अंतरराष्ट्रीय संगठन और बहुपक्षीय मंच
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 253 संसद को संधि, अभिसमय और अंतरराष्ट्रीय निर्णय लागू करने के लिए पूरे भारत में कानून बनाने की शक्ति देता है।
- UNSC में 15 सदस्य हैं: 5 स्थायी और 10 अस्थायी, जिनका चुनाव 2 साल के लिए होता है।
- G20 स्थायी सचिवालय के बिना चलने वाला मंच है; अफ्रीकी संघ 2023 में स्थायी सदस्य बना।
- BRICS का विस्तार 2024 में हुआ; इंडोनेशिया को जनवरी 2025 में पूर्ण सदस्य घोषित किया गया।
- भारत जी-4 और एल-69 मंचों से व्यापक UNSC सुधार की मांग करता है।
मुख्य बिंदु
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अनुच्छेद 253 संसद को संधि, अभिसमय और अंतरराष्ट्रीय निर्णय लागू करने के लिए पूरे भारत में कानून बनाने की शक्ति देता है।
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UNSC में 15 सदस्य हैं: 5 स्थायी और 10 अस्थायी, जिनका चुनाव 2 साल के लिए होता है।
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G20 स्थायी सचिवालय के बिना चलने वाला मंच है; अफ्रीकी संघ 2023 में स्थायी सदस्य बना।
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BRICS का विस्तार 2024 में हुआ; इंडोनेशिया को जनवरी 2025 में पूर्ण सदस्य घोषित किया गया।
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QUAD अनौपचारिक और इंडो-पैसिफिक केंद्रित है; SCO संरचित और यूरेशिया सुरक्षा केंद्रित है।
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शिखर घोषणाएं राजनीतिक प्रतिबद्धता होती हैं, जब तक संधि या घरेलू कानून उन्हें लागू न करे।
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भारत जी-4 और एल-69 मंचों से व्यापक UNSC सुधार की मांग करता है।
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अनुच्छेद 51 अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की दिशा देता है; यह अपने-आप लागू करने वाला कानून नहीं है।
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अवधारणा, दायरा और परीक्षा में महत्व
अंतरराष्ट्रीय संगठन और बहुपक्षीय मंच वे व्यवस्थाएं हैं जिनके ज़रिए देश नियम, संसाधन, सुरक्षा-हित और राजनीतिक संदेश आपस में साधते हैं।
- मूल बात: किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन के पास आम तौर पर चार्टर या संधि, तय अंग, सदस्यता नियम और स्थायी सचिवालय होता है; कई मंच इससे ढीले होते हैं और शिखर सम्मेलन तथा सहमति से चलते हैं।
- संस्थागत रूप: UN, WHO, WTO, IMF और विश्व बैंक जैसे निकाय लिखित आधार, तय निर्णय-प्रक्रिया और नियमित कामकाज रखते हैं।
- मंच वाला रूप: G20, BRICS, QUAD, SCO, SAARC और ASEAN से जुड़े मंच इसलिए अहम हैं क्योंकि इनके ज़रिए नेता प्राथमिकताएं, नई पहल और साझा रुख घोषित करते हैं।
- UPSC के लिहाज़ से सावधानी: हर घोषणा को संधि न मानें। घोषणा नीति को दिशा दे सकती है, पर भारत में उसका घरेलू कानूनी असर आम तौर पर मौजूदा कानून, कार्यपालिका की शक्ति या संसद के बनाए कानून से ही आता है।
- भारत का पहलू: भारत बहुपक्षीय मंचों का इस्तेमाल UNSC सुधार, विकास वित्त, तकनीक तक पहुंच, आतंकवाद-विरोध, प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा, आपदा राहत, संपर्क, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक दक्षिण की आवाज़ के लिए करता है।
- समसामयिकी वाला हिस्सा: स्थिर आधार छोटा है: UN चार्टर, भारतीय संविधान की संबंधित धाराएं, सदस्यता और निर्णय नियम। बदलता हुआ हिस्सा शिखर सम्मेलनों, नए सदस्यों, अध्यक्षताओं, घोषणाओं और मुद्दा-आधारित पहलों से आता है।
- प्रीलिम्स में पूछताछ: सदस्यता, अंग, मतदान नियम, स्थापना वर्ष, मुख्यालय, भारत की भूमिका, नए सदस्य और यह फर्क कि निकाय संधि-आधारित है या अनौपचारिक।
- संतुलित समझ: सार्वजनिक भाषणों में “वैश्विक शासन” की भाषा बड़ी हो सकती है। परीक्षा में देखें कि फैसला कौन करता है, किस नियम से करता है और क्या भारत ने कोई कानूनी दायित्व स्वीकार किया है।
- विषय-संबंध: यह अध्याय अर्थव्यवस्था में IMF, WTO और विश्व बैंक, पर्यावरण में जलवायु कूटनीति, विज्ञान-तकनीक में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और राजव्यवस्था में अनुच्छेद 253 से जुड़ता है।
- प्राथमिकता: UN, G20, BRICS, QUAD और SCO केंद्र में रखें; SAARC, ASEAN, बिम्सटेक, आईओआरए, IAEA, WHO, WTO, IMF और विश्व बैंक आसपास के स्मरण-बिंदु हैं।
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1MCQनिम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. अनुच्छेद 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन या निकाय में लिए गए निर्णय लागू करने के लिए कानून बनाने की शक्ति देता है। 2. अनुच्छेद 51 मूल अधिकार की तरह सीधे प्रवर्तनीय है। 3. संघ सूची प्रविष्टि 13 अंतरराष्ट्रीय निकायों में भागीदारी को कवर करती है। कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
व्याख्या
अनुच्छेद 253 और प्रविष्टि 13 सही बताए गए हैं। अनुच्छेद 51 नीति-निदेशक तत्व है, मूल अधिकार नहीं।
~50 शब्द · 1 अंक
