REET लेवल 2 अध्ययन सामग्री
संस्कृत अपठित गद्यांश एवं पद्यांश
राजस्थान बोर्ड रीट संस्कृत (ऐच्छिक) अपठित गद्य-पद्य अर्थबोध को कौशल रूप में जाँचता है, रटे अंश रूप में नहीं।
मुख्य बिंदु
- राजस्थान बोर्ड रीट संस्कृत (ऐच्छिक) अपठित गद्य-पद्य अर्थबोध को कौशल रूप में जाँचता है, रटे अंश रूप में नहीं।
- निश्चित विधि है: भावग्रहण-पाठ, पदच्छेद, पद्य हेतु अन्वय, कर्तृ-क्रिया ढाँचा, फिर कारक-निर्धारण।
- किसी पद की कारक-भूमिका का सबसे सुरक्षित संकेत हिन्दी अर्थ नहीं, विभक्ति-अन्त है।
- प्रश्नोत्तर का उत्तर प्रश्न-पद की माँगी विभक्ति सहित पूर्ण संस्कृत वाक्य में होता है।
- अन्वय (पद्य से गद्य-क्रम) वह सोपान है जो पद्य-पाठक को केवल गद्य-पाठक से सर्वाधिक अलग करता है।
- उचित शीर्षक केन्द्रीय भाव बताता है, सिंह या नदी जैसे सजीव गौण विवरण को कभी नहीं।
- पहले गद्य फिर पद्य, पहले पहचान फिर निर्माण, शिक्षक-प्रदर्शित मचान-युक्त सीढ़ी सहित पढ़ाएँ।
- सामान्य फंदे हैं शाब्दिक पद-पठन, कारक-असंगति, गलत शीर्षक, और नीति को कथा-मात्र पढ़ना।
- क्रैशन बोधगम्य-निवेश, वायगोत्स्की समीपस्थ विकास क्षेत्र और ब्रूनर मचान क्रमिक अंश-अभ्यास का आधार हैं।
- अभ्यास केवल क्रमिक, बिना रटे अपठित अंशों पर हो — परीक्षा में अंश नहीं, दोहराई जाने योग्य पाँच-सोपान विधि ही काम आती है।
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पाठ्यक्रम सीमा
राजस्थान बोर्ड की रीट संस्कृत (ऐच्छिक) पाठ्यचर्या यहाँ एक छोटा पर अति महत्वपूर्ण बिंदु रखती है: अपठित गद्यांश एवं अपठित पद्यांश पर आधारित प्रश्न। "अपठित" का अर्थ है कि वह अनुच्छेद या श्लोक किसी निर्धारित पाठ का नहीं होता; अभ्यर्थी उसे परीक्षा में पहली बार देखता है और स्वयं अर्थ निकालता है। अतः यह सीमा स्मरण की नहीं, कौशल की सीमा है। यह नहीं देखा जाता कि अभ्यर्थी ने कोई विशेष पञ्चतन्त्र-कथा या भर्तृहरि-श्लोक रटा है या नहीं; यह...
