मुख्य तथ्य

  • 1898 में नॉर्मन ट्रिपलेट ने साइकिल चालकों पर सामाजिक सुगमता का शुरुआती अध्ययन किया; इसे खेल मनोविज्ञान के प्रयोगात्मक आरंभ से जोड़ा जाता है।
  • 1908 में यर्कीस और डॉडसन ने उत्तेजना और प्रदर्शन के संबंध का नियम दिया; मध्यम उत्तेजना पर प्रदर्शन सामान्यतः श्रेष्ठ रहता है।
  • 1925 में कोलमैन ग्रिफ़िथ ने इलिनॉय विश्वविद्यालय में एथलेटिक रिसर्च लैब स्थापित की; उन्हें आधुनिक खेल मनोविज्ञान का प्रमुख अग्रदूत माना जाता है।
  • 1943 में अब्राहम मैस्लो ने आवश्यकता-क्रम सिद्धांत प्रस्तुत किया; खिलाड़ी की सुरक्षा, सम्मान और आत्म-सिद्धि जैसी जरूरतों को समझने में यह उपयोगी है।
  • 1965 में इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ़ स्पोर्ट साइकोलॉजी की स्थापना हुई; इससे खेल मनोविज्ञान को अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक पहचान मिली।

मुख्य बिंदु

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    1898 में नॉर्मन ट्रिपलेट ने साइकिल चालकों पर सामाजिक सुगमता का शुरुआती अध्ययन किया; इसे खेल मनोविज्ञान के प्रयोगात्मक आरंभ से जोड़ा जाता है।

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    1908 में यर्कीस और डॉडसन ने उत्तेजना और प्रदर्शन के संबंध का नियम दिया; मध्यम उत्तेजना पर प्रदर्शन सामान्यतः श्रेष्ठ रहता है।

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    1925 में कोलमैन ग्रिफ़िथ ने इलिनॉय विश्वविद्यालय में एथलेटिक रिसर्च लैब स्थापित की; उन्हें आधुनिक खेल मनोविज्ञान का प्रमुख अग्रदूत माना जाता है।

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    1943 में अब्राहम मैस्लो ने आवश्यकता-क्रम सिद्धांत प्रस्तुत किया; खिलाड़ी की सुरक्षा, सम्मान और आत्म-सिद्धि जैसी जरूरतों को समझने में यह उपयोगी है।

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    1965 में इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ़ स्पोर्ट साइकोलॉजी की स्थापना हुई; इससे खेल मनोविज्ञान को अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक पहचान मिली।

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    1977 में अल्बर्ट बंडूरा ने आत्म-प्रभावकारिता की अवधारणा को स्पष्ट किया; खिलाड़ी का अपने कौशल पर विश्वास प्रदर्शन को सीधे प्रभावित करता है।

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    1967 में फिट्स और पॉस्नर के मॉडल ने मोटर अधिगम को संज्ञानात्मक, संबद्ध और स्वायत्त अवस्थाओं में बांटा।

खेल मनोविज्ञान का अर्थ और क्षेत्र क्या है?

खेल मनोविज्ञान मनोविज्ञान की वह शाखा है जो खेल, व्यायाम, प्रशिक्षण और प्रतियोगिता में खिलाड़ी तथा टीम के व्यवहार, सीखने, भावना और प्रदर्शन को समझती है। आरपीएससी के पीटीआई पेपर द्वितीय के आधिकारिक सिलेबस में प्रश्न-पत्र के लिए 150 वस्तुनिष्ठ प्रश्न तय हैं, इसलिए इस विषय की परिभाषा और क्षेत्र को परीक्षा-भाषा में पढ़ना जरूरी है। इसका उद्देश्य केवल पदक जीतना नहीं, बल्कि खिलाड़ी की सीखने की क्षमता, भावनात्मक नियंत्रण, आत्मविश्वास, टीम-व्यवहार और नैतिक आचरण को समझना है। पीटीआई परीक्षा के लिए इसकी परिभाषा, प्रमुख क्षेत्रों और व्यवहारिक उपयोगों को याद रखना जरूरी है, क्योंकि प्रश्न अक्सर सीधे संकल्पनाओं पर आधारित होते हैं।

इस क्षेत्र में व्यक्तित्व, अभिप्रेरणा, चिंता, आक्रामकता, मोटर कौशल अधिगम, नेतृत्व, टीम एकता, लक्ष्य-निर्धारण, ध्यान, मानसिक अभ्यास और कोच-खिलाड़ी संबंध शामिल हैं। शारीरिक शिक्षा में खेल मनोविज्ञान शिक्षक को यह समझने में मदद करता है कि एक ही अभ्यास विधि सभी छात्रों पर समान प्रभाव क्यों नहीं डालती। उदाहरण के लिए राजस्थान के विद्यालयी खेल शिविर में नए खिलाड़ी को पहले सुरक्षा और आत्मविश्वास की जरूरत हो सकती है, जबकि अनुभवी खिलाड़ी को प्रदर्शन-लक्ष्य चाहिए।

सार यह है: खेल मनोविज्ञान शरीर के प्रशिक्षण को मन के प्रशिक्षण से जोड़ता है।

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