मुख्य तथ्य

  • पंजाबी द्वितीय प्रश्नपत्र में 150 बहुविकल्पीय प्रश्न, 300 अंक, दो घंटे तीस मिनट का समय और गलत उत्तर पर एक-तिहाई ऋणात्मक अंकन है।
  • सिलेबस को चार तैयारी-खानों में बाँटना सबसे उपयोगी है: भाषा-लिपि-व्याकरण, काव्यशास्त्र-संस्कृति, साहित्य का इतिहास और पंजाबी शिक्षणशास्त्र।
  • माझी, मालवाई, दोआबी और पुआधी को क्षेत्र, भाषिक लक्षण और मानक पंजाबी से संबंध के आधार पर दोहराना चाहिए।
  • गुरुमुखी से जुड़े प्रश्न सामान्यतः मात्राओं, लागाखर, संयुक्त प्रयोग, नासिक्य चिह्न, अद्धक, ध्वनि-चिह्न संबंध और वर्तनी-नियमों पर आते हैं।
  • व्याकरण तैयारी में शब्द-भेद, शब्द-रचना, लिंग, वचन, कारक, काल, वाक्य-रचना, अर्थ, विराम-चिह्न, मुहावरे और लोकोक्तियाँ शामिल रहें।

मुख्य बिंदु

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    पंजाबी द्वितीय प्रश्नपत्र में 150 बहुविकल्पीय प्रश्न, 300 अंक, दो घंटे तीस मिनट का समय और गलत उत्तर पर एक-तिहाई ऋणात्मक अंकन है।

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    सिलेबस को चार तैयारी-खानों में बाँटना सबसे उपयोगी है: भाषा-लिपि-व्याकरण, काव्यशास्त्र-संस्कृति, साहित्य का इतिहास और पंजाबी शिक्षणशास्त्र।

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    माझी, मालवाई, दोआबी और पुआधी को क्षेत्र, भाषिक लक्षण और मानक पंजाबी से संबंध के आधार पर दोहराना चाहिए।

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    गुरुमुखी से जुड़े प्रश्न सामान्यतः मात्राओं, लागाखर, संयुक्त प्रयोग, नासिक्य चिह्न, अद्धक, ध्वनि-चिह्न संबंध और वर्तनी-नियमों पर आते हैं।

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    व्याकरण तैयारी में शब्द-भेद, शब्द-रचना, लिंग, वचन, कारक, काल, वाक्य-रचना, अर्थ, विराम-चिह्न, मुहावरे और लोकोक्तियाँ शामिल रहें।

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    काव्यशास्त्र में रस, छंद और अलंकार की परिभाषा, लक्षण और उदाहरण पूछे जा सकते हैं, विशेषकर सिलेबस में दिए गए नामित रूपों से।

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    पंजाबी साहित्यिक विधाओं में काफी, वार, किस्सा, कविता, गीत, गजल, नाटक, एकांकी, उपन्यास, कहानी, जीवनी, यात्रा-वृत्तांत और रेखाचित्र आते हैं।

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    लोक-संस्कृति के प्रश्न गीत, नृत्य, खेल, लोक-कथा, मेले, त्योहार और जन्म-विवाह-मृत्यु संस्कारों को उनके सामाजिक अवसर से जोड़ते हैं।

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    आदि और मध्यकालीन साहित्य को गुरबाणी, सूफी काव्य, किस्सा, वार और जंगनामा के लेखक-विधा-कृति तालिकाओं से याद करना चाहिए।

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    आधुनिक पंजाबी साहित्य विधा-वार पढ़ें: कविता, उपन्यास, कहानी, नाटक, रंगमंच, निबंध, यात्रा-वृत्तांत और आत्मकथा सभी में नामित लेखक हैं।

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    शिक्षणशास्त्र में सुनना-बोलना-पढ़ना-लिखना कौशल, पाठ-योजना, श्रव्य-दृश्य साधन, मूल्यांकन, विधा-वार शिक्षण और शिक्षक-पाठ्यपुस्तक-पुस्तकालय-भाषा प्रयोगशाला की भूमिका पूछी जाती है।

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    लेखक-कृति मिलान उच्च जोखिम वाला क्षेत्र है: वारिस शाह-हीर, पीलू-मिर्जा-साहिबां, फजल शाह-सोहनी-महीवाल और शाह मुहम्मद-जंगनामा जैसे जोड़ों की सटीक याद जरूरी है।

वरिष्ठ अध्यापक पंजाबी द्वितीय प्रश्नपत्र में क्या-क्या आता है?

