मुख्य तथ्य

  • अनुच्छेद 1-4, 51, 253 और 297 क्षेत्र, संधि, समुद्री संसाधन और सीमा बदलाव को जोड़ते हैं।
  • अनुच्छेद 3 आंतरिक राज्य-सीमा बदलता है; बेरुबारी, 1960 के बाद विदेशी देश को क्षेत्र सौंपने के लिए संवैधानिक संशोधन चाहिए।
  • 1976 का समुद्री क्षेत्र अधिनियम और समुद्र विधि पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय प्रादेशिक सागर, सन्निहित क्षेत्र, विशेष आर्थिक क्षेत्र और महाद्वीपीय मग्नतट क...

मुख्य बिंदु

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    हर स्थान को नक्शे की स्थिति, घटना के कारण, कानूनी ढांचे, भारत के हित और पास के भ्रम से पढ़ें।

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    अनुच्छेद 1-4, 51, 253 और 297 क्षेत्र, संधि, समुद्री संसाधन और सीमा बदलाव को जोड़ते हैं।

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    अनुच्छेद 3 आंतरिक राज्य-सीमा बदलता है; बेरुबारी, 1960 के बाद विदेशी देश को क्षेत्र सौंपने के लिए संवैधानिक संशोधन चाहिए।

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    1976 का समुद्री क्षेत्र अधिनियम और समुद्र विधि पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय प्रादेशिक सागर, सन्निहित क्षेत्र, विशेष आर्थिक क्षेत्र और महाद्वीपीय मग्नतट को अलग करते हैं।

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    होर्मुज़, बाब-अल-मंदेब और मलक्का जैसे संकरे मार्ग जुड़े समुद्रों और व्यापारिक महत्व से पूछे जाते हैं।

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    हाल के स्थानों को आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर देखें; दावा, नियंत्रण और संप्रभुता को एक जैसा न मानें।

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    भारत से जुड़े बंदरगाह और गलियारे मार्ग-तर्क मांगते हैं: चाबहार, अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा, कालादान, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा और त्रिपक्षीय राजमार्ग अलग हैं।

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    विवादित स्थानों में भौतिक स्थिति, प्रशासन करने वाला पक्ष, दावा करने वाले देश और संधि या मध्यस्थता पृष्ठभूमि पढ़ें।

चर्चा में रहे स्थानों का दायरा

चर्चा में रहे स्थान केवल राजधानी या देश याद करने का विषय नहीं है। UPSC किसी स्थान को भूगोल, कानून, संस्थाओं और भारत के हितों से जोड़कर पूछता है।

  • मूल अर्थ: कोई स्थान तब परीक्षा में अहम बनता है जब किसी घटना से उसका महत्व बढ़े: सीमा विवाद, संधि, बंदरगाह परियोजना, आपदा, संघर्ष क्षेत्र, नया संरक्षित क्षेत्र, अंतरराष्ट्रीय गलियारा, शिखर सम्मेलन का स्थान, खनिज क्षेत्र, द्वीप, जलडमरूमध्य, दर्रा, नदी द्रोणी या छिटमहल।
  • राष्ट्रीय महत्व: भारत के भीतर के स्थान अनुच्छेद 1, पहली अनुसूची, राज्यों की सीमा, केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन, पर्यावरण कानून, आपदा शासन, जनजातीय सुरक्षा, अवसंरचना, आंतरिक सुरक्षा और संघीय परामर्श से पढ़े जाते हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय महत्व: विदेशी स्थान तब जरूरी होते हैं जब वे भारत की कूटनीति, व्यापार मार्ग, प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा साझेदारी, समुद्री पहुंच, प्रतिबंधों के जोखिम या बहुपक्षीय बातचीत को प्रभावित करें।
  • भौगोलिक आधार: हर स्थान को सटीक स्थिति, आसपास के क्षेत्र, पड़ोसी, स्थलरूप, जलवायु पट्टी, नदी-तंत्र, समुद्री मार्ग, संसाधन, आबादी की संवेदनशीलता और भारत से दूरी के आधार पर पढ़ें।
  • भू-राजनीतिक आधार: यह देखें कि नियंत्रण किसके पास है, दावा कौन कर रहा है, कौन-सी संधि या संस्था लागू है, हाल में क्या बदला और भारत ने बयान, समझौता, नागरिकों की निकासी या निवेश क्यों किया।
  • कानूनी आधार: अनुच्छेद 1, 2, 3, 4, 51, 253 और 297; पहली अनुसूची; विदेश मामले और संधियों से जुड़ी संघ सूची की प्रविष्टियां; तथा 1976 का समुद्री क्षेत्र अधिनियम याद रखें।
  • प्रारंभिक परीक्षा की चाल: खबर में कोई स्थान केवल एक बार आया हो सकता है, पर सवाल यह पूछ सकता है कि वह लाल सागर, अदन की खाड़ी, अंडमान सागर, मेकांग नदी द्रोणी, साहेल, आर्कटिक वृत्त या किस द्वीप-समूह में है।
  • काम की पद्धति: नोट में दो खांचे रखें: “घटना का कारण” और “स्थायी नक्शा-तथ्य”। पहला हर साल बदलता है; दूसरा अक्सर परीक्षा में पूछा जाता है।
  • सीमा: संघर्षों पर अटकल न लगाएं। कोई दावा आधिकारिक स्रोत, संधि-पाठ, मान्य नक्शा संस्था या भरोसेमंद अंतरराष्ट्रीय निकाय से न जुड़ता हो तो उसे पक्के तथ्य की तरह न लिखें।

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संभावित प्रश्न

अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।

1MCQभारत के समुद्री क्षेत्रों पर निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. प्रादेशिक सागर आधार रेखा से 12 समुद्री मील तक होता है। 2. विशेष आर्थिक क्षेत्र भारत को भूमि-क्षेत्र जैसी पूर्ण संप्रभुता देता है। 3. सन्निहित क्षेत्र 24 समुद्री मील तक होता है। कौन-सा/से कथन सही है/हैं?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aकेवल 1 और 2
  2. Bकेवल 1 और 3सही
  3. Cकेवल 2 और 3
  4. D1, 2 और 3

व्याख्या

कथन 1 और 3 सही हैं। विशेष आर्थिक क्षेत्र में भारत को संसाधनों पर संप्रभु अधिकार मिलते हैं, भूमि जैसी पूर्ण संप्रभुता नहीं।

~50 शब्द · 1 अंक