मुख्य तथ्य

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 ने भारत में इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख, डिजिटल हस्ताक्षर, साइबर अपराध और ई-कॉमर्स को वैधानिक आधार दिया।
  • डिजिटल इंडिया कार्यक्रम 1 जुलाई 2015 को शुरू हुआ; इसका लक्ष्य डिजिटल अवसंरचना, डिजिटल सेवाएं और नागरिकों की डिजिटल साक्षरता को मजबूत करना है।
  • ई-मित्र राजस्थान की प्रमुख G2C सेवा व्यवस्था है, जिसके माध्यम से प्रमाण-पत्र, बिल भुगतान, आवेदन और कई सरकारी सेवाएं कियोस्क तथा ऑनलाइन माध्यम से दी जा...

मुख्य बिंदु

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    सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 ने भारत में इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख, डिजिटल हस्ताक्षर, साइबर अपराध और ई-कॉमर्स को वैधानिक आधार दिया।

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    डिजिटल इंडिया कार्यक्रम 1 जुलाई 2015 को शुरू हुआ; इसका लक्ष्य डिजिटल अवसंरचना, डिजिटल सेवाएं और नागरिकों की डिजिटल साक्षरता को मजबूत करना है।

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    ई-मित्र राजस्थान की प्रमुख G2C सेवा व्यवस्था है, जिसके माध्यम से प्रमाण-पत्र, बिल भुगतान, आवेदन और कई सरकारी सेवाएं कियोस्क तथा ऑनलाइन माध्यम से दी जाती हैं।

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    राजस्थान SSO पोर्टल एकल लॉगिन की व्यवस्था देता है, जिससे नागरिक, विद्यार्थी, कर्मचारी और व्यवसायी अनेक सरकारी सेवाओं तक एक खाते से पहुंच सकते हैं।

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    जन आधार राजस्थान में परिवार और व्यक्ति आधारित पहचान तथा लाभ-हस्तांतरण की मुख्य व्यवस्था है; यह पहले की भामाशाह व्यवस्था के अनुभव पर आगे बढ़ी।

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    राजस्थान संपर्क नागरिक शिकायत निवारण का पोर्टल और कॉल-सेंटर आधारित तंत्र है, जिसमें शिकायत दर्ज, ट्रैक और विभागीय स्तर पर निस्तारित की जाती है।

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    डिजिलॉकर डिजिटल दस्तावेजों की वैध इलेक्ट्रॉनिक उपलब्धता देता है; जारीकर्ता विभाग सीधे प्रमाणित दस्तावेज नागरिक के खाते में उपलब्ध करा सकते हैं।

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    यूपीआई भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम की वास्तविक-समय भुगतान प्रणाली है, जिसने मोबाइल आधारित छोटे और त्वरित डिजिटल भुगतान को व्यापक बनाया।

ई-गवर्नेंस क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?

ई-गवर्नेंस शासन, सेवा वितरण, प्रशासनिक निर्णय और नागरिक संवाद में सूचना तथा संचार प्रौद्योगिकी का ऐसा व्यवस्थित उपयोग है जिसका उद्देश्य सेवा को तेज, पारदर्शी, जवाबदेह और अधिक पहुंच योग्य बनाना है। ई-गवर्नेंस का अर्थ केवल सरकारी फ़ॉर्म को ऑनलाइन करना नहीं है, बल्कि सेवा की गति, पारदर्शिता, जवाबदेही और पहुंच बढ़ाना है। भर्ती परीक्षाओं में ई-गवर्नेंस से जुड़े प्रश्न सामान्यतः परिभाषा, मॉडल, पोर्टल, विधिक आधार, साइबर सुरक्षा और नागरिक सेवाओं के उदाहरणों से बनते हैं। इसलिए उम्मीदवार को तकनीकी शब्द याद करने के साथ यह भी समझना चाहिए कि किस व्यवस्था का उपयोग किस प्रशासनिक काम में होता है। जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान की जनसंख्या 6,85,48,437 थी, इसलिए इतने बड़े राज्य में डिजिटल सेवा-प्रवेश प्रशासनिक सुविधा नहीं, शासन की व्यावहारिक जरूरत है।

ई-गवर्नेंस के मुख्य लाभों में समय और लागत की बचत, भ्रष्टाचार की संभावना में कमी, रिकॉर्ड का डिजिटल संरक्षण, सेवा की ट्रैकिंग और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच शामिल हैं। राजस्थान जैसे बड़े राज्य में यह विशेष महत्व रखता है क्योंकि नागरिक सेवाएं तहसील, पंचायत, नगर निकाय, विद्यालय, अस्पताल और विभागीय कार्यालयों तक फैली हैं। ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल भुगतान, इलेक्ट्रॉनिक प्रमाण-पत्र और शिकायत-निवारण से शासन अधिक मापनीय बनता है। इसका एक परीक्षा-उपयोगी अर्थ यह भी है कि सेवा कब मांगी गई, किस अधिकारी के पास गई, किस स्तर पर लंबित है और कब निस्तारित हुई, इसका डिजिटल रिकॉर्ड बनाया जा सकता है।

सार यह है कि ई-गवर्नेंस प्रशासन को कागज-आधारित कार्यालय से सेवा-केंद्रित डिजिटल व्यवस्था की ओर ले जाने की प्रक्रिया है।

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