राष्ट्रीय राजव्यवस्था और शासन: हालिया घटनाक्रम
मुख्य तथ्य
- अभिव्यक्ति, निजता, पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया वाली समसामयिकी में अनुच्छेद 14, 19, 21, 32 और 226 सबसे अहम हैं।
- चुनावी संस्थाओं की बहस अनुच्छेद 324, जन प्रतिनिधित्व कानूनों और 2023 के मुख्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम से बनती है।
- अनुच्छेद 368 के संशोधन केशवानंद भारती, 1973 के मूल संरचना सिद्धांत से सीमित रहते हैं।
- 106वें संशोधन, 2023 ने विधायिकाओं में महिलाओं के आरक्षण के लिए अनुच्छेद 239AA में बदलाव किया और अनुच्छेद 330A, 332A तथा 334A जोड़े।
- संघीय विवाद अक्सर सातवीं अनुसूची, अनुच्छेद 254, अनुच्छेद 356, राज्यपाल की शक्तियों और अनुच्छेद 370 से जुड़े तर्क पर टिकते हैं।
मुख्य बिंदु
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राष्ट्रीय राजव्यवस्था की खबर को दलगत टिप्पणी से नहीं, अनुच्छेद, संस्था, प्रक्रिया, शक्ति और सीमा से पढ़ें।
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अभिव्यक्ति, निजता, पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया वाली समसामयिकी में अनुच्छेद 14, 19, 21, 32 और 226 सबसे अहम हैं।
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चुनावी संस्थाओं की बहस अनुच्छेद 324, जन प्रतिनिधित्व कानूनों और 2023 के मुख्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम से बनती है।
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अनुच्छेद 368 के संशोधन केशवानंद भारती, 1973 के मूल संरचना सिद्धांत से सीमित रहते हैं।
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106वें संशोधन, 2023 ने विधायिकाओं में महिलाओं के आरक्षण के लिए अनुच्छेद 239AA में बदलाव किया और अनुच्छेद 330A, 332A तथा 334A जोड़े।
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संघीय विवाद अक्सर सातवीं अनुसूची, अनुच्छेद 254, अनुच्छेद 356, राज्यपाल की शक्तियों और अनुच्छेद 370 से जुड़े तर्क पर टिकते हैं।
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RTI, CAG, लोकपाल, NHRC, आधार और डेटा-सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रम जवाबदेही और अधिकारों को साथ परखते हैं।
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स्थानीय शासन की समसामयिकी में भाग IX और IXA, ग्यारहवीं-बारहवीं अनुसूची और राज्य निर्वाचन आयोग जरूरी हैं।
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दायरा: राष्ट्रीय राजव्यवस्था की समसामयिकी क्या है
राष्ट्रीय राजव्यवस्था की समसामयिकी का मतलब रोज़ की खबरों को दलगत बहस से नहीं, संविधान, कानून और संस्थाओं की कसौटी से पढ़ना है।
- अर्थ: इस विषय में राष्ट्रीय घटना वही है जो भारत में संवैधानिक शासन को बदलती, समझाती, परखती या जमीन पर लागू करती हो। यह फैसला, अधिनियम, संशोधन, नियम, नियुक्ति-प्रक्रिया, संसदीय प्रक्रिया, संघीय विवाद, अधिकारों की बहस, चुनाव-सुधार, आपराधिक कानून में बदलाव, डेटा-सुरक्षा ढांचा, स्थानीय सरकार से जुड़ा कदम या पारदर्शिता का मामला हो सकता है।
- संवैधानिक आधार: शुरुआत प्रस्तावना से करें; संघ और उसके राज्यक्षेत्र के लिए भाग I; अधिकारों के लिए भाग III; नीति-निदेशक तत्वों के लिए भाग IV; कर्तव्यों के लिए भाग IVA; संघ और राज्य संस्थाओं के लिए भाग V और भाग VI; स्थानीय निकायों के लिए भाग IX और भाग IXA; सेवाओं के लिए भाग XIV; चुनाव के लिए भाग XV; भाषा के लिए भाग XVII; और आपातकाल तथा संघीय प्रश्नों के लिए अनुच्छेद 352-360।
- कानूनी आधार: अहम समसामयिकी अक्सर किसी अधिनियम पर टिकी होती है: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951; सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005; लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013; आधार अधिनियम, 2016; डिजिटल निजी डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023; 2023 के तीन आपराधिक कानून; और उनसे जुड़े नियम।
- प्रीलिम्स की छंटनी: केवल “क्या हुआ?” न पूछें। पूछें: कौन-सा अनुच्छेद, कौन-सा निकाय, नियुक्ति कौन करता है, हटाने की प्रक्रिया क्या है, सीमा क्या है और घटना के बाद क्या बदला।
- परीक्षा में भ्रमित करने वाली बात: कोई खबर बहुत शोर वाली हो सकती है लेकिन संवैधानिक रूप से छोटी; दूसरी तकनीकी दिख सकती है पर अधिकार, संघवाद या जवाबदेही बदल सकती है। UPSC अक्सर दूसरी तरह की बात पूछता है।
- पढ़ने का तरीका: हर घटना को पांच खानों में रखें: अधिकार, संस्थाएं, संसद, संघवाद या सेवाएं पहुंचाने। फिर उससे जुड़ा अनुच्छेद या कानून जोड़ें।
- दायरे की सीमा: अंतरराष्ट्रीय खबर इस नोट में तभी आएगी जब वह भारतीय शासन को प्रभावित करे, जैसे डेटा प्रवाह, चुनाव-मानक, संधि से जुड़ा कानून या लोकतंत्र-सूचकांक बहस। बाकी सामग्री अंतरराष्ट्रीय संबंध या प्रतिवेदन-सूचकांक वाले विषय में जाएगी।
- यह क्यों जरूरी है: समसामयिकी ताज़ी याददाश्त मांगती है, लेकिन राजव्यवस्था स्थिर श्रेणियां मांगती है। अच्छा उत्तर दोनों को मिलाता है: हालिया घटना को पुराने संवैधानिक नियम में रखें और बदले हुए तंत्र को बिना बढ़ा-चढ़ाकर लिखें। आधिकारिक स्थिति ज़रूर देखें। विधेयक, राष्ट्रपति की स्वीकृति पा चुका अधिनियम और लागू हो चुकी धारा तीन अलग चरण हैं, इसलिए कथन को सही मानने से पहले उसका चरण लिखें।
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स्टडी पैक खोलेंसंभावितसंभावित प्रश्न
अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।
1MCQराष्ट्रीय राजव्यवस्था की समसामयिकी पर निम्न कथनों पर विचार करें: 1. कोई वैधानिक निकाय व्यवहार में संवैधानिक निकाय से अधिक प्रभावी दिख सकता है, फिर भी उसका अधिकार अपने मूल अधिनियम से आता है। 2. यदि सदन निर्देश दे तो संसदीय समिति सरकारी योजना चला सकती है। 3. प्रीलिम्स में निकाय के वर्गीकरण के लिए उसके नाम से अधिक उसके अधिकार-स्रोत का महत्व है। इन कथनों में कौन-से सही हैं?
व्याख्या
कथन 1 और 3 सही हैं। संसदीय समिति जांच और सिफारिश करती है; वह कार्यपालिका एजेंसी की तरह योजना नहीं चलाती।
~50 शब्द · 1 अंक
