मुख्य तथ्य

  • चंद्रयान-3 में विक्रम लैंडर ने 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र के निकट मृदु अवतरण किया और प्रज्ञान रोवर सतह पर उतरा।
  • आदित्य-एल1 6 जनवरी 2024 को सूर्य-पृथ्वी एल1 बिंदु के चारों ओर हेलो कक्षा में पहुँचा, जहाँ से सूर्य का निरंतर अवलोकन संभव है।
  • एक्सपोसैट 1 जनवरी 2024 को चमकीले एक्स-रे स्रोतों, जैसे कृष्ण विवर और न्यूट्रॉन तारों, के ध्रुवण अध्ययन के लिए प्रक्षेपित हुआ।
  • गगनयान टीवी-डी1 का मुख्य महत्व चालक दल बचाव प्रणाली और मानव अंतरिक्ष उड़ान सुरक्षा के परीक्षण से जुड़ा है।
  • कल्पक्कम का पीएफबीआर भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण, तीव्र प्रजनक रिएक्टर और 500 मेगावाट विद्युत क्षमता से जुड़ा है।

मुख्य बिंदु

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    चंद्रयान-3 में विक्रम लैंडर ने 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र के निकट मृदु अवतरण किया और प्रज्ञान रोवर सतह पर उतरा।

  2. 2

    आदित्य-एल1 6 जनवरी 2024 को सूर्य-पृथ्वी एल1 बिंदु के चारों ओर हेलो कक्षा में पहुँचा, जहाँ से सूर्य का निरंतर अवलोकन संभव है।

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    एक्सपोसैट 1 जनवरी 2024 को चमकीले एक्स-रे स्रोतों, जैसे कृष्ण विवर और न्यूट्रॉन तारों, के ध्रुवण अध्ययन के लिए प्रक्षेपित हुआ।

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    गगनयान टीवी-डी1 का मुख्य महत्व चालक दल बचाव प्रणाली और मानव अंतरिक्ष उड़ान सुरक्षा के परीक्षण से जुड़ा है।

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    कल्पक्कम का पीएफबीआर भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण, तीव्र प्रजनक रिएक्टर और 500 मेगावाट विद्युत क्षमता से जुड़ा है।

  6. 6

    डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना में पहचान, भुगतान, डेटा विनिमय, सार्वजनिक प्लेटफ़ॉर्म और खुले नेटवर्क नागरिक सेवाओं से जुड़ते हैं।

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    जीनोमइंडिया डीबीटी से जुड़ा संसाधन है, जिसमें 20 से अधिक संस्थानों से 10,000 भारतीय जीनोम अनुक्रमित किए गए।

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    रक्षा तकनीक में अग्नि, ब्रह्मोस, तेजस, अस्त्र, आकाश और पिनाका जैसी प्रणालियों का सही प्रकार से मिलान अक्सर पूछा जा सकता है।

परीक्षा के लिए पढ़ने का सही स्तर

पीटीआई पेपर 1 में विज्ञान-प्रौद्योगिकी को शोध-पत्र की तरह नहीं, बल्कि नाम, संस्था, तिथि, स्थान, उपयोग और सही मिलान के रूप में पढ़ना चाहिए। आरपीएससी के आधिकारिक पाठ्यक्रम पृष्ठ पर पीटीआई पेपर-1 2024 की प्रविष्टि 27 मार्च 2024 को क्रमांक 325 पर दर्ज है, इसलिए इस हिस्से को सीधे पाठ्यक्रम-आधारित पहचान और मिलान के स्तर पर तैयार करना चाहिए। इस विषय में अंतरिक्ष मिशन, डिजिटल तकनीक, जैव-प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा, अर्धचालक, रक्षा प्रणाली और भारतीय वैज्ञानिकों के योगदान एक साथ आते हैं। वस्तुनिष्ठ परीक्षा में प्रश्न अक्सर यह नहीं पूछता कि किसी तकनीक की पूरी कार्यप्रणाली क्या है; वह यह जाँचता है कि अभ्यर्थी मिशन को संस्था से, योजना को खर्च से, स्थान को परियोजना से और तकनीक को उपयोग से जोड़ पाता है या नहीं।

सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि हर कार्यक्रम को तीन टैग दें: कौन-सी संस्था, कौन-सी तकनीक और किस काम में उपयोग। ISRO को अंतरिक्ष, डीएई और बार्क को परमाणु ऊर्जा, डीबीटी को जीनोमिक्स, आईसीएमआर को चिकित्सा अनुसंधान, माइटि को डिजिटल और अर्धचालक नीति, डीआरडीओ को रक्षा अनुसंधान और सी-डैक को उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग से जोड़कर याद रखें। राजस्थान जैसे राज्य में भी उपग्रह डेटा का उपयोग मौसम चेतावनी, फसल सलाह और आपदा प्रबंधन जैसे कार्यों में समझा जा सकता है।

ध्यान रखें: परीक्षा में गहराई से अधिक सही पहचान और सही जोड़ी निर्णायक होती है।

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