मुख्य तथ्य

  • अनुच्छेद 51 अंतरराष्ट्रीय शांति, संधि-कर्तव्यों के सम्मान और पंचाट की संवैधानिक दिशा देता है; अनुच्छेद 253 क्रियान्वयन कानून का आधार है।
  • द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में साझेदार, क्षेत्र, तंत्र और दस्तावेज पूछे जाते हैं; हर संयुक्त वक्तव्य बाध्यकारी समझौता नहीं होता।
  • G20 नई दिल्ली 2023 सहमति से अपनाई गई घोषणा, अफ्रीकी संघ सदस्यता, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और वैश्विक दक्षिण के दृष्टिकोण के लिए अहम है।
  • BRICS और SCO दोनों में भारत, चीन और रूस हैं, लेकिन उनका काम, संस्थागत ढांचा और भूगोल अलग है।
  • QUAD भारत-ऑस्ट्रेलिया-जापान-अमेरिका का सीमित बहुपक्षीय सहयोग है, संधि-आधारित सैन्य गठबंधन नहीं।

मुख्य बिंदु

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    अनुच्छेद 51 अंतरराष्ट्रीय शांति, संधि-कर्तव्यों के सम्मान और पंचाट की संवैधानिक दिशा देता है; अनुच्छेद 253 क्रियान्वयन कानून का आधार है।

  2. 2

    द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में साझेदार, क्षेत्र, तंत्र और दस्तावेज पूछे जाते हैं; हर संयुक्त वक्तव्य बाध्यकारी समझौता नहीं होता।

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    G20 नई दिल्ली 2023 सहमति से अपनाई गई घोषणा, अफ्रीकी संघ सदस्यता, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और वैश्विक दक्षिण के दृष्टिकोण के लिए अहम है।

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    BRICS और SCO दोनों में भारत, चीन और रूस हैं, लेकिन उनका काम, संस्थागत ढांचा और भूगोल अलग है।

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    QUAD भारत-ऑस्ट्रेलिया-जापान-अमेरिका का सीमित बहुपक्षीय सहयोग है, संधि-आधारित सैन्य गठबंधन नहीं।

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    भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, भारत-इज़राइल-यूएई-अमेरिका समूह, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन अलग पहलें हैं; सदस्यता और उद्देश्य अलग हैं।

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    रणनीतिक साझेदारी जैसे संकेत राजनीतिक निकटता दिखाते हैं; वे संवैधानिक श्रेणी या अपने-आप कानूनी दायित्व नहीं हैं।

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    UPSC अक्सर शिखर दस्तावेजों की क्रियाओं को पूछता है: अपनाया गया, हस्ताक्षरित, अनुमोदित, कार्यशील हुआ और शुरू हुआ - ये अलग चरण हैं।

दायरा, संवैधानिक आधार और प्रीलिम्स मानचित्र

प्रीलिम्स में अंतरराष्ट्रीय संबंध का यह हिस्सा केवल यात्राओं की सूची नहीं है। UPSC अक्सर यह देखता है कि अभ्यर्थी किसी शिखर सम्मेलन को उसके मंच, दस्तावेज, सदस्यता, भूगोल, तंत्र और भारत के हित से जोड़ पा रहा है या नहीं।

