मुख्य तथ्य

  • उपग्रह प्रणाली में अंतरिक्ष खंड, भू-खंड और उपयोगकर्ता खंड होते हैं;
  • भूस्थिर कक्षा, भू-तुल्यकालिक कक्षा का वृत्ताकार और विषुवतीय विशेष रूप है; केवल समान आवर्तकाल होने से कक्षा भूस्थिर नहीं बनती।
  • प्रक्षेपण यान कक्षा तक पहुँचने के लिए आवश्यक वेग देता है, जबकि उपग्रह बाद में अभिविन्यास नियंत्रण, कक्षा बनाए रखने और मिशन संचालन का काम करता है।
  • संचार उपग्रह ट्रांसपोंडर से संकेत आगे भेजते हैं, नौवहन उपग्रह स्थिति और समय बताते हैं, तथा पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह परावर्तित या उत्सर्जित ऊर्जा मापते हैं...
  • नाविक प्रणाली भारत और उसके आसपास के प्राथमिक सेवा क्षेत्र में नागरिक उपयोग के लिए मानक स्थिति सेवा तथा अधिकृत उपयोग के लिए प्रतिबंधित सेवा देती है।

मुख्य बिंदु

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    उपग्रह प्रणाली में अंतरिक्ष खंड, भू-खंड और उपयोगकर्ता खंड होते हैं; अंतरिक्ष यान में मिशन का उपयोगी भार और उसे सहारा देने वाला मुख्य ढाँचा दोनों शामिल रहते हैं।

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    भूस्थिर कक्षा, भू-तुल्यकालिक कक्षा का वृत्ताकार और विषुवतीय विशेष रूप है; केवल समान आवर्तकाल होने से कक्षा भूस्थिर नहीं बनती।

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    प्रक्षेपण यान कक्षा तक पहुँचने के लिए आवश्यक वेग देता है, जबकि उपग्रह बाद में अभिविन्यास नियंत्रण, कक्षा बनाए रखने और मिशन संचालन का काम करता है।

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    संचार उपग्रह ट्रांसपोंडर से संकेत आगे भेजते हैं, नौवहन उपग्रह स्थिति और समय बताते हैं, तथा पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह परावर्तित या उत्सर्जित ऊर्जा मापते हैं।

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    नाविक प्रणाली भारत और उसके आसपास के प्राथमिक सेवा क्षेत्र में नागरिक उपयोग के लिए मानक स्थिति सेवा तथा अधिकृत उपयोग के लिए प्रतिबंधित सेवा देती है।

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    सुदूर संवेदन में विभेदन के कई रूप हैं—स्थानिक, वर्णक्रमीय, कालिक और रेडियोमितीय; एक को बेहतर करने पर दूसरे में समझौता करना पड़ सकता है।

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    नैनो-तकनीक आमतौर पर लगभग 1–100 नैनोमीटर पर पदार्थ के नियंत्रण से जुड़ी है, जहाँ सतह का प्रभाव और क्वांटम प्रभाव पदार्थ का व्यवहार बदल सकते हैं।

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    शून्य, एक और दो आयामी नैनो-पदार्थों का वर्गीकरण इस आधार पर होता है कि उनकी कितनी बाहरी दिशाएँ नैनो-पैमाने में हैं, परमाणुओं की संख्या के आधार पर नहीं।

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    ऊपर-से-नीचे निर्माण में बड़े पदार्थ को छोटा किया जाता है, जबकि नीचे-से-ऊपर निर्माण में परमाणुओं, अणुओं या छोटे घटकों से संरचना बनाई जाती है।

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    रक्षा प्रौद्योगिकी केवल अस्त्रों की सूची नहीं, बल्कि संवेदक, कमान तंत्र, प्रहार साधन, प्लेटफ़ॉर्म, सुरक्षा, रसद और प्रशिक्षित कर्मियों की संयुक्त व्यवस्था है।

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    रडार सक्रिय रेडियो-आवृत्ति संवेदक है; इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में विद्युतचुंबकीय वर्णक्रम से जुड़ा समर्थन, आक्रमण और सुरक्षा शामिल हैं।

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    बैलिस्टिक और क्रूज़ प्रक्षेपास्त्रों में मुख्य अंतर उड़ान का है: बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र शुरुआती त्वरण के बाद अधिकांश पथ बिना शक्ति के तय करता है, जबकि क्रूज़ प्रक्षेपास्त्र अधिकांश उड़ान में वायुगतिकीय सहारा और शक्ति पाता है।

