REET लेवल 2 अध्ययन सामग्री
शब्द-रूप एवं धातु-रूप
राजस्थान बोर्ड संस्कृत पाठ्यचर्या में अकारान्त, इकारान्त, उकारान्त शब्द-रूप तथा लट्, लङ्, लोट्, विधिलिङ् धातु-रूप हैं।
मुख्य बिंदु
- राजस्थान बोर्ड संस्कृत पाठ्यचर्या में अकारान्त, इकारान्त, उकारान्त शब्द-रूप तथा लट्, लङ्, लोट्, विधिलिङ् धातु-रूप हैं।
- सात विभक्ति × तीन वचन हर संज्ञा-रूप तय करते हैं; सम्बोधन प्रथमा के साथ पढ़ाया जाता है।
- अकारान्त पुंलिङ्ग राम आधार है: रामः, रामम्, रामेण, रामाय, रामात्, रामस्य, रामे।
- नपुंसक फल राम से केवल प्रथमा एवं द्वितीया में भिन्न है (फलम्, बहुवचन फलानि)।
- सर्वनाम अस्मद् एवं युष्मद् अनियमित एवं अति-महत्त्वपूर्ण हैं: अहम्–माम्–मया; त्वम्–त्वाम्–त्वया।
- परस्मैपद भू: लट् भवति, लङ् अभवत्, लोट् भवतु, लृट् भविष्यति, विधिलिङ् भवेत्।
- सामान्य फंदे: चतुर्थी बनाम षष्ठी बनाम पञ्चमी एकवचन; लोट् बनाम विधिलिङ्; पुरुष-भ्रम पठामि बनाम पठति।
- निर्माण से पहले पहचान सिखाएँ; रूपों को "बालकः वनं गच्छति" जैसे वाक्यों में बाँधें।
- वायगोत्स्की का निकटस्थ-विकास-क्षेत्र, ब्रूनर का क्रियात्मक-प्रतिमात्मक-प्रतीकात्मक एवं कृशेन का बोधगम्य आगत सीढ़ी को आधार देते हैं।
- इसकी दक्षता सन्धि, समास, कारक, वाक्य-रचना एवं अनुवाद को आधार देती है — सर्वाधिक लाभकारी व्याकरण-खण्ड।
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अध्ययन सामग्री
पाठ्यक्रम सीमा
राजस्थान बोर्ड की रीट संस्कृत (वैकल्पिक भाषा-द्वितीय) पाठ्यचर्या इस विषय को स्पष्ट रूप से रखती है: अकारान्त, इकारान्त एवं उकारान्त शब्दों के शब्द-रूप तथा लट्, लङ्, लोट् एवं विधिलिङ् लकारों में धातु-रूप। मुख्य कौशल किसी एक तालिका को रटना नहीं है; मुख्य कौशल शब्द-प्रकार एवं अभीष्ट लकार को पहचानकर संज्ञा के सातों विभक्ति और तीनों वचनों में, तथा क्रिया के तीनों पुरुष और तीनों वचनों में सही रूप बनाना या चुनना है। कक्षा 6 से 8 के...
