प्रशिक्षक (शारीरिक शिक्षा संवर्ग)
मुख्य तथ्य
- प्रशिक्षक पेपर I साझा सामान्य पेपर है; राजस्थान और भारत इतिहास, तर्कशक्ति, माध्यमिक गणित-सांख्यिकी, भाषा-योग्यता, समसामयिकी, विज्ञान, राजव्यवस्था और र…
- पेपर II रैंक बनाने वाला पेपर है, क्योंकि इसमें शारीरिक शिक्षा के आधार, खेल विज्ञान, प्रशिक्षण सिद्धांत और चुने हुए खेल की विशेषज्ञता एक साथ आती है।
- शारीरिक शिक्षा केवल ड्रिल या खेल नहीं है; यह गतिविधि के माध्यम से स्वास्थ्य शिक्षा, मनोरंजन, सामाजिक विकास, गति-अधिगम और मूल्य-निर्माण तक जाती है।
- जैविक, मनोवैज्ञानिक, समाजशास्त्रीय और दार्शनिक आधार बताते हैं कि एक ही प्रशिक्षण योजना हर आयु, शरीर-प्रकार, प्रेरणा-स्तर और सामाजिक परिस्थिति पर लागू…
- वार्म-अप मांसपेशियों, जोड़ों, रक्त-संचार और ध्यान को काम के लिए तैयार करता है; लिम्बरिंग डाउन रिकवरी और जकड़न घटाने में मदद करता है।
मुख्य बिंदु
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प्रशिक्षक पेपर I साझा सामान्य पेपर है; राजस्थान और भारत इतिहास, तर्कशक्ति, माध्यमिक गणित-सांख्यिकी, भाषा-योग्यता, समसामयिकी, विज्ञान, राजव्यवस्था और राजस्थान भूगोल को साथ पढ़ना चाहिए।
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पेपर II रैंक बनाने वाला पेपर है, क्योंकि इसमें शारीरिक शिक्षा के आधार, खेल विज्ञान, प्रशिक्षण सिद्धांत और चुने हुए खेल की विशेषज्ञता एक साथ आती है।
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शारीरिक शिक्षा केवल ड्रिल या खेल नहीं है; यह गतिविधि के माध्यम से स्वास्थ्य शिक्षा, मनोरंजन, सामाजिक विकास, गति-अधिगम और मूल्य-निर्माण तक जाती है।
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जैविक, मनोवैज्ञानिक, समाजशास्त्रीय और दार्शनिक आधार बताते हैं कि एक ही प्रशिक्षण योजना हर आयु, शरीर-प्रकार, प्रेरणा-स्तर और सामाजिक परिस्थिति पर लागू नहीं हो सकती।
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वार्म-अप मांसपेशियों, जोड़ों, रक्त-संचार और ध्यान को काम के लिए तैयार करता है; लिम्बरिंग डाउन रिकवरी और जकड़न घटाने में मदद करता है।
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न्यूटन के नियम, उत्तोलक, बल, गुरुत्व-केंद्र और संतुलन स्प्रिंट स्टार्ट, कूद, फेंक, आसन और कौशल-सुधार को समझाने के व्यावहारिक उपकरण हैं।
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खेल-शरीरक्रिया तंत्रिका-पेशीय नियंत्रण, श्वसन, परिसंचरण, एटीपी-पीसी, एनएरोबिक ग्लाइकोलाइसिस और एरोबिक चयापचय को स्पर्धा-आवश्यकता और रिकवरी से जोड़ती है।
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डोपिंग नियम-उल्लंघन के साथ खिलाड़ी-सुरक्षा का विषय भी है; प्रशिक्षक को प्रतिबंधित पदार्थ, परीक्षण-जिम्मेदारी और अप्रमाणित सप्लीमेंट के जोखिम समझाने चाहिए।
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प्रशिक्षण भार तभी उपयोगी है जब उसके बाद अनुकूलन और रिकवरी हो; अनियंत्रित भार थकान, चोट और प्रदर्शन-रुकावट पैदा करता है।
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काल-विभाजन तैयारी को दीर्घ, मध्यम और लघु चक्रों में बाँटता है ताकि फिटनेस, तकनीक, रणनीति और प्रतियोगिता-तैयारी सही समय पर शिखर पर पहुँचे।
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प्रतिभा पहचान में मानवमिति, गतिशील फिटनेस, कौशल सीखने की गति, मनोवैज्ञानिक गुण, चिकित्सकीय फिटनेस और दीर्घकालीन प्रशिक्षित होने की क्षमता साथ देखनी चाहिए।
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एथलेटिक्स में प्रशिक्षक को विश्व एथलेटिक्स के वर्तमान नियम, 400 मीटर मानक ट्रैक, लेन नियम, उपकरण, निर्णयन व्यवस्था और भारतीय प्रतियोगिता-मार्ग जानने चाहिए।
प्रशिक्षक परीक्षा में पेपर प्रथम सामान्य अध्ययन को कैसे पढ़ना चाहिए?
