राजस्थान — भौतिक विभाग, जलवायु, प्राकृतिक संसाधन, सिंचाई परियोजनाएँ, वन्यजीव
मुख्य तथ्य
- राजस्थान को 4 बड़े भौतिक विभागों में समझा जाता है: पश्चिमी रेतीला मैदान, अरावली पहाड़ियाँ, पूर्वी मैदान और दक्षिण-पूर्वी पठार।
- दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व दिशा में फैली अरावली ऊँचाई की प्रमुख रेखा होने के साथ बड़ा जल-विभाजक भी है।
- कम, असमान और अनिश्चित वर्षा के साथ तेज़ वाष्पीकरण जुड़ने से सूखा बार-बार सामने आने वाली नियोजन समस्या बनता है।
- राजस्थान की नदियों का संबंध अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और आंतरिक अपवाह से है; पूरे राज्य में एक जैसा नदी तंत्र नहीं मिलता।
- चंबल-बनास तंत्र अपेक्षाकृत अधिक पानी वाले पूर्व और दक्षिण-पूर्व की धुरी है, जबकि लूनी शुष्क पश्चिम की पहचान है।
मुख्य बिंदु
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राजस्थान को 4 बड़े भौतिक विभागों में समझा जाता है: पश्चिमी रेतीला मैदान, अरावली पहाड़ियाँ, पूर्वी मैदान और दक्षिण-पूर्वी पठार।
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दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व दिशा में फैली अरावली ऊँचाई की प्रमुख रेखा होने के साथ बड़ा जल-विभाजक भी है।
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कम, असमान और अनिश्चित वर्षा के साथ तेज़ वाष्पीकरण जुड़ने से सूखा बार-बार सामने आने वाली नियोजन समस्या बनता है।
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राजस्थान की नदियों का संबंध अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और आंतरिक अपवाह से है; पूरे राज्य में एक जैसा नदी तंत्र नहीं मिलता।
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चंबल-बनास तंत्र अपेक्षाकृत अधिक पानी वाले पूर्व और दक्षिण-पूर्व की धुरी है, जबकि लूनी शुष्क पश्चिम की पहचान है।
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खनिज पट्टियों को उनकी भूगर्भीय बनावट, जिलों, प्रसंस्करण उद्योगों और पर्यावरणीय लागत के साथ जोड़कर पढ़ना चाहिए।
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इंदिरा गांधी नहर ने उत्तर-पश्चिम के कुछ हिस्सों को बदला, लेकिन जलभराव, लवणता और भूमि-प्रबंधन की चुनौतियाँ भी पैदा कीं।
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चंबल, माही, बीसलपुर, नर्मदा से जुड़ी योजनाएँ और स्थानीय जल-संचय ढाँचे अलग-अलग क्षेत्रीय ज़रूरतें पूरी करते हैं।
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भूजल तभी भरोसेमंद सहारा बनता है, जब निकासी, पुनर्भरण, पानी की गुणवत्ता और फसल चुनाव में संतुलन रहे।
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नमी और ऊँचाई बदलने पर प्राकृतिक वनस्पति भी काँटेदार झाड़ियों और मरु घासभूमि से शुष्क पर्णपाती तथा पहाड़ी वनस्पति में बदलती है।
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राजस्थान के वन्यजीव क्षेत्रों में बाघ क्षेत्र, मरु आवास, आर्द्रभूमि, घासभूमि और नदी किनारे के पारितंत्र शामिल हैं।
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मज़बूत उत्तर अलग-अलग सूचियाँ याद करने के बजाय भू-आकृति, जलवायु, पानी, संसाधन, आजीविका, खतरे और संरक्षण को आपस में जोड़ता है।
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भौतिक विभाग और क्षेत्रीय समझ
- राजस्थान को सामान्यतः चार भौतिक विभागों में पढ़ा जाता है: पश्चिमी रेतीला मैदान, अरावली पर्वतमाला और पहाड़ी प्रदेश, पूर्वी मैदान, तथा दक्षिण-पूर्वी पठार या हाड़ौती पठार। पश्चिमी रेतीला मैदान सबसे बड़ा विभाग है। इसमें जैसलमेर-बाड़मेर-बीकानेर का मरुस्थलीय मूल भाग और चूरू, नागौर, सीकर तथा झुंझुनूं की ओर फैली बागर या संक्रमण पट्टी आती है। बालू के टीले, खारे अवसाद, कमजोर सतही अपवाह और रेतीली मिट्टी इस क्षेत्र की पहचान हैं, इसलिए प्रश्नों में इसे पवन अपरदन, सूखा, कम जैव पदार्थ और नहरों के कारण खेती में आए बदलाव के साथ जोड़ा जाता है।
- अरावली राज्य की मुख्य पर्वतीय शृंखला है। इसमें सिरोही और उदयपुर से अजमेर, जयपुर और अलवर की ओर जाती पुरानी मुड़ी हुई पहाड़ियां, दर्रे, घाटियां और ऊंचे भू-भाग शामिल हैं। यही राज्य का बड़ा जल-विभाजक भी है। पूर्वी मैदान नदी-निक्षेप से बना है और जयपुर, दौसा, भरतपुर, करौली, टोंक, सवाई माधोपुर और अलवर के आसपास बनास, बाणगंगा, गंभीर तथा चंबल-प्रभावित मैदानों को समेटता है। इसकी जलोढ़ मिट्टी कृषि के लिए महत्त्वपूर्ण है। दक्षिण-पूर्वी पठार में कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ आते हैं। यह मालवा-विंध्य कगार, काली मिट्टी, चंबल घाटी और राजस्थान की कई प्रमुख नदी परियोजनाओं से जुड़ा है।
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