डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली और SQL
मुख्य तथ्य
- 1970 में ई. एफ. कॉड ने रिलेशनल मॉडल प्रस्तुत किया; इसी से तालिका, रिलेशन, ट्यूपल और कुंजी आधारित DBMS की आधुनिक नींव बनी।
- 1975 में ANSI/SPARC संरचना ने बाहरी, वैचारिक और आंतरिक स्कीमा स्तर बताए; डेटा अमूर्तन समझने का यह मानक ढाँचा बना।
- 1976 में पीटर चेन ने एंटिटी-रिलेशनशिप मॉडल को व्यवस्थित रूप दिया;
- 1977 में Oracle Corporation, जिसका पहला नाम Software Development Laboratories था, स्थापित हुई और बाद में प्रमुख व्यावसायिक SQL डेटाबेस विक्रेता बनी।
- 1983 में थियो हार्डर और एंड्रियास रॉयटर के शोध से ACID गुणों की मानक चर्चा लोकप्रिय हुई;
मुख्य बिंदु
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1970 में ई. एफ. कॉड ने रिलेशनल मॉडल प्रस्तुत किया; इसी से तालिका, रिलेशन, ट्यूपल और कुंजी आधारित DBMS की आधुनिक नींव बनी।
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1975 में ANSI/SPARC संरचना ने बाहरी, वैचारिक और आंतरिक स्कीमा स्तर बताए; डेटा अमूर्तन समझने का यह मानक ढाँचा बना।
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1976 में पीटर चेन ने एंटिटी-रिलेशनशिप मॉडल को व्यवस्थित रूप दिया; डेटाबेस डिज़ाइन में एंटिटी, एट्रिब्यूट और रिलेशनशिप को चित्रात्मक ढंग से दिखाने की पद्धति मजबूत हुई।
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1977 में Oracle Corporation, जिसका पहला नाम Software Development Laboratories था, स्थापित हुई और बाद में प्रमुख व्यावसायिक SQL डेटाबेस विक्रेता बनी।
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1983 में थियो हार्डर और एंड्रियास रॉयटर के शोध से ACID गुणों की मानक चर्चा लोकप्रिय हुई; लेन-देन की विश्वसनीयता को परमाणुता, संगति, पृथक्करण और स्थायित्व से समझा जाता है।
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1986 में ANSI ने SQL को मानक के रूप में अपनाया; इससे DBMS में डेटा परिभाषा, डेटा परिवर्तन और क्वेरी लिखने की साझा भाषा बनी।
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1987 में ISO ने SQL मानक को स्वीकार किया; इसलिए SQL केवल किसी एक कंपनी की भाषा नहीं रही, बल्कि अंतरराष्ट्रीय डेटाबेस मानक का आधार बनी।
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1992 का SQL-92 मानक चयन, जॉइन, उपक्वेरी, व्यू और अखंडता नियमों के कारण वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं में सबसे अधिक संदर्भित SQL संस्करणों में गिना जाता है।
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DBMS डेटा को सुरक्षित और स्वतंत्र कैसे बनाता है?
DBMS डेटा को एक नियंत्रित डेटाबेस में रखकर उसे व्यवस्थित, खोजने योग्य, साझा, सुरक्षित और अनुप्रयोगों से अपेक्षाकृत स्वतंत्र बनाता है। डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली यानी DBMS ऐसा सॉफ़्टवेयर है जो डेटा को व्यवस्थित रूप से संग्रहित, खोजने योग्य, सुरक्षित और साझा बनाता है। फ़ाइल-आधारित प्रणाली में हर अनुप्रयोग अपनी फ़ाइल, अपना फ़ॉर्मेट और अपना नियंत्रण रखता है; इससे डेटा दोहराव, असंगति और सुरक्षा की समस्या बढ़ती है। DBMS इन समस्याओं को स्कीमा, क्वेरी भाषा, लेन-देन नियंत्रण और अधिकार प्रबंधन से कम करता है। स्कूल, भर्ती बोर्ड, बैंक, पुस्तकालय और ई-गवर्नेंस पोर्टल जैसे प्रयोगों में विद्यार्थी, परीक्षा, शुल्क, परिणाम और लॉग जैसे डेटा को अलग-अलग फ़ाइलों में बिखेरने के बजाय नियंत्रित डेटाबेस में रखना अधिक विश्वसनीय होता है। RPSC प्रोग्रामर पाठ्यक्रम के अनुसार पहले पेपर में डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली शामिल है और इसी पेपर में 100 प्रश्न होते हैं।
DBMS की एक प्रमुख अवधारणा डेटा स्वतंत्रता है। तार्किक डेटा स्वतंत्रता का अर्थ है कि बाहरी दृश्य या अनुप्रयोगों में कम बदलाव के साथ तार्किक स्कीमा बदला जा सके, जैसे नई कॉलम जोड़ना। भौतिक डेटा स्वतंत्रता का अर्थ है कि फ़ाइल संगठन, इंडेक्स या संग्रहण विधि बदलने पर अनुप्रयोग की क्वेरी न टूटे। तीन-स्तरीय संरचना में बाहरी स्तर उपयोगकर्ता-दृश्य, वैचारिक स्तर पूरे डेटाबेस का तार्किक ढाँचा और आंतरिक स्तर वास्तविक संग्रहण को दिखाता है।
याद रखने योग्य बात: DBMS का मूल लाभ केवल डेटा रखना नहीं, बल्कि डेटा को नियंत्रित, साझा, सुरक्षित और स्वतंत्र बनाना है।
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