हिंदी
मुख्य तथ्य
- द्वितीय प्रश्नपत्र हिंदी ३०० अंकों, १५० बहुविकल्पीय प्रश्नों और दो घंटे तीस मिनट की अवधि वाला प्रश्नपत्र है; गलत उत्तर पर एक-तिहाई ऋणात्मक अंकन है।
- पाठ्यक्रम को तीन खंडों में पढ़ना चाहिए: स्कूल-स्तर का व्याकरण, स्नातक-स्तर का हिंदी अध्ययन और हिंदी शिक्षण-विधियां।
- वर्ण-व्यवस्था में स्वर-व्यंजन वर्गीकरण, देवनागरी क्रम, ध्वनि-संकेत संबंध और सामान्य वर्तनी-भ्रम अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।
- शब्द-वर्गीकरण उत्पत्ति और व्याकरणिक कार्य दोनों आधारों पर पूछता है; तत्सम, तद्भव, संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया और क्रिया-विशेषण अलग-अलग पहचानें।
- लिंग, वचन, कारक और काल को अन्वय-व्यवस्था की तरह पढ़ें, क्योंकि शुद्धिकरण प्रश्न इन्हीं को वाक्य के भीतर छिपाकर पूछते हैं।
मुख्य बिंदु
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द्वितीय प्रश्नपत्र हिंदी ३०० अंकों, १५० बहुविकल्पीय प्रश्नों और दो घंटे तीस मिनट की अवधि वाला प्रश्नपत्र है; गलत उत्तर पर एक-तिहाई ऋणात्मक अंकन है।
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पाठ्यक्रम को तीन खंडों में पढ़ना चाहिए: स्कूल-स्तर का व्याकरण, स्नातक-स्तर का हिंदी अध्ययन और हिंदी शिक्षण-विधियां।
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वर्ण-व्यवस्था में स्वर-व्यंजन वर्गीकरण, देवनागरी क्रम, ध्वनि-संकेत संबंध और सामान्य वर्तनी-भ्रम अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।
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शब्द-वर्गीकरण उत्पत्ति और व्याकरणिक कार्य दोनों आधारों पर पूछता है; तत्सम, तद्भव, संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया और क्रिया-विशेषण अलग-अलग पहचानें।
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लिंग, वचन, कारक और काल को अन्वय-व्यवस्था की तरह पढ़ें, क्योंकि शुद्धिकरण प्रश्न इन्हीं को वाक्य के भीतर छिपाकर पूछते हैं।
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संधि, समास, उपसर्ग और प्रत्यय में निर्माण, विच्छेद, भेद-पहचान और अर्थ-निर्धारण चारों का अभ्यास आवश्यक है।
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शब्द-ज्ञान में पर्याय, विलोम, अनेकार्थी, समश्रुत भिन्नार्थक शब्द, एक शब्द, मुहावरा-अर्थ और लोकोक्ति-प्रयोग तेज पहचान से हल होते हैं।
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काव्यशास्त्र में शब्द-शक्ति, काव्य-गुण, काव्य-दोष, अलंकार, छंद, रस और रस-अवयवों के बीच सटीक अंतर याद रखें।
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साहित्य-इतिहास को काल, प्रवृत्ति, लेखक, कृति, विधा और निर्धारित पाठ के प्रसंग के साथ दोहराना चाहिए।
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निर्धारित पाठ विशेष अंकदायी हैं, क्योंकि उनसे लेखक, संपादक, विधा, अंश, विषय, पात्र, भाषा और प्रसंग पर प्रश्न बनते हैं।
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हिंदी भाषा वाले प्रश्न उद्भव-विकास, बोली-समूह, प्रमुख राजस्थानी बोलियों और मानक देवनागरी लिपि को जोड़कर पूछे जाते हैं।
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हिंदी शिक्षण-विधि में कौशल-विशिष्ट निदान, उपचारात्मक अभ्यास, उपयुक्त शिक्षण-सामग्री, सतत एवं व्यापक मूल्यांकन और पाठ-मूल्यांकन निर्णायक हैं।
वरिष्ठ अध्यापक हिंदी द्वितीय प्रश्नपत्र की बनावट कैसी है और तैयारी का अध्ययन-मानचित्र क्या होना चाहिए?
