मुख्य तथ्य

  • 7 अप्रैल 1948 को WHO संविधान लागू हुआ; इसमें स्वास्थ्य को केवल रोग-न होने तक सीमित न मानकर शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कुशलता से जोड़ा गया।
  • 1978 में UNESCO ने शारीरिक शिक्षा और खेल पर अंतरराष्ट्रीय चार्टर अपनाया;
  • 2015 में UNESCO चार्टर का संशोधित रूप अपनाया गया; इसमें शारीरिक शिक्षा, शारीरिक गतिविधि और खेल को आजीवन भागीदारी, समावेशन और नैतिकता से जोड़ा गया।
  • 1957 में ग्वालियर में लक्ष्मीबाई कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन की स्थापना हुई; आगे चलकर यह LNIPE के रूप में भारत में शारीरिक शिक्षा का प्रमुख संस्थान बना।
  • 1995 में LNIPE को डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा मिला; इससे शारीरिक शिक्षा, खेल प्रशिक्षण और शोध को उच्च शिक्षा की औपचारिक पहचान मिली।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    7 अप्रैल 1948 को WHO संविधान लागू हुआ; इसमें स्वास्थ्य को केवल रोग-न होने तक सीमित न मानकर शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कुशलता से जोड़ा गया।

  2. 2

    1978 में UNESCO ने शारीरिक शिक्षा और खेल पर अंतरराष्ट्रीय चार्टर अपनाया; इसका मूल संदेश था कि शारीरिक शिक्षा और खेल तक पहुंच सभी के लिए अधिकार जैसी है।

  3. 3

    2015 में UNESCO चार्टर का संशोधित रूप अपनाया गया; इसमें शारीरिक शिक्षा, शारीरिक गतिविधि और खेल को आजीवन भागीदारी, समावेशन और नैतिकता से जोड़ा गया।

  4. 4

    1957 में ग्वालियर में लक्ष्मीबाई कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन की स्थापना हुई; आगे चलकर यह LNIPE के रूप में भारत में शारीरिक शिक्षा का प्रमुख संस्थान बना।

  5. 5

    1995 में LNIPE को डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा मिला; इससे शारीरिक शिक्षा, खेल प्रशिक्षण और शोध को उच्च शिक्षा की औपचारिक पहचान मिली।

  6. 6

    2005 की राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा ने स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा को विद्यालयी शिक्षा के जरूरी हिस्से के रूप में देखा, अलग-थलग पीरियड के रूप में नहीं।

  7. 7

    2016-17 में शुरू हुए खेलो इंडिया कार्यक्रम ने खेल-संस्कृति, जन-भागीदारी, प्रतिभा पहचान और प्रतियोगी अवसरों को राष्ट्रीय ढांचा दिया।

  8. 8

    2019 में शुरू हुए फिट इंडिया अभियान ने दैनिक जीवन में सक्रियता, फिटनेस और जन-भागीदारी को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बनाया।

शारीरिक शिक्षा का अर्थ और मूल अवधारणा क्या है?

शारीरिक शिक्षा का अर्थ शरीर के माध्यम से दी जाने वाली ऐसी संगठित शिक्षा है जो खेल, व्यायाम, योग, स्वास्थ्य-आदतों और अनुशासन के जरिए व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक विकास को जोड़ती है। शारीरिक शिक्षा का सीधा अर्थ शरीर को चलाने-फिराने भर की शिक्षा नहीं है। यह शिक्षा की वह संगठित प्रक्रिया है जिसमें खेल, व्यायाम, तालबद्ध क्रियाएं, योग, मनोरंजनात्मक गतिविधियां, स्वास्थ्य-आदतें और अनुशासन के जरिए व्यक्ति के पूरे व्यक्तित्व का विकास किया जाता है। इसके केंद्र में शरीर है, लेकिन लक्ष्य केवल मजबूत मांसपेशियां बनाना नहीं है; लक्ष्य है स्वस्थ शरीर, संतुलित मन, सामाजिक सहयोग, नियम-पालन और जीवन भर सक्रिय रहने की आदत।

राजस्थान लोक सेवा आयोग के स्कूल व्याख्याता शारीरिक शिक्षा पेपर-द्वितीय पाठ्यक्रम में कुल 8 विषय-खंड दिए गए हैं, और पहला ही खंड शारीरिक शिक्षा के अर्थ, लक्ष्य, उद्देश्य, कार्यक्षेत्र, आवश्यकता और महत्त्व से शुरू होता है। भर्ती परीक्षा में इसका सबसे उपयोगी सूत्र है: शारीरिक शिक्षा शरीर के माध्यम से दी जाने वाली शिक्षा है। यह शरीर के लिए भी है और शरीर के जरिए व्यक्ति के मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक विकास के लिए भी है। इसलिए इसे केवल खेल-कूद, पीटी, ड्रिल या प्रतियोगिता का पर्याय मानना अधूरा है। एक अच्छा पीटीआई छात्र को केवल दौड़ना नहीं सिखाता, बल्कि सुरक्षित ढंग से भाग लेना, टीम में काम करना, नियम मानना, हार-जीत को संभालना और स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार रहना भी सिखाता है।

निचोड़ यह है कि शारीरिक शिक्षा शिक्षा की सहायक शाखा नहीं, सामान्य शिक्षा का अभिन्न हिस्सा है।

पूरा नोट खोलें

यह सार्वजनिक पृष्ठ पहला उपलब्ध खंड दिखाता है। स्टडी पैक पूरा विषय और सभी पुनरावलोकन सामग्री खोलता है।

6 और खंड पूरे नोट में हैं

स्टडी पैक खोलें