मुख्य तथ्य

  • दी गई बातों, उन्हें जोड़ने वाले नियम और जाँचे जाने वाले निष्कर्ष को अलग-अलग पहचानें।
  • निगमन में निष्कर्ष तभी अनिवार्य होता है जब आधार-कथन सत्य हों और तर्क का रूप सही हो।
  • आगमन से मिला पैटर्न संभावित नियम बताता है; उसे आगे बढ़ाने से पहले हर दिखाई देने वाले पद पर जाँचें।
  • सादृश्य में पहले जोड़ी का संबंध साफ़ शब्दों में पहचानें, फिर वही संबंध दूसरी जोड़ी पर लगाएँ।
  • वर्गीकरण में कई कमजोर समानताओं के बजाय एक निर्णायक साझा गुण चुनें।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    दी गई बातों, उन्हें जोड़ने वाले नियम और जाँचे जाने वाले निष्कर्ष को अलग-अलग पहचानें।

  2. 2

    निगमन में निष्कर्ष तभी अनिवार्य होता है जब आधार-कथन सत्य हों और तर्क का रूप सही हो।

  3. 3

    आगमन से मिला पैटर्न संभावित नियम बताता है; उसे आगे बढ़ाने से पहले हर दिखाई देने वाले पद पर जाँचें।

  4. 4

    सादृश्य में पहले जोड़ी का संबंध साफ़ शब्दों में पहचानें, फिर वही संबंध दूसरी जोड़ी पर लगाएँ।

  5. 5

    वर्गीकरण में कई कमजोर समानताओं के बजाय एक निर्णायक साझा गुण चुनें।

  6. 6

    किसी शर्तयुक्त कथन का उलटा रूप मूल कथन से अपने-आप सिद्ध नहीं होता।

  7. 7

    एक मान्य खंडनकारी उदाहरण सार्वभौमिक दावे को गलत कर सकता है, पर कई अनुकूल उदाहरण उसे सार्वभौमिक रूप से सिद्ध नहीं करते।

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    शब्दों में दी गई शर्तों को छोटी तालिका, क्रम-रेखा, परिवार-रेखाचित्र या क्षेत्र-आरेख में बदलें।

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    श्रृंखला में प्रथम अंतर, द्वितीय अंतर, अनुपात, एकांतर स्थान और आपस में गुंथी उप-श्रृंखलाएँ जाँचें।

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    कूट प्रश्नों में एक से अधिक उदाहरणों से क्रिया पहचानें और देखें कि स्थान, उलटा क्रम या समूह बनाना मायने रखता है या नहीं।

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    संबंध और व्यवस्था के प्रश्नों में पहले केवल निश्चित बातें लिखें तथा संभावित बातों को अलग रखें।

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    विकल्प-छँटाई तभी भरोसेमंद है जब हर हटाए गए विकल्प का कारण प्रश्न की किसी साफ़ शर्त से जुड़ा हो।

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    अंतिम जाँच में दिशा, निषेध, केवल-एक की शर्त, सीमा-स्थिति और अनिवार्य या संभावित पूछे जाने का अंतर देखें।

नियमबद्ध तरीके के रूप में तर्क

तर्क क्या करता है

तर्क दी गई जानकारी को उचित निर्णय में बदलता है। वस्तुनिष्ठ प्रश्न में जानकारी कथनों, संख्याओं, अक्षरों, चिन्हों, स्थानों, पारिवारिक संबंधों या शर्तों के रूप में आ सकती है। हल करने वाले का काम इनके आसपास अपनी कहानी बनाना नहीं है। उसे दी गई बात पहचाननी है, उसके लिए सही रूप चुनना है, केवल मान्य संबंध लगाना है और तय करना है कि कौन-सा विकल्प निकलता है। एक उपयोगी क्रम है: जानकारी → नियम → निष्कर्ष → जाँच। जानकारी प्रश्न में साफ़ लिखे तथ्य हैं। नियम कभी सीधे दिया होता है, जैसे “प, फ से बड़ा है”; कभी संख्याओं में दोहराई जा रही क्रिया से पहचानना पड़ता है। निष्कर्ष वह नई बात है जो जानकारी और नियम से मिलती है। जाँच में देखा जाता है कि वह बात अनिवार्य है, केवल संभव है या असंभव।

तथ्य, पूर्वधारणा और निष्कर्ष

इन तीनों को अलग रखें। तथ्य सीधे लिखा होता है। पूर्वधारणा वह बिना लिखी बात है जिसे मन अपनी ओर से जोड़ना चाहता है। निष्कर्ष उतना ही है जितना तर्क सचमुच सिद्ध करता है। मान लें, प्रश्न कहता है, “एक इकाई के हर आरक्षी ने सुरक्षा अभ्यास पूरा किया; मीरा उसी इकाई में आरक्षी है।” इससे “मीरा ने सुरक्षा अभ्यास पूरा किया” निकलता है। अभ्यास कब हुआ, मीरा का प्रदर्शन कैसा रहा या बाहर के लोग आए या नहीं—इनमें से कुछ नहीं बताया गया। ये बातें संभव लग सकती हैं, पर आधार-कथनों से नहीं निकलतीं। वस्तुनिष्ठ तर्क में यही संयम अंक बचाता है।

सही रूप चुनना

अलग बनावट के लिए अलग कामकाजी रूप चुनें। पदक्रम के लिए ऊपर-नीचे सूची, क्रम के लिए सीधी रेखा, दिशा के लिए तीर, संबंध के लिए छोटा परिवार-रेखाचित्र, कई व्यक्तियों की शर्तों के लिए जालिका और वर्गों के मेल के लिए वृत्त या क्षेत्र बनाएँ। श्रृंखला में पदों के नीचे स्थान-संख्या लिखकर पास-पास के बदलाव निकालें। कूट में मूल और बदले रूप को एक सीध में रखें। सही रूप याददाश्त पर दबाव घटाता है और विरोध जल्दी दिखाता है। चित्र उतना ही बनाएँ जितना शर्तें सँभालने के लिए ज़रूरी हो; सजावटी चित्र उलटे गलती बढ़ाते हैं।

हल करने का स्थिर क्रम

1. पहले माँग बताने वाला शब्द पढ़ें: अनिवार्य, संभव, असंभव, अगला, अलग या समान संबंध।

2. हर निश्चित और हर निषेध वाली शर्त को चिन्हित करें।

3. जानकारी को सबसे छोटे उपयोगी रूप में लिखें।

4. विकल्प देखने से पहले निश्चित परिणाम निकालें।

5. यदि कई व्यवस्थाएँ संभव हों तो अपनी सुविधाजनक व्यवस्था को अकेली सही व्यवस्था न मानें।

6. चुने हुए उत्तर को सभी मूल शर्तों पर दोबारा जाँचें।

यह तरीका शाब्दिक, संख्यात्मक और स्थानिक तर्क—तीनों में काम आता है। गति स्थिर विधि से आती है, तार्किक जाँच छोड़ने से नहीं। परिचित बनावट देखकर जल्द दिया उत्तर तब गलत हो सकता है जब प्रश्न एक सीमा-शब्द बदल दे, क्रम उलट दे या अनिवार्य के बजाय संभावित परिणाम पूछे।

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