शारीरिक शिक्षा में परीक्षण, मापन और मूल्यांकन
मुख्य तथ्य
- परीक्षण किसी योग्यता या गुण को जाँचने की व्यवस्थित विधि है; मापन उसी जाँच का संख्यात्मक परिणाम देता है और मूल्यांकन उस परिणाम का शैक्षिक अर्थ तय करता...
- एएएचपीईआर युवा फिटनेस परीक्षण 1958 में अमेरिकी शारीरिक शिक्षा क्षेत्र में व्यापक रूप से अपनाया गया और विद्यालयी फिटनेस आकलन का मानक उदाहरण बना।
- हार्वर्ड स्टेप टेस्ट हृदय-श्वसन सहनशक्ति के आकलन में प्रसिद्ध है; इसमें व्यायाम के बाद नाड़ी की रिकवरी को मुख्य संकेतक माना जाता है।
- कूपर 12 मिनट दौड़ परीक्षण 1968 में लोकप्रिय हुआ और एरोबिक क्षमता के व्यावहारिक क्षेत्रीय आकलन के लिए जाना जाता है।
- क्राउस-वेबर परीक्षण न्यूनतम पेशीय शक्ति और लचीलेपन की जाँच के लिए प्रयोग होता है, खासकर धड़ और उदर क्षेत्र की कार्यक्षमता समझने में।
मुख्य बिंदु
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परीक्षण किसी योग्यता या गुण को जाँचने की व्यवस्थित विधि है; मापन उसी जाँच का संख्यात्मक परिणाम देता है और मूल्यांकन उस परिणाम का शैक्षिक अर्थ तय करता है।
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एएएचपीईआर युवा फिटनेस परीक्षण 1958 में अमेरिकी शारीरिक शिक्षा क्षेत्र में व्यापक रूप से अपनाया गया और विद्यालयी फिटनेस आकलन का मानक उदाहरण बना।
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हार्वर्ड स्टेप टेस्ट हृदय-श्वसन सहनशक्ति के आकलन में प्रसिद्ध है; इसमें व्यायाम के बाद नाड़ी की रिकवरी को मुख्य संकेतक माना जाता है।
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कूपर 12 मिनट दौड़ परीक्षण 1968 में लोकप्रिय हुआ और एरोबिक क्षमता के व्यावहारिक क्षेत्रीय आकलन के लिए जाना जाता है।
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क्राउस-वेबर परीक्षण न्यूनतम पेशीय शक्ति और लचीलेपन की जाँच के लिए प्रयोग होता है, खासकर धड़ और उदर क्षेत्र की कार्यक्षमता समझने में।
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मानवमितीय मापन में ऊँचाई, वजन, परिधि, त्वचा-मोड़ और शरीर-संरचना जैसे सूचक आते हैं; खेल चयन और पोषण निगरानी में इनका महत्व है।
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मूल सांख्यिकी में माध्य, माध्यिका, बहुलक, प्रसार, मानक विचलन और सहसंबंध जैसे पद परीक्षण परिणामों की व्याख्या को विश्वसनीय बनाते हैं।
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शारीरिक शिक्षा में परीक्षण, मापन और मूल्यांकन में क्या अंतर है?
शारीरिक शिक्षा में परीक्षण परखने की प्रक्रिया है, मापन उससे निकली संख्या है और मूल्यांकन उस संख्या का उद्देश्यपूर्ण निर्णय है। शारीरिक शिक्षा में परीक्षण, मापन और मूल्यांकन अलग-अलग लेकिन जुड़े हुए पद हैं। परीक्षण वह साधन या प्रक्रिया है जिससे किसी क्षमता, उपलब्धि, कौशल, शारीरिक क्षमता या व्यवहार को परखा जाता है। उदाहरण के लिए 50 मीटर दौड़ गति का परीक्षण है, सिट-अप उदर-पेशी सहनशक्ति का परीक्षण है और लंबी कूद विस्फोटक शक्ति का संकेत देती है। मापन इस परीक्षण से प्राप्त अंक, समय, दूरी, संख्या या स्कोर है। यदि छात्र ने 50 मीटर दौड़ 8.2 सेकंड में पूरी की, तो 8.2 सेकंड मापन है। राजस्थान लोक सेवा आयोग के विद्यालय व्याख्याता शारीरिक शिक्षा पाठ्यक्रम में इसी विषय को खेलों में परीक्षण, मापन और मूल्यांकन के रूप में रखा गया है और उसी प्रश्नपत्र में 150 प्रश्न निर्धारित हैं, इसलिए यह केवल सैद्धांतिक शब्दावली नहीं बल्कि परीक्षा की सीधी तैयारी का हिस्सा है।
मूल्यांकन केवल अंक लिख देने का काम नहीं है। इसमें मापन को उद्देश्य, आयु, लिंग, प्रशिक्षण स्तर, स्वास्थ्य दशा और मानक तालिका के संदर्भ में समझा जाता है। किसी बच्चे की 600 मीटर दौड़ का समय अच्छा है या कमजोर, यह बिना संदर्भ के नहीं कहा जा सकता। इसलिए अच्छे पीटीआई के लिए परीक्षण लेना, सही मापन करना और निष्पक्ष मूल्यांकन करना तीनों जरूरी हैं। राजस्थान के विद्यालयों में खेल-दिवस, शारीरिक क्षमता रिकॉर्ड और टीम चयन के समय यही क्रम व्यावहारिक रूप से दिखता है।
सार यही है: परीक्षण साधन है, मापन संख्या है और मूल्यांकन उस संख्या का निर्णयात्मक अर्थ है।
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