प्रशिक्षक परीक्षा में पेपर प्रथम सामान्य अध्ययन को खेल-विषय से अलग छोड़ा जाने वाला भाग नहीं, बल्कि इतिहास, तर्कशक्ति, भाषा, विज्ञान, राजव्यवस्था और राजस्थान भूगोल से अंक दिलाने वाला साझा आधार मानकर पढ़ना चाहिए। विद्यालय शिक्षा परीक्षा में प्रशिक्षक संवर्ग को केवल खेल-विषय का पेपर मानकर नहीं पढ़ना चाहिए। यह दो-पेपर वाली परीक्षा है। पेपर प्रथम प्रशिक्षक पद के लिए सामान्य ज्ञान और सामान्य अध्ययन का साझा आधार है। इसमें राजस्थान और भारत का इतिहास, भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन पर विशेष बल, मानसिक योग्यता, माध्यमिक स्तर की सांख्यिकी और गणित, हिंदी और अंग्रेजी भाषा-योग्यता, समसामयिक घटनाएँ, सामान्य विज्ञान, भारतीय राजव्यवस्था और राजस्थान का भूगोल आते हैं। आरपीएससी के प्रशिक्षक पेपर प्रथम पाठ्यक्रम के अनुसार आधिकारिक योजना में पेपर प्रथम में ७५ प्रश्न, १५० अंक, १ घंटा ३० मिनट का समय और प्रत्येक गलत उत्तर पर एक-तिहाई ऋणात्मक अंकन है। इसलिए यह पेपर तेज गति, सही चयन और अनावश्यक जोखिम से बचने की मांग करता है। प्रशिक्षक अभ्यर्थी इसे अंत में छोड़ने की गलती नहीं कर सकता, क्योंकि विषय-पेपर से पहले यही बड़ा स्कोरिंग आधार देता है।
इतिहास की तैयारी दो धाराओं में करनी चाहिए। भारतीय इतिहास में १८५७ का विद्रोह, १८५८ से १९१९ तक राष्ट्रीयता का विकास, १९१९ से १९४२ तक जन-आंदोलन, क्रांतिकारी गतिविधियाँ, स्वतंत्रता और विभाजन, सामाजिक-धार्मिक नवजागरण तथा गांधी, नेहरू, पटेल, आजाद और अंबेडकर जैसे प्रमुख नेता शामिल हैं। राजस्थान इतिहास में कालीबंगा, आहड़, गणेश्वर और बैराठ जैसी प्राचीन सांस्कृतिक स्थलों से शुरू कर गुर्जर-प्रतिहार, चौहान, मेवाड़, रणथंभौर, जालौर, राजस्थान-मुगल संबंध, राणा सांगा, महाराणा प्रताप, आमेर के मान सिंह, चंद्रसेन, बीकानेर के राय सिंह और मेवाड़ के राज सिंह तक क्रम बनाना चाहिए। राजस्थान के स्वतंत्रता संघर्ष में १८५७, राजनीतिक जागरण, प्रजामंडल आंदोलन, किसान आंदोलन, जनजातीय आंदोलन और राजस्थान एकीकरण जरूरी हैं। समाज और संस्कृति में लोकदेवता, संत, स्थापत्य, दुर्ग, मंदिर, चित्रकला, मेले, त्योहार, रीति-रिवाज, वेशभूषा, आभूषण, लोकसंगीत, लोकनृत्य, भाषा और साहित्य को छोटे-छोटे पुनरावृत्ति-समूहों में पढ़ना उपयोगी है।
