मुख्य तथ्य

  • अनुच्छेद 324 संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव तथा मतदाता सूचियों का अधीक्षण निर्वाचन आयोग को देता है;
  • निर्वाचन आयुक्तों से जुड़े 2023 के कानून के अनुसार राष्ट्रपति तीन सदस्यीय चयन समिति की सिफारिश पर नियुक्ति करते हैं;
  • नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की नियुक्ति अनुच्छेद 148 के तहत होती है, 1971 के अधिनियम के अनुसार कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक है, और संघ तथा राज...
  • संघ लोक सेवा आयोग अनुच्छेद 315-323 के तहत संघ-स्तरीय लोक सेवा आयोग है; उसका मुख्य काम भर्ती परीक्षाएँ और परामर्श है, स्वयं नियुक्ति करना नहीं।
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत बना है और मानवाधिकार उल्लंघन या उसे रोकने में लोक सेवक की लापरवाही पर स्वप्रेरणा से...

मुख्य बिंदु

  1. 1

    निर्वाचन आयोग, नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक और संघ लोक सेवा आयोग संवैधानिक निकाय हैं; राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, केंद्रीय सतर्कता आयोग, केंद्रीय सूचना आयोग और लोकपाल संसद के कानूनों से बने सांविधिक निकाय हैं।

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    अनुच्छेद 324 संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव तथा मतदाता सूचियों का अधीक्षण निर्वाचन आयोग को देता है; स्थानीय निकायों के चुनाव इसके दायरे में नहीं आते।

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    निर्वाचन आयुक्तों से जुड़े 2023 के कानून के अनुसार राष्ट्रपति तीन सदस्यीय चयन समिति की सिफारिश पर नियुक्ति करते हैं; कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो पहले हो, तक है।

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    नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की नियुक्ति अनुच्छेद 148 के तहत होती है, 1971 के अधिनियम के अनुसार कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक है, और संघ तथा राज्य की लेखापरीक्षा रिपोर्ट क्रमशः राष्ट्रपति और राज्यपाल को दी जाती है।

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    संघ लोक सेवा आयोग अनुच्छेद 315-323 के तहत संघ-स्तरीय लोक सेवा आयोग है; उसका मुख्य काम भर्ती परीक्षाएँ और परामर्श है, स्वयं नियुक्ति करना नहीं।

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    राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत बना है और मानवाधिकार उल्लंघन या उसे रोकने में लोक सेवक की लापरवाही पर स्वप्रेरणा से अथवा याचिका पर जाँच कर सकता है।

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    केंद्रीय सतर्कता आयोग एक बहु-सदस्यीय सांविधिक निकाय है जिसमें केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और अधिकतम 2 सतर्कता आयुक्त होते हैं।

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    केंद्रीय सतर्कता आयोग तय भ्रष्टाचार-रोधी जाँच और सतर्कता प्रशासन का अधीक्षण करता है, पर किसी विशेष मामले की जाँच या निस्तारण किसी खास तरीके से करने का निर्देश नहीं दे सकता।

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    केंद्रीय सूचना आयोग सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत बना है और शिकायत, द्वितीय अपील, अनुपालन निर्देश, जुर्माना तथा वार्षिक निगरानी से जुड़े काम करता है।

  10. 10

    सूचना आयोग जिम्मेदार सूचना अधिकारी पर सुनवाई का अवसर देने के बाद प्रतिदिन ₹250, अधिकतम ₹25,000 तक जुर्माना लगा सकता है।

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    लोकपाल में एक अध्यक्ष और अधिकतम 8 सदस्य होते हैं; सदस्यों में 50 प्रतिशत न्यायिक सदस्य होने चाहिए और अधिनियम प्रतिनिधित्व की अन्य शर्तें भी तय करता है।

  12. 12

    लोकपाल अपने कानूनी क्षेत्र में भ्रष्टाचार के आरोप देखता है; केंद्रीय सतर्कता आयोग केंद्रीय सतर्कता, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मानवाधिकार, केंद्रीय सूचना आयोग सूचना तक पहुँच और नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक सार्वजनिक लेखापरीक्षा पर केंद्रित हैं।

संवैधानिक और सांविधिक निकाय: परीक्षा के लिए रूपरेखा

अधिकार का स्रोत पहले पहचानें

संवैधानिक निकाय वह है जिसे संविधान बनाता है या जिसके गठन का आदेश देता है। उसकी मूल स्थिति को केवल कार्यकारी आदेश से समाप्त नहीं किया जा सकता। संवैधानिक आधार बदलने के लिए आमतौर पर संविधान संशोधन चाहिए। इस अध्याय में भारत निर्वाचन आयोग, भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक और संघ लोक सेवा आयोग इसी वर्ग में आते हैं। इनके कामकाज का विस्तृत ढाँचा संसद के कानून से तय हो सकता है। उदाहरण के लिए संविधान निर्वाचन आयोग का आधार देता है, जबकि 2023 का कानून उसके सदस्यों की नियुक्ति, सेवा-शर्तें, कार्यकाल और काम निपटाने की प्रक्रिया तय करता है। इसलिए संवैधानिक दर्जे का अर्थ यह नहीं कि हर छोटी प्रक्रिया संविधान में ही लिखी होगी।