वरिष्ठ अध्यापक पंजाबी द्वितीय प्रश्नपत्र में विद्यालय स्तर की पंजाबी भाषा, स्नातक स्तर का पंजाबी साहित्य और संस्कृति, तथा पंजाबी भाषा-शिक्षण की विधियाँ साथ-साथ आती हैं। वरिष्ठ अध्यापक परीक्षा में पंजाबी का द्वितीय प्रश्नपत्र तीन जुड़े हुए स्तरों पर बना है: विद्यालय स्तर की पंजाबी भाषा, स्नातक स्तर का पंजाबी साहित्य और संस्कृति, तथा भाषा-कक्षा की शिक्षण-विधियाँ। आधिकारिक प्रश्नपत्र ३०० अंकों का होता है, इसमें १५० बहुविकल्पीय प्रश्न होते हैं, समय दो घंटे तीस मिनट का रहता है और गलत उत्तर पर उस प्रश्न के निर्धारित अंकों का एक-तिहाई ऋणात्मक अंकन लागू होता है। आरपीएससी के वरिष्ठ अध्यापक पंजाबी द्वितीय प्रश्नपत्र पाठ्यक्रम के अनुसार यह प्रश्नपत्र अधिकतम ३०० अंकों का है। इसलिए तैयारी को केवल साहित्य या केवल व्याकरण मानकर नहीं चलना चाहिए। मजबूत अभ्यर्थी को लिपि-पहचान और वाक्य-विश्लेषण से लेकर लेखक-कृति मिलान, साहित्यिक विधा की पहचान, सांस्कृतिक तथ्य और शिक्षण-स्थितियों पर आधारित निर्णय तक सहजता से जाना आना चाहिए।

माध्यमिक और उच्च माध्यमिक भाग भाषा से शुरू होता है: भाषा की परिभाषा, विशेषताएँ, उत्पत्ति, विकास और पंजाबी की अलग पहचान। इसके बाद बोलियाँ, ध्वनि-बोध, गुरुमुखी लिपि, मात्राएँ, संयुक्त रूप, शब्द-भेद, शब्द-रचना, व्याकरणिक कोटियाँ, वाक्य-रचना, अर्थ, बोध, विराम-चिह्न, लोकोक्तियाँ और मुहावरे आते हैं। ये सभी बिंदु बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए बहुत उपयोगी हैं, क्योंकि इन्हें परिभाषा, वर्गीकरण, उदाहरण, अशुद्धि-पहचान, मिलान और प्रयोग-आधारित प्रश्नों में बदला जा सकता है। बोली-संबंधी प्रश्नों में अक्सर माझी, मालवाई, दोआबी और पुआधी के क्षेत्र तथा विशेषताएँ पूछी जाती हैं। लिपि-संबंधी प्रश्नों में स्वर-चिह्नों, लागाखर, संयुक्त रूपों और वर्तनी-नियमों की भूमिका पर ध्यान रहता है।

स्नातक स्तर का भाग अधिक विस्तृत है। इसमें काव्यशास्त्र, साहित्यिक विधाएँ, लोक-साहित्य, पंजाबी संस्कृति, आदि और मध्यकालीन साहित्य, आधुनिक साहित्य तथा पंजाबी भाषा और गुरुमुखी लिपि का इतिहास शामिल है। परीक्षा केवल लेखकों के नाम याद कराने तक सीमित नहीं रहती; प्रतिनिधि कृतियाँ, प्रमुख विषय, विधागत योगदान और साहित्यिक उपलब्धि भी पूछी जा सकती है। आदि और मध्यकालीन साहित्य में गुरबाणी, सूफी काव्य, किस्सा, वार और जंगनामा परंपराएँ केंद्रीय हैं। आधुनिक साहित्य में कविता, उपन्यास, कहानी, नाटक, एकांकी, रंगमंच और गद्य सभी लेखक-नामों के साथ आते हैं।

शिक्षण-विधि वाला भाग विषय-ज्ञान को कक्षा-व्यवहार में बदलता है। इसमें पंजाबी भाषा-शिक्षण के सिद्धांत, सूत्र और उद्देश्य; सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना कौशलों का विकास; श्रव्य-दृश्य साधनों का उपयोग; मूल्यांकन; पाठ-योजना; कविता, नाटक, उपन्यास, कहानी, निबंध, यात्रा-वृत्तांत, जीवनी और व्याकरण जैसी विधाओं के शिक्षण की विधियाँ; तथा शिक्षक, पाठ्य-पुस्तक, भाषा-पुस्तकालय और भाषा-प्रयोगशाला की भूमिका आती है। तैयारी को चार अलग खानों में बाँटना उपयोगी रहेगा: भाषा और व्याकरण, काव्यशास्त्र और संस्कृति, साहित्य का इतिहास, तथा शिक्षणशास्त्र। सबसे सुरक्षित बहुविकल्पीय रणनीति यह है कि हर लेखक को विधा, कृति, विषय और काल के साथ; हर व्याकरणिक बिंदु को उदाहरण के साथ; हर लोक-सांस्कृतिक बिंदु को अवसर और काम के साथ; और हर शिक्षण बिंदु को कक्षा-उद्देश्य तथा मूल्यांकन-प्रयोग के साथ दोहराया जाए।