मुख्य तथ्य

  • 1956 में बेंजामिन ब्लूम के वर्गीकरण ने शैक्षिक उद्देश्यों को संज्ञानात्मक स्तरों में रखा, जिससे कंप्यूटर शिक्षक को कमांड याद कराने से समस्या-समाधान और...
  • 2001 में एंडरसन और क्राथवोल ने ब्लूम वर्गीकरण को संशोधित किया, संज्ञाओं की जगह क्रिया-शब्द रखे और परियोजना-आधारित कंप्यूटर अधिगम के लिए "रचना" को शीर्...
  • 2005 के राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे ने निर्माणवादी और गतिविधि-आधारित अधिगम को बढ़ावा दिया, जो हाथ से प्रोग्रामिंग, सिमुलेशन और प्रयोगशाला-कार्य को आधार...
  • 2017 में दीक्षा को शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय डिजिटल अवसंरचना के रूप में शुरू किया गया, इसलिए विद्यालयों में आईसीटी एकीकरण और डिजिटल स...
  • 2020 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने विद्यालय स्तर से कोडिंग, संगणकीय सोच और प्रौद्योगिकी-सक्षम अधिगम पर जोर दिया।

मुख्य बिंदु

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    1956 में बेंजामिन ब्लूम के वर्गीकरण ने शैक्षिक उद्देश्यों को संज्ञानात्मक स्तरों में रखा, जिससे कंप्यूटर शिक्षक को कमांड याद कराने से समस्या-समाधान और मूल्यांकन तक स्पष्ट सीढ़ी मिलती है।

  2. 2

    2001 में एंडरसन और क्राथवोल ने ब्लूम वर्गीकरण को संशोधित किया, संज्ञाओं की जगह क्रिया-शब्द रखे और परियोजना-आधारित कंप्यूटर अधिगम के लिए "रचना" को शीर्ष स्तर पर रखा।

  3. 3

    2005 के राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे ने निर्माणवादी और गतिविधि-आधारित अधिगम को बढ़ावा दिया, जो हाथ से प्रोग्रामिंग, सिमुलेशन और प्रयोगशाला-कार्य को आधार देता है।

  4. 4

    2017 में दीक्षा को शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय डिजिटल अवसंरचना के रूप में शुरू किया गया, इसलिए विद्यालयों में आईसीटी एकीकरण और डिजिटल संसाधन-उपयोग में यह महत्वपूर्ण है।

  5. 5

    2020 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने विद्यालय स्तर से कोडिंग, संगणकीय सोच और प्रौद्योगिकी-सक्षम अधिगम पर जोर दिया।

  6. 6

    2021 में निपुण भारत बुनियादी साक्षरता और संख्याज्ञान के लिए शुरू हुआ; कंप्यूटर शिक्षक के लिए इसकी प्रासंगिकता उन्नत कोडिंग नहीं, बल्कि आयु-उपयुक्त आईसीटी सहायता है।

  7. 7

    2023 के राष्ट्रीय विद्यालयी शिक्षा पाठ्यचर्या ढांचे ने शिक्षण-शास्त्र को दक्षता-आधारित आकलन से जोड़ा, जिससे व्यावहारिक कार्य, पोर्टफोलियो और गठनात्मक जांच मजबूत होती हैं।

कंप्यूटर शिक्षा का असली उद्देश्य क्या है?

कंप्यूटर शिक्षा का असली उद्देश्य केवल प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर चलवाना नहीं, बल्कि डिजिटल साक्षरता, तार्किक सोच, समस्या-समाधान, एल्गोरिद्मिक दृष्टि, सुरक्षित इंटरनेट व्यवहार और उत्पादकता-कौशल विकसित करना है। शिक्षा मंत्रालय के 4 दिसंबर 2023 के लोकसभा उत्तर के अनुसार पी एम ई-विद्या पहल 17 मई 2020 को शुरू की गई, इसलिए कंप्यूटर शिक्षा को बहु-माध्यम डिजिटल सीखने से जोड़कर समझना जरूरी है। कंप्यूटर शिक्षा का लक्ष्य केवल सॉफ्टवेयर चलाना सिखाना नहीं है। इसका उद्देश्य डिजिटल साक्षरता, तार्किक सोच, समस्या-समाधान, एल्गोरिद्मिक दृष्टि, सुरक्षित इंटरनेट व्यवहार और उत्पादकता-कौशल विकसित करना है। वरिष्ठ कंप्यूटर अनुदेशक के स्तर पर प्रश्न अक्सर यह जांचते हैं कि शिक्षक कंप्यूटर को विषय और उपकरण, दोनों रूपों में समझता है या नहीं। विषय के रूप में इसमें हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, नेटवर्क, डेटाबेस, प्रोग्रामिंग और साइबर सुरक्षा आते हैं; उपकरण के रूप में कंप्यूटर प्रस्तुति, अभ्यास, मूल्यांकन, रिकॉर्ड-रखाव और संवाद में सहायक बनता है।

शिक्षण-दृष्टि में व्यवहारवादी, संज्ञानवादी और निर्माणवादी तीनों का उपयोग होता है। कीबोर्ड शॉर्टकट या कमांड अभ्यास में दोहराव और त्वरित प्रतिपुष्टि उपयोगी है; प्रोग्रामिंग में मानसिक मॉडल, उदाहरण और त्रुटि-सुधार जरूरी हैं; परियोजना-कार्य में विद्यार्थी स्वयं खोज, निर्माण और प्रस्तुति से सीखता है। राजस्थान के सरकारी विद्यालय में भी शिक्षक कम संसाधन होने पर जोड़ी-कार्य, समूह-कार्य और प्रदर्शन-पद्धति से लैब समय का उपयोग कर सकता है।

याद रखें: कंप्यूटर शिक्षक का मुख्य काम डिवाइस-चालन से आगे जाकर सोचने, बनाने और सुरक्षित उपयोग की आदत विकसित करना है।

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