विराम-चिह्नों का प्रयोग
मुख्य तथ्य
- हिंदी व्याकरण में विराम-चिह्न सजावट नहीं, बल्कि वाक्य के अर्थ, ठहराव और शुद्धि को नियंत्रित करने वाला साधन है।
- पूर्ण विराम सामान्य कथन, आदेश, निवेदन, इच्छा, परिभाषा या साधारण वर्णन के अंत में लगाया जाता है।
- प्रश्नचिह्न प्रत्यक्ष प्रश्न के लिए है; कथन के भीतर आए अप्रत्यक्ष प्रश्न का अंत सामान्यतः पूर्ण विराम से होता है।
- विस्मयादिबोधक चिह्न आश्चर्य, शोक, आनंद, चेतावनी, प्रशंसा या तीव्र भाव को दिखाता है।
- प्रश्न और आश्चर्य मिले हों तो अंतिम चिह्न प्रधान भाव से चुना जाता है: उत्तर अपेक्षित हो तो प्रश्नचिह्न, भाव-प्रतिक्रिया हो तो विस्मयादिबोधक चिह्न।
मुख्य बिंदु
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हिंदी व्याकरण में विराम-चिह्न सजावट नहीं, बल्कि वाक्य के अर्थ, ठहराव और शुद्धि को नियंत्रित करने वाला साधन है।
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पूर्ण विराम सामान्य कथन, आदेश, निवेदन, इच्छा, परिभाषा या साधारण वर्णन के अंत में लगाया जाता है।
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प्रश्नचिह्न प्रत्यक्ष प्रश्न के लिए है; कथन के भीतर आए अप्रत्यक्ष प्रश्न का अंत सामान्यतः पूर्ण विराम से होता है।
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विस्मयादिबोधक चिह्न आश्चर्य, शोक, आनंद, चेतावनी, प्रशंसा या तीव्र भाव को दिखाता है।
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प्रश्न और आश्चर्य मिले हों तो अंतिम चिह्न प्रधान भाव से चुना जाता है: उत्तर अपेक्षित हो तो प्रश्नचिह्न, भाव-प्रतिक्रिया हो तो विस्मयादिबोधक चिह्न।
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अल्पविराम सूची, संबोधन, बीच में आए पदबंध, कुछ उपवाक्यों और प्रत्यक्ष कथन से पहले कथनांश को अलग करता है।
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कर्ता और क्रिया, संज्ञा और परसर्ग, क्रिया और कर्म या छोटे संयुक्त पदबंध के बीच बिना कारण अल्पविराम लगाना अशुद्धि है।
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अर्धविराम संबंधित स्वतंत्र उपवाक्यों को जोड़ता है या ऐसी बड़ी सूची-इकाइयों को अलग करता है जिनके भीतर पहले से अल्पविराम हों।
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उपविराम व्याख्या, सूची, नियम, परिणाम या उदाहरण आरंभ कराता है; उसे साधारण कर्ता के बाद नहीं लगाया जाता।
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उद्धरण चिह्न प्रत्यक्ष कथन, उद्धृत शब्द, शीर्षक या उस शब्द को घेरते हैं जिस पर शब्द के रूप में चर्चा हो रही हो।
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कोष्ठक हटाई जा सकने वाली अतिरिक्त सूचना को घेरते हैं; यदि कोष्ठक हटाने पर वाक्य टूट जाए तो प्रयोग संदिग्ध है।
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गलत विराम-चिह्न संयुक्त वाक्य-शुद्धि प्रश्नों में पूरे वाक्य को अशुद्ध बना सकता है।
विराम-चिह्न क्या हैं और परीक्षा में इन्हें कैसे पढ़ना चाहिए?