तर्कशक्ति वाला भाग छोटा है, पर अंक दिलाने वाला है। समानता, श्रेणी-पूर्णता, कूटलेखन-कूटवाचन, रक्त-संबंध और तार्किक वेन आरेख को समयबद्ध सेटों से अभ्यास करना चाहिए, क्योंकि यहाँ कठिनाई सिद्धांत में नहीं बल्कि जल्दबाजी में गलत विकल्प हटाने में होती है। माध्यमिक सांख्यिकी में आंकड़ों का संकलन, प्रस्तुतीकरण, आलेखीय निरूपण तथा वर्गीकृत और अवर्गीकृत आंकड़ों के लिए माध्य, माध्यिका और बहुलक आते हैं। माध्यमिक गणित में संख्या पद्धति, वास्तविक संख्याएँ और दशमलव प्रसार, घातांक नियम, परिमेय संख्याएँ, बहुपद, शून्यों और गुणांकों का संबंध, विभाजन कलन-विधि, दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म और घनाभ, घन, बेलन, शंकु, गोला तथा ठोसों के संयोजन का क्षेत्रमिति भाग आता है। भाषा-योग्यता में अंग्रेजी के काल, काल-क्रम, कर्तृवाच्य-कर्मवाच्य, प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष कथन, उपपद, निर्धारक, पूर्वसर्ग, वाक्य-संशोधन, कर्ता-क्रिया सामंजस्य, विशेषण की अवस्थाएँ, संयोजक, राजकीय और तकनीकी शब्दावली, विलोम, पर्याय, उपसर्ग, प्रत्यय और भ्रम पैदा करने वाले शब्द पढ़े जाते हैं। सामान्य हिंदी को व्याकरण, शुद्धि, वाक्य-प्रयोग और प्रशासनिक शब्दावली के रूप में साधना चाहिए।
समसामयिक घटनाओं को राजस्थान, भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तरों में बाँटना ठीक रहता है। विकास कार्यक्रम, प्रमुख योजनाएँ, कौशल विकास, स्टार्टअप पहल, सामाजिक-आर्थिक संकेतक, महत्वपूर्ण व्यक्ति और स्थान, विज्ञान एवं पर्यावरण की घटनाएँ, पुरस्कार, पुस्तकें, लेखक, खेल और खिलाड़ी स्वाभाविक क्षेत्र हैं। सामान्य विज्ञान का प्रशिक्षक-विषय से सीधा संबंध भी बनता है: बल और गति के नियम, कार्य और ऊर्जा, विद्युत, ध्वनि, ऊतक, नियंत्रण और समन्वय, आनुवंशिकता, प्राकृतिक संसाधन, पर्यावरण, जैव-विविधता, सतत विकास और दैनिक जीवन में विज्ञान। राजव्यवस्था में भारत शासन अधिनियम १९३५, संविधान सभा, संविधान की विशेषताएँ, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद, संसद, उच्चतम न्यायालय, निर्वाचन आयोग, संघ लोक सेवा आयोग, पंचायतें, नगरपालिकाएँ और राष्ट्रीय आयोग शामिल हैं। राजस्थान भूगोल में स्थिति, विस्तार, आकृति, भौतिक प्रदेश, अपवाह, मृदा, वनस्पति, वन्यजीव, जलवायु, जनसंख्या, कृषि, पशुधन, खनिज, ऊर्जा, पर्यटन, परिवहन, उद्योग और व्यापार के तथ्य जोड़कर तैयारी पूरी होती है।
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