संख्या प्रणालियाँ, बूलियन बीजगणित और डिजिटल लॉजिक
मुख्य तथ्य
- कंप्यूटर का मूल आधार द्विआधारी प्रणाली है, इसलिए 0 और 1 की अवस्थाओं से सूचना, निर्देश और लॉजिक को निरूपित किया जाता है।
- 1 बिट एक स्थिति दिखाता है और 1 बाइट में 8 बिट्स होते हैं; वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में यही सबसे बुनियादी इकाई-संबंध है।
- इंजीनियरिंग संदर्भ में 1 किलोबाइट 1,024 बाइट्स माना जाता है, जबकि दशमलव दृष्टिकोण में 1,000 बाइट्स भी दिखाया जाता है।
- हेक्साडेसिमल प्रणाली 0-9 और A-F प्रतीकों का उपयोग करती है तथा बिटों के समूहों को संक्षिप्त लिखने में मदद करती है।
- आस्की का आधार 1963 में और यूनिकोड का आधार 1991 में मजबूत हुआ; ये अक्षर निरूपण के मुख्य परीक्षा-बिंदु हैं।
मुख्य बिंदु
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कंप्यूटर का मूल आधार द्विआधारी प्रणाली है, इसलिए 0 और 1 की अवस्थाओं से सूचना, निर्देश और लॉजिक को निरूपित किया जाता है।
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1 बिट एक स्थिति दिखाता है और 1 बाइट में 8 बिट्स होते हैं; वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में यही सबसे बुनियादी इकाई-संबंध है।
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इंजीनियरिंग संदर्भ में 1 किलोबाइट 1,024 बाइट्स माना जाता है, जबकि दशमलव दृष्टिकोण में 1,000 बाइट्स भी दिखाया जाता है।
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हेक्साडेसिमल प्रणाली 0-9 और A-F प्रतीकों का उपयोग करती है तथा बिटों के समूहों को संक्षिप्त लिखने में मदद करती है।
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आस्की का आधार 1963 में और यूनिकोड का आधार 1991 में मजबूत हुआ; ये अक्षर निरूपण के मुख्य परीक्षा-बिंदु हैं।
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पहली पीढ़ी 1946-1959 में निर्वात नलिकाओं पर, दूसरी पीढ़ी 1959-1965 में ट्रांज़िस्टर पर और तीसरी पीढ़ी 1965-1971 में एकीकृत परिपथ पर आधारित रही।
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चौथी पीढ़ी 1971 में इंटेल 4004 से जुड़े माइक्रोप्रोसेसर युग से पढ़ी जाती है, जहाँ डिजिटल लॉजिक चिप-आधारित नियंत्रण में सघन हुआ।
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CPU सामान्य उद्देश्य का निर्देश-निष्पादन केंद्र है, GPU समानांतर गणना के लिए अनुकूल है और TPU कृत्रिम बुद्धिमत्ता के टेन्सर संचालन के लिए विशेष हार्डवेयर है।
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संख्या प्रणाली को परीक्षा में कैसे पढ़ना चाहिए?
संख्या प्रणाली को परीक्षा में कंप्यूटर के अंदर सूचना-निरूपण की भाषा की तरह पढ़ना चाहिए, क्योंकि इसी से द्विआधारी आधार, बिट, बाइट, मेमोरी माप, हेक्साडेसिमल लेखन और डिजिटल लॉजिक की समझ बनती है। RSSB सीनियर कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर के लिए संख्या प्रणाली को शोध-विषय की तरह नहीं, बल्कि कंप्यूटर के अंदर सूचना-निरूपण की भाषा की तरह पढ़ना चाहिए। सबसे स्पष्ट बिंदु यह है कि कंप्यूटर का मूल आधार द्विआधारी प्रणाली है। इसका अर्थ है कि मशीन-स्तर पर सूचना को दो अवस्थाओं में समझा जाता है। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ स्टैंडर्ड्स एंड टेक्नोलॉजी की साइबर सुरक्षा शब्दावली बिट को 0 या 1 मान वाली द्विआधारी संख्या के रूप में परिभाषित करती है। यही आधार आगे बिट, बाइट, मेमोरी माप और हेक्साडेसिमल लेखन तक जाता है। प्रश्न सामान्यतः परिभाषा, इकाई-संबंध और प्रतीक-समूह पर टिके होते हैं।
इस विषय की तैयारी में दशमलव, द्विआधारी और हेक्साडेसिमल को अलग-अलग खांचे में रखें। दशमलव प्रणाली मानव गणना में सामान्य है, पर कंप्यूटर की मूल गणना द्विआधारी रूप में चलती है। हेक्साडेसिमल इसलिए उपयोगी है क्योंकि लंबे बिट-समूहों को संक्षिप्त और व्यवस्थित रूप में लिखा जा सकता है। भर्ती परीक्षा के लिए पहले इन्हीं आधारों को स्थिर करना जरूरी है, क्योंकि आगे का डिजिटल लॉजिक इन्हीं अवस्थाओं और समूहों पर टिकता है।
याद रखें: परीक्षा में सबसे पहले यह पहचानना है कि कौन-सी प्रणाली मशीन-आधार है और कौन-सी प्रणाली लिखने-पढ़ने की सुविधा देती है। यदि प्रश्न में “कंप्यूटर का आधार” पूछा जाए, तो उत्तर द्विआधारी प्रणाली की ओर जाएगा; यदि लंबे बिट समूहों को छोटा लिखने की बात आए, तो हेक्साडेसिमल को याद करें।
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