संसाधन आधार और कृषि-जलवायु प्रदेश

राजस्थान को केवल मरुस्थल मानकर नहीं पढ़ना चाहिए। पश्चिमी जिलों में शुष्क भूमि, बालू के टीले, आंतरिक अपवाह, पशुपालन, ग्वार, बाजरा, जिप्सम, लिग्नाइट और पेट्रोलियम जुड़ते हैं। अरावली पट्टी धात्विक खनिजों, वन खंडों, नदी-उद्गमों और वन्यजीव गलियारों से जुड़ी है। पूर्वी जलोढ़ मैदान गेहूं, सरसों, चना, डेयरी और घनी बसावट का क्षेत्र है, जबकि दक्षिण-पूर्वी हाड़ौती पठार काली मिट्टी, चंबल सिंचाई, सोयाबीन, धनिया और चूना-पत्थर आधारित उद्योग जोड़ता है।

कृषि का आधिकारिक ढांचा वर्षा, मिट्टी, स्थलरूप और फसल-क्रम के आधार पर 10 कृषि-जलवायु प्रदेशों में पढ़ा जाता है। MCQ के लिए चार बड़े क्षेत्रीय संकेत याद रखें: बाड़मेर और जोधपुर का भाग शुष्क पश्चिमी बाजरा, मोठ और तिल से जुड़ता है; श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ नहर-आधारित कपास, गेहूं, सरसों, चना और ग्वार से जुड़ते हैं; कोटा-बूंदी-बारां-झालावाड़ आर्द्र हाड़ौती, काली मिट्टी, सोयाबीन और धनिया के संकेत हैं; बांसवाड़ा-डूंगरपुर-प्रतापगढ़-उदयपुर दक्षिणी पहाड़ी कृषि में मक्का, दलहन और पशुपालन से जुड़े हैं। राजस्थान का शुद्ध बोया क्षेत्र रिपोर्टिंग क्षेत्र के आधे से अधिक है, इसलिए अनिश्चित वर्षा के बावजूद खेती का आधार बड़ा है। परीक्षा में भ्रम यही होता है कि सभी शुष्क जिलों को बंजर या पूरे राजस्थान की कृषि को एक ही फसल-पट्टी मान लिया जाता है।

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