मानव शरीर, आहार एवं पोषण, स्वास्थ्य एवं रोग
मुख्य तथ्य
- कोशिकाएँ मिलकर ऊतक, ऊतक मिलकर अंग और तालमेल से काम करने वाले अंग मिलकर अंग-तंत्र बनाते हैं, जो शरीर का अंदरूनी संतुलन बनाए रखते हैं।
- पाचन जटिल भोजन को सोखे जा सकने वाले छोटे अंशों में बदलता है, जबकि अवशोषण मुख्यतः छोटी आँत के अंकुरों से होता है।
- कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा स्थूल पोषक हैं; विटामिन और खनिज कम मात्रा में ज़रूरी सूक्ष्म पोषक हैं।
- संतुलित आहार उम्र, गतिविधि और शारीरिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग खाद्य समूहों को उचित अनुपात में देता है।
- श्वसन और परिसंचरण तंत्र मिलकर ऊतकों तक ऑक्सीजन व पोषक पहुँचाते हैं और वहाँ से कार्बन डाइऑक्साइड हटाते हैं।
मुख्य बिंदु
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कोशिकाएँ मिलकर ऊतक, ऊतक मिलकर अंग और तालमेल से काम करने वाले अंग मिलकर अंग-तंत्र बनाते हैं, जो शरीर का अंदरूनी संतुलन बनाए रखते हैं।
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पाचन जटिल भोजन को सोखे जा सकने वाले छोटे अंशों में बदलता है, जबकि अवशोषण मुख्यतः छोटी आँत के अंकुरों से होता है।
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कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा स्थूल पोषक हैं; विटामिन और खनिज कम मात्रा में ज़रूरी सूक्ष्म पोषक हैं।
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संतुलित आहार उम्र, गतिविधि और शारीरिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग खाद्य समूहों को उचित अनुपात में देता है।
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श्वसन और परिसंचरण तंत्र मिलकर ऊतकों तक ऑक्सीजन व पोषक पहुँचाते हैं और वहाँ से कार्बन डाइऑक्साइड हटाते हैं।
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गुर्दे रक्त छानते हैं, नेफ्रॉन मूत्र बनाते हैं और पानी का संतुलन शरीर के अंदर स्थिर माहौल बनाए रखने में मदद करता है।
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तंत्रिका और अंतःस्रावी तंत्र तेज़ विद्युत संकेतों तथा अपेक्षाकृत धीमे रासायनिक संदेशों से शरीर के कामों का तालमेल कराते हैं।
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स्वास्थ्य में शारीरिक, मानसिक और सामाजिक ढंग से काम कर पाना शामिल है; रोग संक्रामक, असंक्रामक, तीव्र या दीर्घकालिक हो सकता है।
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संक्रामक रोग तय रास्तों से फैलते हैं, इसलिए बचाव को संक्रमण की कड़ी में उसी रास्ते को तोड़ना चाहिए।
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टीकाकरण व्यक्ति को पूरा प्राकृतिक रोग झेलाए बिना प्रतिरक्षा-स्मृति बनाने में मदद करता है।
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खाद्य सुरक्षा साफ़ हाथ, सुरक्षित पानी, कच्चे और पके भोजन को अलग रखने, ठीक से पकाने और ढककर रखने पर निर्भर है।
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आरपीएससी उप-निरीक्षक की तैयारी में बनावट को काम से, पोषक को कमी से और फैलने के रास्ते को बचाव से जोड़कर पढ़ें।
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पोषक की कमी, अधिकता और असंतुलन तीनों नुकसान कर सकते हैं; चिकित्सकीय ज़रूरत न हो तो पूरक विविध आहार की जगह नहीं लेते।