  • मुख्य अर्थ: द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन दो देशों के बीच नेता-स्तर या मंत्री-स्तर की बैठक है; बहुपक्षीय शिखर सम्मेलन ऐसे मंच में होता है जहाँ दो से अधिक देश साझा रुख तय करते हैं।
  • संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 51 राज्य को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बढ़ाने, देशों के बीच न्यायपूर्ण संबंध रखने, अंतरराष्ट्रीय विधि और संधि-कर्तव्यों का सम्मान करने तथा विवादों के पंचाट-आधारित समाधान को बढ़ावा देने की दिशा देता है।
  • कानूनी आधार: अनुच्छेद 253 संसद को संधि, समझौते, अभिसमय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, संस्था या निकाय के निर्णय लागू करने के लिए कानून बनाने की शक्ति देता है।
  • सातवीं अनुसूची का आधार: संघ सूची की प्रविष्टि 10 विदेश मामलों, प्रविष्टि 11 राजनयिक, कांसुलर और व्यापारिक प्रतिनिधित्व, प्रविष्टि 12 संयुक्त राष्ट्र, प्रविष्टि 13 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भागीदारी और निर्णयों के क्रियान्वयन, प्रविष्टि 14 संधियों और समझौतों, तथा प्रविष्टि 15 युद्ध और शांति से जुड़ी है।
  • कार्यपालिका का आधार: अनुच्छेद 73 उन विषयों तक संघ की कार्यपालिका शक्ति फैलाता है जिन पर संसद कानून बना सकती है। इसलिए विदेश नीति मुख्य रूप से संघ का क्षेत्र है, हालांकि व्यापार, प्रवासन, सीमा अवसंरचना और प्रवासी भारतीयों से जुड़े मामलों में राज्यों का असर दिखता है।
  • दस्तावेज से जुड़ा भ्रम: संयुक्त वक्तव्य, घोषणा, विज्ञप्ति, दृष्टि-पत्र, कार्ययोजना, समझौता और समझौता ज्ञापन एक जैसे नहीं होते। घोषणा राजनीतिक सहमति दिखाती है; समझौते में अपेक्षाकृत साफ प्रतिबद्धता हो सकती है; कार्ययोजना आगे के काम की दिशा बताती है।
  • समसामयिकी से जुड़ा भ्रम: शिखर सम्मेलन में पुरानी पहलें नए नाम से भी सामने आती हैं। प्रीलिम्स में देखना होता है कि सचमुच नया क्या है: कार्य समूह, सदस्यता विस्तार, गलियारा, वित्तीय वादा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना ढांचा, रक्षा अभ्यास, समुद्री पहल या आपूर्ति श्रृंखला व्यवस्था।
  • भारत-केंद्रित कसौटी: हर शिखर सम्मेलन पर चार सवाल रखें: कौन-सा मंच, कौन-से सदस्य, किस मुद्दे से जुड़ा समूह और भारत ने क्या पाया या क्या बचाया।
  • ज़्यादा पूछा जाने वाला क्षेत्र: G20, BRICS, QUAD, SCO, आसियान से जुड़ी बैठकें, भारत-अमेरिका, भारत-जापान, भारत-फ्रांस, भारत-ऑस्ट्रेलिया, भारत-यूएई, पड़ोस और वैश्विक दक्षिण मंच।
  • अति-व्याख्या न करें: शिखर सम्मेलन की भाषा बातचीत से बनी होती है; स्वागत किया, नोट किया, दोहराया, प्रोत्साहित किया और प्रतिबद्धता जताई जैसे शब्द अलग-अलग राजनीतिक वजन रखते हैं।
  • संधि और नीति में फर्क: विदेश नीति भाषणों और शिखर दस्तावेजों से घोषित हो सकती है, पर संधि-कर्तव्यों को अलग कानूनी अध्ययन चाहिए। प्रीलिम्स में केवल इस आधार पर घरेलू लागू होने का निष्कर्ष न निकालें कि प्रधानमंत्री किसी शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे।
  • जिन संस्थाओं पर ध्यान दें: प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेश मंत्रालय, संबंधित मंत्रालय, संसद, सशस्त्र बल, नियामक और राज्य सरकारें सभी क्रियान्वयन-श्रृंखला में आ सकती हैं। जैसे महत्वपूर्ण खनिज पर शिखर चर्चा में खान, वाणिज्य, उद्योग, ऊर्जा और पर्यावरण से जुड़ी संस्थाएँ आ सकती हैं।
  • स्रोत को लेकर सावधानी: विदेश मंत्रालय पृष्ठ आधिकारिक द्विपक्षीय और बहुपक्षीय दस्तावेज देते हैं; पीआईबी योजनाओं की व्याख्या कर सकता है; संसद उत्तर स्थिति साफ कर सकते हैं; संधि-पाठ और कानून कानूनी असर तय करते हैं। अखबार संदर्भ दें, अंतिम तथ्य-स्रोत नहीं।

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संभावित प्रश्न

अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।

1MCQशिखर कूटनीति के संवैधानिक ढांचे पर निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. अनुच्छेद 51 राज्य को अंतरराष्ट्रीय विधि और संधि-कर्तव्यों के सम्मान को बढ़ावा देने की दिशा देता है। 2. अनुच्छेद 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में लिए गए निर्णय लागू करने के लिए कानून बनाने की शक्ति देता है। 3. विदेश मामले मुख्यतः राज्य सूची का विषय हैं। ऊपर दिए गए कौन-से कथन सही हैं?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aकेवल 1 और 2सही
  2. Bकेवल 2 और 3
  3. Cकेवल 1 और 3
  4. D1, 2 और 3

व्याख्या

कथन 1 और 2 सही हैं। विदेश मामले संघ सूची, विशेषकर प्रविष्टि 10, के अंतर्गत आते हैं; यह राज्य सूची का विषय नहीं है।

~50 शब्द · 1 अंक