ब्यूरो नहीं हैं।
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पुट्टस्वामी (2017) के बाद वित्तीय तकनीक, डेटा और डिजिटल कल्याण में निजता को केंद्र में रखना जरूरी हो गया।
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डिजिटल कर्ज़ में ऐप या एजेंट बाहर का हो, तब भी जिम्मेदारी विनियमित कर्ज़दाता की रहती है।
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डिजिटल समावेशन के लिए स्मार्टफोन ही काफी नहीं; सुरक्षा, शिकायत निवारण और सहायता-युक्त पहुंच भी चाहिए।
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आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों पर कर लगना उन्हें भारत में वैध मुद्रा नहीं बनाता।
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धारणा और कानूनी आधार
डिजिटल अर्थव्यवस्था में डेटा, इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क, डिजिटल पहचान, डिजिटल भुगतान और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के कारण वस्तुओं, सेवाओं, कर्ज़ और सरकारी लाभों का लेन-देन बदलता है।
- मुख्य बात: UPSC के लिए इसे केवल इंटरनेट पर खरीद तक सीमित न करें। दायरा बड़ा है: डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, तुरंत भुगतान, वित्तीय तकनीक से कर्ज़, डेटा सुरक्षा, प्रतिस्पर्धा, साइबर सुरक्षा और वित्तीय समावेशन।
- संवैधानिक आधार: अलग से कोई "डिजिटल अर्थव्यवस्था अनुच्छेद" नहीं है, पर आधार कई प्रावधानों से बनता है:
- अनुच्छेद 19(1)(g) व्यापार, कारोबार या पेशा करने की स्वतंत्रता देता है; अनुच्छेद 19(6) के तहत उचित पाबंदियां लग सकती हैं।
- अनुच्छेद 21 में, के. एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (2017) के बाद, निजी जानकारी की गोपनीयता भी जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा मानी गई।
- अनुच्छेद 38 और अनुच्छेद 39 राज्य को असमानता घटाने और संसाधनों के न्यायपूर्ण बंटवारे की दिशा देते हैं; डिजिटल वित्त के समावेशी इस्तेमाल को यहीं से नीति-आधार मिलता है।
- अनुच्छेद 282 लोक प्रयोजन के लिए संघ और राज्यों को अनुदान देने की गुंजाइश देता है; DBT आधारित कल्याण ढांचे में यह अहम है।
- सातवीं अनुसूची में बैंकिंग संघ सूची की प्रविष्टि 45, मुद्रा और सिक्का प्रविष्टि 36, संचार प्रविष्टि 31 में है; व्यापार से जुड़े विषय क्षेत्र के हिसाब से अलग सूचियों में आते हैं।
- कानूनी आधार: भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 RBI को भुगतान प्रणालियों पर अधिकार देता है और नेटिंग तथा अंतिम निपटान को कानूनी पक्का आधार देता है। भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 मौद्रिक नियंत्रण और मुद्रा प्रबंधन से जुड़ा है। बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 बैंकों पर लागू होता है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और साइबर अपराधों की मूल कानूनी जमीन देता है। आधार अधिनियम, 2016 डिजिटल पहचान आधारित लाभ पहुंचाने से जुड़ता है, जबकि डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 डिजिटल निजी डेटा के अधिकारों का ढांचा बनाता है।
- परीक्षा में अहम फर्क: यूपीआई का संचालन एनपीसीआई करता है, लेकिन भुगतान प्रणाली का नियमन 2007 के भुगतान-निपटान अधिनियम के तहत RBI के पास है। एनपीसीआई ढांचा चलाता है; RBI नियामक और पर्यवेक्षक है।
- विकास से रिश्ता: डिजिटल वित्त साधन है, लक्ष्य नहीं। इससे समावेशन तभी बढ़ता है जब पहुंच, कम लागत, शिकायत निवारण, सहमति और नकद निकासी की सुविधा साथ हों।
- नीति शब्द अलग रखें: सूचना को इलेक्ट्रॉनिक रूप देना और प्रक्रियाओं को डिजिटल साधनों के हिसाब से फिर बनाना, दोनों अलग बातें हैं; डिजिटल अर्थव्यवस्था इन प्रक्रियाओं पर खड़ा व्यापक उत्पादन, विनिमय और शासन तंत्र है।
- कानून और योजनाएं अलग हैं: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, आधार अधिनियम, भुगतान-निपटान अधिनियम और डेटा संरक्षण अधिनियम कानूनी शक्तियां और जिम्मेदारियां बनाते हैं। जन धन, DBT या डिजिटल इंडिया जैसी योजनाएं उसी कानूनी और प्रशासनिक आधार का उपयोग करती हैं; योजना और अधिनियम एक चीज़ नहीं हैं।
- संघीय पहलू: कई कल्याण डेटाबेस और सेवा पोर्टल राज्य चलाते हैं, लेकिन बैंकिंग नियमन, मुद्रा और भुगतान प्रणाली का बड़ा हिस्सा संघ के दायरे में है। आखिरी छोर पर तालमेल की कमी फिर भी समस्या बना सकती है।
- अधिकार संतुलन: अनुच्छेद 19(1)(g) नवाचार और प्रवेश को सहारा देता है, जबकि अनुच्छेद 21 और डेटा सुरक्षा नियम अत्यधिक निगरानी या लापरवाह डेटा उपयोग पर रोक लगाते हैं। यही वित्तीय तकनीक नियमन का संवैधानिक केंद्र है।
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1MCQयूपीआई के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. यूपीआई का संचालन एनपीसीआई करता है। 2. यूपीआई उपयोगकर्ताओं के बीच केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा स्थानांतरित करता है। 3. RBI भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के तहत भुगतान प्रणालियों का नियमन करता है। ऊपर दिए गए कौन-से कथन सही हैं?
व्याख्या
यूपीआई का संचालन एनपीसीआई करता है और यह RBI के भुगतान प्रणाली ढांचे में विनियमित है। यह बैंक जमा स्थानांतरित करता है, डिजिटल रुपया नहीं।
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