विराम-चिह्न लिखित हिंदी में वाक्य के अंत, ठहराव, प्रश्न, भाव-उद्गार, व्याख्या और उद्धरण को साफ करने वाले चिह्न हैं, और परीक्षा में इन्हें रटकर नहीं बल्कि वाक्य में उनके काम से पहचानना चाहिए। राजस्थान लोक सेवा आयोग के आधिकारिक उप निरीक्षक/प्लाटून कमांडर पाठ्यक्रम के अनुसार हिंदी प्रश्न-पत्र में कुल १० विषय दिए गए हैं, जिनमें विराम-चिह्नों का प्रयोग अलग बिंदु है। विराम-चिह्न वह लिखित व्यवस्था है जिससे पता चलता है कि वाक्य कहाँ समाप्त होता है, कहाँ छोटा ठहराव चाहिए, कहाँ प्रश्न पूछा जा रहा है, कहाँ भाव-उद्गार है और कहाँ एक भाग दूसरे भाग की व्याख्या या उद्धरण दे रहा है। हिंदी व्याकरण के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में विराम-चिह्नों को सजावटी चिह्न नहीं माना जाता। गलत चिह्न वाक्य का अर्थ बदल सकता है और वाक्य-शुद्धि के प्रश्न में पूरे वाक्य को अशुद्ध बना सकता है। राजस्थान लोक सेवा आयोग उप निरीक्षक प्रथम प्रश्न-पत्र के हिंदी पाठ्यक्रम में विराम-चिह्नों का प्रयोग अलग से आता है, इसलिए तैयारी का लक्ष्य चिह्नों का इतिहास याद करना नहीं, बल्कि वाक्य में सही चिह्न तुरंत पहचानना और विकल्पों में गलत विराम-प्रयोग तुरंत हटाना है।
मूल मानचित्र तीन अंत्य चिह्नों से शुरू होता है। पूर्ण विराम सामान्य पूर्ण कथन को समाप्त करता है: राम विद्यालय गया। छपी हुई हिंदी में कहीं-कहीं बिंदु भी दिख सकता है, पर विद्यालयी व्याकरण और हिंदी वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में खड़ा पूर्ण विराम ही मानक वाक्य-अंत चिह्न माना जाता है। प्रश्नचिह्न प्रत्यक्ष प्रश्न के अंत में आता है: क्या तुम जयपुर जाओगे? इसे तभी लगाते हैं जब वाक्य सचमुच प्रश्न पूछ रहा हो; केवल क्या शब्द आ जाने से हर वाक्य प्रश्न नहीं बन जाता। विस्मयादिबोधक चिह्न आश्चर्य, शोक, आनंद, क्रोध, आशीर्वाद, चेतावनी या तीव्र भाव को दिखाता है: अरे! यह क्या हो गया! ये तीनों चिह्न इसलिए महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि ये पूरे वाक्य का भाव और बल तय करते हैं।
दूसरा समूह वाक्य के भीतर के ठहराव को नियंत्रित करता है। अल्पविराम छोटा विराम देता है। यह सूची के पदों, संबोधन, बीच में आए पदबंध और कुछ उपवाक्यों को अलग करता है: राम, श्याम और मोहन आए। भाई, ध्यान से सुनो। अर्धविराम अल्पविराम से बड़ा और पूर्ण विराम से छोटा ठहराव है। जहाँ दो संबंधित स्वतंत्र उपवाक्यों को अलग भी रखना हो और जोड़कर भी रखना हो, वहाँ यह उपयोगी है: वह पढ़ता रहा; मित्र खेलते रहे। परीक्षा में अर्धविराम अल्पविराम जितना सामान्य नहीं आता, पर यह इसलिए उपयोगी है कि वाक्य को बहुत अधिक पूर्ण विरामों में तोड़ने या बहुत अधिक अल्पविरामों से भरने से बचाता है।
तीसरा समूह व्याख्या, उद्धरण, बीच की सूचना और घेराव से जुड़ा है। उपविराम किसी व्याख्या, सूची, परिणाम, नियम या उदाहरण को आरंभ कराता है: आज का विषय है: विराम-चिह्न। उद्धरण चिह्न प्रत्यक्ष कथन, उद्धृत शब्द, शीर्षक या चर्चा में आए शब्द को घेरते हैं: शिक्षक ने कहा, “समय पर आओ।” योजक चिह्न तीखा विराम, विरोध, बाद में जुड़ी बात या बीच की व्याख्या दिखाता है: वह आया — पर देर से। कोष्ठक ऐसी अतिरिक्त सूचना को घेरते हैं जो उपयोगी है पर मुख्य वाक्य के लिए अनिवार्य नहीं: जयपुर (राजस्थान की राजधानी) ऐतिहासिक नगर है।
परीक्षा तीन ढंग से प्रश्न पूछ सकती है। पहला, रिक्त स्थान पर सही चिह्न चुनिए: आज तुम कहाँ जा रहे हो __ यहाँ उत्तर प्रश्नचिह्न होगा। दूसरा, अशुद्ध विराम-चिह्न वाला वाक्य पहचानिए: क्या तुमने कहा। गलत है, क्योंकि प्रत्यक्ष प्रश्न में प्रश्नचिह्न चाहिए। तीसरा, वाक्य से मेल खाता नियम चुनिए: मोहन, इधर आओ। में अल्पविराम संबोधन को अलग कर रहा है। अभ्यास करते समय चार प्रश्न पूछें: क्या वाक्य पूर्ण कथन है? क्या यह प्रत्यक्ष प्रश्न है? क्या इसमें भाव-उद्गार है? भीतर का विराम सूची, उपवाक्य, व्याख्या, उद्धरण या अतिरिक्त सूचना को अलग कर रहा है? यही तरीका विराम-चिह्न को रटने की वस्तु से वाक्य-विश्लेषण की वस्तु बना देता है।
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