मुख्य तथ्य

  • 1945 में जॉन वॉन न्यूमैन से जुड़े ईडीवीएसी प्रतिवेदन ने संग्रहित-प्रोग्राम कंप्यूटर की रूपरेखा दी;
  • 1980 में डेविड पैटरसन के नेतृत्व में बर्कले RISC कार्य शुरू हुआ; इसने सरल समान-लंबाई निर्देश, लोड-स्टोर डिजाइन और पाइपलाइनिंग को लोकप्रिय किया।
  • Intel द्वारा 1990 के दशक की शुरुआत में विकसित PCI निजी कंप्यूटरों में प्रोसेसर को तेज परिधीय डिवाइसों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण स्थानीय बस मानक बना।

मुख्य बिंदु

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    1945 में जॉन वॉन न्यूमैन से जुड़े ईडीवीएसी प्रतिवेदन ने संग्रहित-प्रोग्राम कंप्यूटर की रूपरेखा दी; इसी से निर्देश और डेटा को मुख्य स्मृति में रखने का आधुनिक विचार मजबूत हुआ।

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    CPU के मूल भाग ALU, नियंत्रण इकाई और रजिस्टर हैं; ALU गणना करता है, नियंत्रण इकाई संकेत देती है और रजिस्टर सबसे तेज अस्थायी भंडारण देते हैं।

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    निर्देश चक्र सामान्यतः निर्देश लाना, निर्देश समझना और निर्देश निष्पादित करना इन चरणों में पढ़ा जाता है; PC, IR, MAR और MDR की भूमिका सीधे पूछी जाती है।

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    कैश स्मृति CPU और मुख्य स्मृति के बीच तेज मध्य-भंडार की तरह काम करती है; संदर्भ-स्थानिकता और संदर्भ-कालिकता इसकी उपयोगिता का आधार हैं।

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    पाइपलाइनिंग में कई निर्देश अलग-अलग चरणों में साथ-साथ आगे बढ़ते हैं; संरचनात्मक, डेटा और नियंत्रण हैजार्ड इसकी प्रमुख बाधाएँ हैं।

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    1980 में डेविड पैटरसन के नेतृत्व में बर्कले RISC कार्य शुरू हुआ; इसने सरल समान-लंबाई निर्देश, लोड-स्टोर डिजाइन और पाइपलाइनिंग को लोकप्रिय किया।

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    Intel द्वारा 1990 के दशक की शुरुआत में विकसित PCI निजी कंप्यूटरों में प्रोसेसर को तेज परिधीय डिवाइसों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण स्थानीय बस मानक बना।

वॉन न्यूमैन मॉडल और संग्रहित-प्रोग्राम विचार क्या है?

वॉन न्यूमैन मॉडल वह कंप्यूटर ढांचा है जिसमें निर्देश और डेटा दोनों मुख्य स्मृति में रखे जाते हैं और CPU उन्हें क्रम से लाकर, समझकर और चलाकर काम करता है। कंप्यूटर आर्किटेक्चर में वॉन न्यूमैन मॉडल सबसे बुनियादी ढांचा है। इसमें CPU, मुख्य स्मृति, इनपुट, आउटपुट और इन्हें जोड़ने वाली बसों को एक संगठित प्रणाली के रूप में देखा जाता है। इसकी निर्णायक विशेषता संग्रहित-प्रोग्राम सिद्धांत है: निर्देश और डेटा दोनों स्मृति में रखे जाते हैं और CPU उन्हें क्रम से पढ़कर कार्य करता है। कंप्यूटर हिस्ट्री म्यूज़ियम की समयरेखा के अनुसार जून 1945 में जॉन वॉन न्यूमैन के EDVAC प्रतिवेदन ने संग्रहित-प्रोग्राम कंप्यूटर की रूपरेखा सामने रखी। 1945 में जॉन वॉन न्यूमैन से जुड़े EDVAC प्रतिवेदन ने इस विचार को व्यवस्थित रूप दिया। इससे पहले कई मशीनों में प्रोग्राम बदलना तारों और स्विचों के स्तर पर कठिन काम था; संग्रहित-प्रोग्राम पद्धति ने प्रोग्राम को भी डेटा की तरह स्मृति में रखने की सुविधा दी।

इस मॉडल में CPU सामान्यतः एक समय पर एक निर्देश स्मृति से लाता है, उसे समझता है और फिर निष्पादित करता है। प्रोग्राम काउंटर अगले निर्देश का पता रखता है, जबकि मुख्य स्मृति में निर्देशों और डेटा का साझा स्थान होता है। इसी साझा मार्ग के कारण वॉन न्यूमैन अवरोध बन सकता है, क्योंकि निर्देश और डेटा दोनों के लिए स्मृति-बस पर प्रतिस्पर्धा होती है। हार्वर्ड आर्किटेक्चर में निर्देश स्मृति और डेटा स्मृति अलग रखी जाती हैं; इसलिए कुछ माइक्रोकंट्रोलर और डिजिटल सिग्नल प्रोसेसर में उसका उपयोग मिलता है। RSSB जैसी वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं में वॉन न्यूमैन और हार्वर्ड मॉडल का अंतर सीधे तथ्यात्मक प्रश्न के रूप में आता है।

सार यही है: वॉन न्यूमैन मॉडल में स्मृति में रखा प्रोग्राम आधुनिक सामान्य-उद्देश्य कंप्यूटर का केंद्रीय विचार है।

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