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मानव शरीर का संगठन और अंदरूनी संतुलन
- बुनियादी क्रम: मानव शरीर में कोशिकाएँ मिलकर ऊतक, ऊतक मिलकर अंग और अंग मिलकर अंग-तंत्र बनाते हैं। किसी एक स्तर की गड़बड़ी कई जुड़े कामों को प्रभावित कर सकती है।
- कोशिका काम की इकाई: कोशिका पदार्थ लेती है, अपशिष्ट बाहर करती है, ऊर्जा बदलती है और आसपास के बदलाव पर प्रतिक्रिया देती है। उसकी झिल्ली आवाजाही को नियंत्रित करती है।
- ऊतक की संकल्पना: मिलती-जुलती कोशिकाएँ और उनके बीच का पदार्थ साथ काम करें तो ऊतक बनता है। उपकला, संयोजी, पेशीय और तंत्रिका ऊतक की बनावट उनके काम के अनुसार अलग होती है।
- उपकला का काम: उपकला शरीर की सतह ढकती और गुहाओं, नलिकाओं तथा नलियों की अंदरूनी परत बनाती है। पास-पास लगी कोशिकाएँ सुरक्षा, अवशोषण, स्राव और नियंत्रित आदान-प्रदान कराती हैं।
- संयोजी ऊतक: रक्त, हड्डी, उपास्थि, कंडरा, स्नायु और ढीले संयोजी ऊतक इसी बड़े समूह में आते हैं। इनके काम अलग हैं, पर कोशिकाओं के बीच पर्याप्त पदार्थ इनकी साझा पहचान है।
- पेशीय ऊतक: पेशी कोशिकाएँ सिकुड़कर गति पैदा करती हैं। कंकाली पेशी इच्छा से हड्डियाँ चलाती है, चिकनी पेशी अंदरूनी अंगों में और हृदय पेशी लय में काम करती है।
- तंत्रिका ऊतक: तंत्रिका कोशिकाएँ संकेत लेती और भेजती हैं, जबकि सहायक कोशिकाएँ उनका माहौल ठीक रखती हैं। इससे ग्राही, मस्तिष्क या मेरुरज्जु और काम करने वाले अंग के बीच तेज़ तालमेल बनता है।
- अंग का सिद्धांत: किसी तय काम के लिए कई ऊतक व्यवस्थित होकर अंग बनाते हैं। आमाशय में परत, ग्रंथियाँ, पेशियाँ, तंत्रिकाएँ, रक्त वाहिकाएँ और सहायक ऊतक साथ काम करते हैं।
- अंग-तंत्रों का तालमेल: पाचन पोषक उपलब्ध कराता है, श्वसन ऑक्सीजन देता है, परिसंचरण दोनों को पहुँचाता है और उत्सर्जन चयापचयी अपशिष्ट हटाता है। कोई बड़ा तंत्र अकेला काम नहीं करता।
- अंदरूनी संतुलन: बाहरी बदलाव के बावजूद शरीर अंदर की स्थितियों को काम करने योग्य सीमा में रखता है। तापमान, पानी, रक्त-शर्करा और अम्ल-क्षार का नियंत्रण इसी गतिशील स्थिरता के उदाहरण हैं।
- फीडबैक नियंत्रण: बदलाव पहचाना जाता है, तालमेल केंद्र उसे ज़रूरी सीमा से मिलाता है और काम करने वाले अंग प्रतिक्रिया देते हैं। रोज़मर्रा का अधिकतर नियंत्रण शुरुआती बदलाव का विरोध करता है।
- त्वचा का व्यापक काम: त्वचा भौतिक रोक बनाती है, संवेदना के ग्राही रखती है और रक्त प्रवाह व पसीने के बदलाव से तापमान संभालती है। इसलिए चोट केवल दिखावट का मामला नहीं है।
- शरीर की गुहाएँ: खोपड़ी मस्तिष्क को, कशेरुक नाल मेरुरज्जु को, वक्ष गुहा हृदय व फेफड़ों को और उदर गुहा कई पाचन अंगों को जगह व सुरक्षा देती है।
- बनावट और काम: शरीर रचना बनावट व स्थान बताती है, जबकि शरीर क्रिया काम समझाती है। अच्छा उत्तर दोनों को जोड़ता है, जैसे पतली वायुकोष दीवार तेज़ गैस विनिमय में मदद करती है।
- दिशा का महत्व: धमनियाँ रक्त को हृदय से दूर और शिराएँ हृदय की ओर ले जाती हैं। यह पहचान दिशा पर है, ऑक्सीजन पर नहीं; फुफ्फुसीय वाहिकाओं से साफ़ होता है कि केवल ऑक्सीजन देखकर धमनी और शिरा की पहचान नहीं करनी चाहिए।
- परीक्षा में उपयोग: किसी रचना का स्तर, मुख्य काम और अंग-तंत्र से संबंध पहचानें। यह तरीका केवल रटी हुई पंक्ति पर निर्भर हुए बिना मिलते-जुलते विकल्प अलग करता है।
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