वरिष्ठ अध्यापक हिंदी द्वितीय प्रश्नपत्र की तैयारी के लिए इसे व्याकरण, साहित्य-काव्यशास्त्र और हिंदी शिक्षण-विधि के जुड़े हुए प्रश्नपत्र की तरह पढ़ना चाहिए, क्योंकि परीक्षा सीधे स्मरण के साथ तेज पहचान और सूक्ष्म भेद पकड़ने की मांग करती है। वरिष्ठ अध्यापक द्वितीय प्रश्नपत्र हिंदी को केवल साहित्य का सीमित प्रश्नपत्र समझना भूल होगी। आधिकारिक योजना में यह ३०० अंकों का प्रश्नपत्र है, जिसमें १५० बहुविकल्पीय प्रश्न दो घंटे तीस मिनट में हल करने होते हैं और प्रत्येक गलत उत्तर पर निर्धारित अंक का एक-तिहाई भाग काटा जाता है। राजस्थान लोक सेवा आयोग के वरिष्ठ अध्यापक द्वितीय प्रश्नपत्र हिंदी पाठ्यक्रम, २०२२ में इसी प्रश्नपत्र के लिए १५० प्रश्न निर्धारित हैं। इसलिए तैयारी का तरीका वर्णनात्मक उत्तर लिखने से अधिक तेज पहचान, सही वर्गीकरण और विकल्पों में सूक्ष्म भेद पकड़ने पर आधारित होना चाहिए।
हिंदी को तीन जुड़े हुए खंडों में पढ़ें। पहला खंड माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर का भाषा-ज्ञान है, जिसमें वर्ण-व्यवस्था, शब्द-वर्गीकरण, मूल व्याकरणिक कोटियां, शब्द-रचना, शब्द-ज्ञान, वाक्य-रचना, शुद्धिकरण, मुहावरे और लोकोक्तियां आती हैं। दूसरा खंड स्नातक स्तर का हिंदी अध्ययन है, जिसमें काव्यशास्त्र, साहित्य-इतिहास, भाषा और लिपि तथा निर्धारित रचनाकार और पाठ शामिल हैं। तीसरा खंड हिंदी शिक्षण-विधियों का है, जिसमें भाषा-कौशल, विधा-विशेष शिक्षण, पाठ-योजना, निदान, उपचार, शिक्षण-सहायक सामग्री, सतत एवं व्यापक मूल्यांकन और पाठ-मूल्यांकन आते हैं।
प्रश्नपत्र की वास्तविक मांग स्मरण और विवेकपूर्ण भेद दोनों की है। व्याकरण में पूछा जा सकता है कि कोई शब्द किस वर्ग का है, कोई रूप शुद्ध है या अशुद्ध, कौन-सी संधि या समास है, या कौन-सा पर्याय, विलोम, मुहावरा-अर्थ अथवा एक शब्द सही है। साहित्य में प्रायः काल और प्रवृत्ति, कृति और लेखक, पाठ और संपादक, कवि और आंदोलन, या निर्धारित अंश और प्रसंग का मिलान पूछा जाता है। काव्यशास्त्र में शब्द-शक्ति, अलंकार, काव्य-गुण, काव्य-दोष, छंद, रस और रस-अवयवों के बीच सटीक अंतर जानना निर्णायक होता है। शिक्षाशास्त्र के प्रश्न छोटे होते हैं, पर लागू ज्ञान मांगते हैं: उच्चारण सुधार की विधि क्या हो, वर्तनी-दोष का निदान कैसे हो, उपचारात्मक अभ्यास कैसा बने, और गद्य, पद्य, व्याकरण, रचना या नाटक के पाठ का मूल्यांकन किस आधार पर हो।
मजबूत अध्ययन-मानचित्र स्कूल व्याकरण से शुरू होता है, क्योंकि इससे सीधे प्रश्न भी मिलते हैं और शिक्षण-विधि के उत्तर भी बनते हैं। इसके बाद काव्यशास्त्र को पदावली-संग्रह की तरह पढ़ें और शब्द-शक्ति, रस, अलंकार, छंद, काव्य-गुण तथा काव्य-दोष की छोटी सारणियां बनाएं। साहित्य-इतिहास को कालक्रम में पढ़ें, पर पुनरावृत्ति युग्मों से करें: आदिकाल के साथ वीर और आरंभिक भक्तिपरक धाराएं, भक्तिकाल के साथ निर्गुण-सगुण, राम, कृष्ण और संत परंपरा, रीतिकाल के साथ दरबारी काव्यशास्त्र, आधुनिक कविता के साथ भारतेंदु, द्विवेदी, छायावाद और छायावादोत्तर चरण, तथा आधुनिक गद्य के साथ कहानी, उपन्यास, नाटक और निबंध। निर्धारित पाठ सामान्य इतिहास से अधिक अंकदायी हैं, क्योंकि एक ही पाठ से लेखक, संपादक, विधा, अंश, विषय, भाषा, पात्र और प्रसंग पर प्रश्न बन सकते हैं। शिक्षण-विधियों को अंत में पढ़कर बार-बार दोहराएं, क्योंकि वही व्याकरण और साहित्य को कक्षा के निर्णयों में बदलती हैं।
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