मुख्य तथ्य

  • 1896 में आधुनिक ओलंपिक खेलों की शुरुआत ने वैज्ञानिक प्रशिक्षण, नियमबद्ध प्रतियोगिता और प्रदर्शन-मापन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी।
  • 1961 में पटियाला में राष्ट्रीय खेल संस्थान स्थापित हुआ और भारत में वैज्ञानिक कोच-शिक्षा का प्रमुख केंद्र बना।
  • 1982 के एशियाई खेलों के बाद भारत में खेल अवसंरचना, कोचिंग और राष्ट्रीय स्तर की तैयारी को अधिक संगठित रूप मिला।

मुख्य बिंदु

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    1896 में आधुनिक ओलंपिक खेलों की शुरुआत ने वैज्ञानिक प्रशिक्षण, नियमबद्ध प्रतियोगिता और प्रदर्शन-मापन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी।

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    1961 में पटियाला में राष्ट्रीय खेल संस्थान स्थापित हुआ और भारत में वैज्ञानिक कोच-शिक्षा का प्रमुख केंद्र बना।

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    1982 के एशियाई खेलों के बाद भारत में खेल अवसंरचना, कोचिंग और राष्ट्रीय स्तर की तैयारी को अधिक संगठित रूप मिला।

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    प्रशिक्षण भार में आयतन, तीव्रता, आवृत्ति और काम-विश्राम का संबंध जैसे घटक आते हैं; इनके संतुलन से अनुकूलन, थकान और सुधार नियंत्रित होते हैं।

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    अधिभार, विशिष्टता, क्रमिकता, वैयक्तिकता, पुनर्प्राप्ति और प्रतिलोमता खेल प्रशिक्षण के सबसे अधिक पूछे जाने वाले सिद्धांत हैं।

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    शक्ति, सहनशक्ति, गति, लचीलापन और समन्वय शारीरिक दक्षता के केंद्रीय घटक हैं; अलग-अलग खेलों में इनका अनुपात बदलता है।

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    पीरियडाइजेशन में तैयारी, प्रतियोगिता और संक्रमण अवधि के माध्यम से वर्षभर के प्रशिक्षण को लक्ष्य, भार और विश्राम के अनुसार व्यवस्थित किया जाता है।

खेल प्रशिक्षण क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?

खेल प्रशिक्षण खिलाड़ी की शारीरिक, तकनीकी, सामरिक और मानसिक क्षमता को किसी खास खेल और प्रतियोगिता-स्तर की जरूरत के अनुसार योजनाबद्ध ढंग से विकसित करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया है। आरपीएससी के आधिकारिक शारीरिक शिक्षा पेपर-दो पाठ्यक्रम के अनुसार यह पेपर कुल 260 अंकों का है, इसलिए खेल प्रशिक्षण की परिभाषा और उद्देश्य परीक्षा की दृष्टि से भी केंद्रीय विषय हैं। खेल प्रशिक्षण एक नियोजित, लगातार और वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से खिलाड़ी की शारीरिक, तकनीकी, सामरिक और मानसिक क्षमता को प्रतियोगिता की मांग के अनुसार विकसित किया जाता है। सामान्य व्यायाम और खेल प्रशिक्षण में मुख्य अंतर लक्ष्य, मापन और प्रगति की योजना का है। सामान्य व्यायाम स्वास्थ्य और सक्रियता के लिए हो सकता है, जबकि खेल प्रशिक्षण किसी विशेष खेल, पद, स्पर्धा या प्रतियोगिता-स्तर के लिए बनाया जाता है। पीटीआई भर्ती परीक्षा में इस अंतर को पहचानना जरूरी है, क्योंकि प्रश्न अक्सर प्रशिक्षण की परिभाषा, उद्देश्य और घटकों को मिलाकर पूछते हैं।

खेल प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल मांसपेशी बढ़ाना नहीं है। इसमें सही तकनीक, ऊर्जा-तंत्र का विकास, चोट से बचाव, खेल-नियमों की समझ, अनुशासन, आत्मविश्वास, ध्यान और प्रतियोगिता-दबाव से निपटने की क्षमता भी शामिल है। किसी विद्यालय या राजस्थान के जिला-स्तरीय खेल अभ्यास में पीटीआई को उम्र, उपलब्ध मैदान, मौसम, उपकरण और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर प्रशिक्षण देना पड़ता है। इसलिए प्रशिक्षण हमेशा खिलाड़ी-केंद्रित और खेल-केंद्रित दोनों होना चाहिए।

याद रखने योग्य बात: प्रशिक्षण का मूल अर्थ लक्ष्यपूर्ण अभ्यास है, जिसमें प्रदर्शन-सुधार को योजना, मापन और पुनरावृत्ति से प्राप्त किया जाता है।

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