मुख्य तथ्य

  • 1969 में Bell Labs में Ken Thompson और Dennis Ritchie ने Unix पर काम शुरू किया, जिसने मल्टीयूज़र, पोर्टेबल और फ़ाइल-केंद्रित OS डिजाइन को गहरा प्रभाव...
  • 1981 में IBM PC के साथ MS-DOS लोकप्रिय हुआ, इसलिए कमांड-लाइन, एकल-उपयोगकर्ता और फ़ाइल-नाम आधारित प्रश्नों में इसका संदर्भ बार-बार आता है।
  • 1985 में Microsoft ने Windows 1.0 जारी किया, जिससे पर्सनल कंप्यूटरों पर ग्राफ़िकल इंटरफ़ेस की दिशा आम उपयोगकर्ताओं तक पहुंची।
  • 1991 में Linus Torvalds ने Linux कर्नेल की घोषणा की, जो बाद में सर्वर, डेस्कटॉप और एम्बेडेड डिवाइसों में उपयोग होने वाले Unix-जैसे मुक्त और खुले-स्रोत...
  • 1993 में Microsoft ने Windows NT 3.1 जारी किया, जिसने पुराने DOS-आधारित क्रम से अलग प्रोटेक्टेड, प्रीएम्प्टिव और पोर्टेबल Windows आर्किटेक्चर पेश किया...

मुख्य बिंदु

  1. 1

    1969 में Bell Labs में Ken Thompson और Dennis Ritchie ने Unix पर काम शुरू किया, जिसने मल्टीयूज़र, पोर्टेबल और फ़ाइल-केंद्रित OS डिजाइन को गहरा प्रभाव दिया।

  2. 2

    1981 में IBM PC के साथ MS-DOS लोकप्रिय हुआ, इसलिए कमांड-लाइन, एकल-उपयोगकर्ता और फ़ाइल-नाम आधारित प्रश्नों में इसका संदर्भ बार-बार आता है।

  3. 3

    1985 में Microsoft ने Windows 1.0 जारी किया, जिससे पर्सनल कंप्यूटरों पर ग्राफ़िकल इंटरफ़ेस की दिशा आम उपयोगकर्ताओं तक पहुंची।

  4. 4

    1991 में Linus Torvalds ने Linux कर्नेल की घोषणा की, जो बाद में सर्वर, डेस्कटॉप और एम्बेडेड डिवाइसों में उपयोग होने वाले Unix-जैसे मुक्त और खुले-स्रोत OS का आधार बना।

  5. 5

    1993 में Microsoft ने Windows NT 3.1 जारी किया, जिसने पुराने DOS-आधारित क्रम से अलग प्रोटेक्टेड, प्रीएम्प्टिव और पोर्टेबल Windows आर्किटेक्चर पेश किया।

  6. 6

    2001 में Apple ने Mac OS X 10.0 जारी किया, जिसमें Unix-आधारित कोर और ग्राफ़िकल डेस्कटॉप को जोड़ा गया और उपभोक्ता OS में Unix विचारों को मजबूती मिली।

  7. 7

    2008 में Google और Open Handset Alliance ने Android 1.0 जारी किया, जो Linux-कर्नेल-आधारित मोबाइल OS था और स्मार्टफ़ोन कंप्यूटिंग में केंद्रीय बन गया।

ऑपरेटिंग सिस्टम की भूमिका और संरचना क्या होती है?

ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर हार्डवेयर और उपयोगकर्ता प्रोग्रामों के बीच वह नियंत्रक परत है जो CPU, मेमोरी, फाइलों, डिवाइसों और सुरक्षा को व्यवस्थित करके अनुप्रयोगों को हार्डवेयर की जटिलता से अलग रखती है। ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर हार्डवेयर और उपयोगकर्ता प्रोग्रामों के बीच नियंत्रक परत है। इसका मुख्य काम CPU, मेमोरी, फाइलों, डिवाइसों और सुरक्षा को व्यवस्थित करना है, ताकि अनुप्रयोग प्रोग्राम हार्डवेयर की जटिलता जाने बिना चल सकें। OS संसाधन आवंटन, त्रुटि नियंत्रण, यूज़र इंटरफ़ेस, अकाउंटिंग, सुरक्षा और नेटवर्किंग जैसी सेवाएं देता है। Microsoft लर्न के अनुसार प्रोसेसर समूह में अधिकतम 64 लॉजिकल प्रोसेसर रखे जाते हैं; यही उदाहरण दिखाता है कि आधुनिक OS संसाधनों को गिनकर और समूहों में बांटकर नियंत्रित करता है। वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में OS को केवल “सॉफ्टवेयर” कहकर छोड़ना पर्याप्त नहीं होता; उसे सिस्टम सॉफ्टवेयर, रिसोर्स मैनेजर और एक्सटेंडेड मशीन तीनों रूपों में समझना चाहिए।

कर्नेल OS का केंद्रीय भाग है। यह प्रोसेस, मेमोरी, डिवाइस ड्राइवर और सिस्टम कॉल संभालता है। शेल उपयोगकर्ता से कमांड लेकर कर्नेल तक पहुंचाता है, जबकि ग्राफ़िकल इंटरफ़ेस बटन, विंडो और मेनू देता है। मोनोलिथिक कर्नेल में अधिक सेवाएं कर्नेल स्पेस में रहती हैं; माइक्रोकर्नेल में न्यूनतम सेवाएं कर्नेल में रखी जाती हैं और बाकी यूज़र स्पेस में चलती हैं। हाइब्रिड कर्नेल दोनों दृष्टियों का व्यावहारिक मिश्रण रखता है।

याद रखने योग्य बात: OS का मूल प्रश्न हमेशा “कौन-सा संसाधन किसे, कब और कैसे मिलेगा” से जुड़ा रहता है।

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