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    रक्षा प्रयोगशाला, जोधपुर बहु-वर्णक्रमीय छद्मावरण, गुप्तता और छल तकनीक, मरुस्थलीय विज्ञान तथा नाभिकीय विकिरण प्रबंधन तकनीक पर काम करती है।

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    अंतरिक्ष, नैनो और रक्षा तकनीक का मेल छोटे संवेदकों, सुरक्षित संचार, नौवहन, उन्नत पदार्थों, निगरानी और स्वायत्त प्रणालियों में दिखाई देता है।

अंतरिक्ष प्रणालियाँ: उद्देश्य, खंड और अंतरिक्ष यान की बनावट

अंतरिक्ष प्रणाली किसे कहते हैं

अंतरिक्ष प्रणाली केवल पृथ्वी की परिक्रमा करता कोई पिंड नहीं है। यह तीन जुड़े खंडों की व्यवस्था है। अंतरिक्ष खंड में एक या अधिक उपग्रह होते हैं। भू-खंड में उपग्रह की स्थिति पर नज़र रखने वाले एंटेना, नियंत्रण केंद्र, डेटा संसाधन केंद्र और संचार संपर्क आते हैं। उपयोगकर्ता खंड में रिसीवर, टर्मिनल, मैप, चेतावनी व्यवस्था या ऐसे अन्य उपकरण होते हैं जो संकेत और डेटा को उपयोगी सेवा में बदलते हैं। नौवहन रिसीवर, टेलीविज़न टर्मिनल और आपदा प्रबंधन मैप अलग उत्पाद हैं, पर उनकी मूल व्यवस्था इन्हीं तीन खंडों पर टिकी है।

उपयोगी भार और मुख्य ढाँचा

उपग्रह का उपयोगी भार मिशन का असली काम करता है, जबकि उसका मुख्य ढाँचा उपयोगी भार को ऊर्जा, सही तापमान और सही दिशा देता है। कैमरा या चित्र बनाने वाला रडार पृथ्वी-अवलोकन का उपयोगी भार है; ट्रांसपोंडर संचार के लिए होता है; परमाणु घड़ी और संकेत जनित्र नौवहन में काम आते हैं। मुख्य ढाँचे में आमतौर पर संरचना, विद्युत शक्ति, ताप नियंत्रण, प्रणोदन, अभिविन्यास और कक्षा नियंत्रण, आंतरिक कंप्यूटिंग तथा दूरमिति, अनुवर्तन और आदेश व्यवस्था होती है। सौर पैनल प्रकाश में बिजली बनाते हैं, बैटरी छाया के समय आपूर्ति बनाए रखती है और ताप नियंत्रण उपकरणों को काम करने योग्य तापमान में रखते हैं। एंटेना मिशन डेटा और यान की स्थिति से जुड़ी सूचनाएँ भेजते तथा प्राप्त करते हैं। मरम्मत कठिन होने के कारण ज़रूरी प्रणालियों में अतिरिक्त व्यवस्था रखी जा सकती है।

अभिविन्यास और कक्षा अलग बातें हैं। कक्षा अंतरिक्ष यान के द्रव्यमान केंद्र का पथ है; अभिविन्यास बताता है कि यान का मुख किस दिशा में है। प्रतिक्रिया चक्र, छोटे प्रणोदक, घूर्णदर्शी, सूर्य संवेदक और तारा संवेदक मिलकर दिशा माप तथा सुधार सकते हैं। प्रणोदन से कक्षा बदली जाती है, निर्धारित स्थान बनाए रखा जाता है, टक्कर टाली जाती है या मिशन के अंत में सुरक्षित निपटान किया जाता है।

दूरमिति, अनुवर्तन और आदेश

दूरमिति वोल्टेज, तापमान और उप-प्रणाली की स्थिति जैसी स्वास्थ्य सूचना भेजती है। अनुवर्तन से स्थिति और वेग का अनुमान मिलता है। आदेश व्यवस्था नियंत्रण केंद्र से अधिकृत निर्देश उपग्रह तक पहुँचाती है। मिशन डेटा और स्वास्थ्य सूचना एक नहीं हैं: लिया गया चित्र उपयोगी भार का डेटा है, जबकि कैमरे का तापमान दूरमिति है। इसलिए सेवा केवल उपग्रह पर निर्भर नहीं रहती; रेडियो संपर्क, भू-नियंत्रण, डेटा संसाधन और उपयोगी अनुप्रयोग भी उतने ही ज़रूरी हैं।

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