प्रारम्भिक गणितीय एवं सांख्यिकीय विश्लेषण
मुख्य तथ्य
- प्रतिशत निकालने से पहले आधार राशि तय करें; प्रतिशत परिवर्तन में हर बार मूल मान ही हर में आता है।
- लगातार प्रतिशत परिवर्तनों में गुणक आपस में गुणा होते हैं, इसलिए समान वृद्धि और कमी एक-दूसरे को रद्द नहीं करतीं।
- साधारण ब्याज मूलधन पर निकलता है, जबकि चक्रवृद्धि ब्याज में हर रूपांतरण अवधि के बाद बनी राशि नया आधार होती है।
- बारंबारता सारणी कच्चे डेटा को संक्षिप्त करती है; सभी बारंबारताओं का योग कुल प्रेक्षणों के बराबर होना चाहिए।
- सतत वर्ग-अंतरालों में सीमा पर आया मान बताई गई समावेशन रीति के अनुसार केवल एक वर्ग में रखा जाता है।
मुख्य बिंदु
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प्रतिशत निकालने से पहले आधार राशि तय करें; प्रतिशत परिवर्तन में हर बार मूल मान ही हर में आता है।
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लगातार प्रतिशत परिवर्तनों में गुणक आपस में गुणा होते हैं, इसलिए समान वृद्धि और कमी एक-दूसरे को रद्द नहीं करतीं।
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साधारण ब्याज मूलधन पर निकलता है, जबकि चक्रवृद्धि ब्याज में हर रूपांतरण अवधि के बाद बनी राशि नया आधार होती है।
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बारंबारता सारणी कच्चे डेटा को संक्षिप्त करती है; सभी बारंबारताओं का योग कुल प्रेक्षणों के बराबर होना चाहिए।
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सतत वर्ग-अंतरालों में सीमा पर आया मान बताई गई समावेशन रीति के अनुसार केवल एक वर्ग में रखा जाता है।
- 6
दंड आलेख अलग श्रेणियों की तुलना करता है, जबकि हिस्टोग्राम के आयत सटे रहते हैं क्योंकि संख्यात्मक वर्ग-अंतराल सतत होते हैं।
- 7
वृत्त-चित्र में किसी श्रेणी का केंद्रीय कोण उसके कुल हिस्से को 360 अंश से गुणा करके मिलता है।
- 8
माध्य हर प्रेक्षण का उपयोग करता है, माध्यिका क्रम पर और बहुलक बारंबारता पर निर्भर करता है।
- 9
परास केवल दो प्रेक्षणों से मिलता है; मानक विचलन सभी प्रेक्षणों का उपयोग करता है और डेटा की इकाई में रहता है।
- 10
भारित माध्य में वास्तविक भार या बारंबारता लगती है; उपसमूहों के माध्यों का साधारण औसत पर्याप्त नहीं है।
- 11
कुल योग, इकाइयाँ, पैमाने के निशान और हर की जाँच सारणी या आलेख की गलती पकड़ने का तेज़ तरीका है।
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परिमाण-क्रम का अनुमान उत्तर की संगति जाँचता है; जहाँ सटीक गणना माँगी गई हो वहाँ यह उसका स्थान नहीं लेता।
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संख्या-बोध, परिमाण-क्रम और भरोसेमंद गणना
संख्या को समझकर आगे बढ़ें
प्रारम्भिक विश्लेषण की पहली शर्त संख्या को ठीक पढ़ना है। प्राकृतिक संख्याएँ गिनती के काम आती हैं; पूर्ण संख्याओं में 0 भी शामिल होता है; पूर्णांक धनात्मक और ऋणात्मक दोनों दिशाओं में जाते हैं। जिस संख्या को p/q के रूप में लिखा जा सके, जहाँ p और q पूर्णांक हों तथा q का मान 0 न हो, वह परिमेय संख्या है। सांत दशमलव और बार-बार दोहराए जाने वाले दशमलव परिमेय होते हैं। जो दशमलव न समाप्त हो और न किसी क्रम में दोहराए, वह अपरिमेय होता है। परिमेय और अपरिमेय संख्याएँ मिलकर वास्तविक संख्याएँ बनाती हैं। सवाल हल करते समय तीन सावधानियाँ रखें: हर कभी 0 नहीं हो सकता, कोष्ठक के बाहर लगा ऋण-चिह्न भीतर के सभी चिह्न बदलता है, और भिन्न से भाग देने का अर्थ उसके व्युत्क्रम से गुणा करना है।
गणना का क्रम रखें: कोष्ठक, घात, फिर बाएँ से दाएँ भाग और गुणा, उसके बाद बाएँ से दाएँ जोड़ और घटाव। भाग और गुणा एक ही स्तर पर हों तो जो पहले आए उसे पहले करें। इसलिए 48 ÷ 6 × 2 का मान 16 है, 4 नहीं। भिन्नों में गुणा करने से पहले काटना उपयोगी है। जैसे (18/35) × (14/27) को घटाकर (2/5) × (2/3) = 4/15 बनाया जा सकता है। इससे समय और गलती दोनों घटते हैं।
परिमाण और अनुमान
परिमाण-क्रम किसी संख्या के मोटे आकार को बताता है। धनात्मक संख्या को a × 10^n के रूप में लिखें, जहाँ 1 ≤ a < 10 हो। 47,500 को 4.75 × 10^4 और 0.0062 को 6.2 × 10^-3 लिखा जाएगा। विकल्पों वाले सवाल में आवश्यक स्तर तक सन्निकटन करें। 398 × 51 लगभग 400 × 50 = 20,000 है; इसलिए 2,000 या 200,000 के पास वाला विकल्प बिना लंबी गणना के हट जाता है। अनुमान लगाते समय चिह्न और दशमलव की जगह न बिगाड़ें।
भाज्यता की छोटी जाँचें याद रखें। 2 के लिए अंतिम अंक, 3 और 9 के लिए अंकों का योग, 4 के लिए अंतिम दो अंक, 8 के लिए अंतिम तीन अंक और 11 के लिए एकांतर अंकों के योग का अंतर देखें। अभाज्य गुणनखंडों से महत्तम समापवर्तक और लघुत्तम समापवर्त्य मिलते हैं। दो धनात्मक पूर्णांकों a और b के लिए म.स. × ल.स. = a × b होता है। इस संबंध को बिना जाँच तीन संख्याओं पर लागू न करें। अंतिम उत्तर पर तीन सवाल करें: चिह्न उचित है या नहीं, इकाई सही है या नहीं, और मान अनुमान के पास है या नहीं।
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