सांविधिक निकाय विधायिका के बनाए कानून से अस्तित्व में आता है। संसद उसके सदस्यों, अधिकार-क्षेत्र, शक्तियों, प्रक्रिया और स्वतंत्रता की सुरक्षा तय करती है। संविधान की सीमा के भीतर मूल अधिनियम में संशोधन करके इन बातों को बदला जा सकता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 से, केंद्रीय सतर्कता आयोग केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 से, केंद्रीय सूचना आयोग सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 से और लोकपाल लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 से बना है। ये केवल सरकारी समितियाँ नहीं हैं; इनका कानूनी अस्तित्व संसद के अधिनियम पर टिका है।

चार सवालों वाला तरीका

हर निकाय के बारे में चार सवाल पूछें: उसका आधार कहाँ है, नियुक्ति कौन करता है, मुख्य काम क्या है और स्वतंत्रता की रक्षा कैसे होती है? इससे बहुविकल्पीय प्रश्नों में होने वाली आम गलतियाँ कम होती हैं। कई पदों पर नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं, लेकिन सिफारिश करने वाली समिति अलग-अलग होती है। कहीं काम लेखापरीक्षा है, कहीं भर्ती पर सलाह, कहीं सूचना की अपील का निर्णय, कहीं मानवाधिकार उल्लंघन की जाँच, कहीं सतर्कता का अधीक्षण और कहीं भ्रष्टाचार के आरोप की जाँच। मिलते-जुलते शब्द अलग संस्थाओं को एक नहीं बना देते।

निकायकानूनी आधारमुख्य क्षेत्रस्वरूप
निर्वाचन आयोगअनुच्छेद 324 और निर्वाचन कानूनमतदाता सूची और तय चुनावसंवैधानिक
नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षकअनुच्छेद 148-151 और 1971 का अधिनियमसार्वजनिक लेखापरीक्षा और खातेसंवैधानिक
संघ लोक सेवा आयोगअनुच्छेद 315-323संघ की सिविल सेवाओं की भर्ती और परामर्शसंवैधानिक
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग1993 का अधिनियममानवाधिकार संरक्षणसांविधिक
केंद्रीय सतर्कता आयोग2003 का अधिनियमकेंद्रीय सतर्कता और तय भ्रष्टाचार-रोधी अधीक्षणसांविधिक
केंद्रीय सूचना आयोग2005 का अधिनियमसूचना-अधिकार की शिकायत और अपीलसांविधिक
लोकपाल2013 का अधिनियमदायरे में आने वाले लोक पदाधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोपसांविधिक

जाँच एजेंसी, अधीक्षण निकाय, परामर्शी आयोग और निर्णय देने वाले प्राधिकरण का फर्क भी याद रखें। केंद्रीय सतर्कता आयोग अधीक्षण और सलाह देता है तथा जाँच करा सकता है, पर वह दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना का दूसरा नाम नहीं है। संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा कराता और सलाह देता है; लागू सेवा-नियमों के तहत नियुक्ति कार्यपालिका करती है। केंद्रीय सूचना आयोग सूचना कानून के तहत शिकायत और द्वितीय अपील सुनता है; वह सामान्य लोक शिकायत आयोग नहीं है। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक जाँच करके रिपोर्ट देता है; वह खुद अनुदान पारित नहीं करता और न ही हर अनियमित अधिकारी को स्वयं दंडित करता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग अपने कानून के भीतर जाँच और सिफारिश कर सकता है; वह आपराधिक न्यायालय नहीं है। लोकपाल भ्रष्टाचार की शिकायतों के लिए कानूनी जाँच-प्रक्रिया अपनाता है; वह राज्य का लोकायुक्त नहीं है।

राजस्थान के प्रश्नों में संघ और राज्य की जोड़ी साफ़ रखें। स्थानीय निकाय चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग कराता है, भारत निर्वाचन आयोग नहीं। राजस्थान लोक सेवा आयोग, संघ लोक सेवा आयोग का राज्य-स्तरीय समकक्ष है। राज्य से जुड़ी नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट राज्यपाल को जाती है ताकि वह राज्य विधानमंडल के सामने रखी जाए। राज्य सूचना आयोग राज्य के लोक प्राधिकारियों के मामले देखता है। मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम राज्य मानवाधिकार आयोगों की व्यवस्था भी करता है और राज्य स्तर पर लोकायुक्त की व्यवस्था लागू राज्य कानून से चलती है।

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