मुख्य तथ्य

  • 776 ईसा पूर्व से प्राचीन ओलंपिक खेलों का उल्लेख मिलता है; इससे यूनानी समाज में शरीर, अनुशासन और सार्वजनिक प्रतियोगिता के महत्व का पता चलता है।
  • 1894 में पियरे द कूबर्तां की पहल से अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति बनी; 1896 के एथेंस ओलंपिक ने आधुनिक ओलंपिक आंदोलन की शुरुआत की।
  • 1920 में एच. सी. बक ने मद्रास में YMCA कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन की स्थापना की; यह भारत में संगठित शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षण का बड़ा केंद्र बना।
  • 1957 में ग्वालियर में लक्ष्मीबाई कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन स्थापित हुआ; आगे चलकर यह LNIPE के रूप में राष्ट्रीय स्तर का संस्थान बना।
  • 7 मई 1961 को पटियाला में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स शुरू हुआ; इसने वैज्ञानिक खेल-प्रशिक्षण और कोच शिक्षा को मजबूत किया।

मुख्य बिंदु

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    776 ईसा पूर्व से प्राचीन ओलंपिक खेलों का उल्लेख मिलता है; इससे यूनानी समाज में शरीर, अनुशासन और सार्वजनिक प्रतियोगिता के महत्व का पता चलता है।

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    1894 में पियरे द कूबर्तां की पहल से अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति बनी; 1896 के एथेंस ओलंपिक ने आधुनिक ओलंपिक आंदोलन की शुरुआत की।

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    भारत में योग, मल्लयुद्ध, धनुर्विद्या, घुड़सवारी और युद्धक अभ्यास प्राचीन शारीरिक शिक्षा की मुख्य धाराएं रहे।

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    1920 में एच. सी. बक ने मद्रास में YMCA कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन की स्थापना की; यह भारत में संगठित शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षण का बड़ा केंद्र बना।

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    1957 में ग्वालियर में लक्ष्मीबाई कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन स्थापित हुआ; आगे चलकर यह LNIPE के रूप में राष्ट्रीय स्तर का संस्थान बना।

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    7 मई 1961 को पटियाला में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स शुरू हुआ; इसने वैज्ञानिक खेल-प्रशिक्षण और कोच शिक्षा को मजबूत किया।

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    1984 में भारतीय खेल प्राधिकरण की स्थापना हुई; इसका काम खेल-विकास, प्रशिक्षण ढांचा और उच्च प्रदर्शन को राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित करना है।

शारीरिक शिक्षा का अर्थ और क्षेत्र क्या है?

शारीरिक शिक्षा का अर्थ शरीरगत गतिविधियों के माध्यम से स्वास्थ्य, कौशल, अनुशासन, सामाजिक व्यवहार और पूरे व्यक्तित्व का विकास कराने वाली शैक्षिक प्रक्रिया है। शारीरिक शिक्षा केवल व्यायाम कराने या खेल खिलाने का नाम नहीं है। इसका मूल अर्थ है शरीर की गतिविधियों के माध्यम से व्यक्ति का समग्र विकास कराना। इसमें स्वास्थ्य, फिटनेस, मोटर कौशल, खेल-कौशल, अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व, भावनात्मक संतुलन और सामाजिक व्यवहार शामिल होते हैं। शिक्षा के सामान्य लक्ष्य जैसे ज्ञान, आदत, दृष्टिकोण और चरित्र-निर्माण यहां शरीरगत गतिविधियों के ज़रिए पूरे किए जाते हैं। इसलिए शारीरिक शिक्षा को शिक्षा की सहायक चीज़ नहीं, बल्कि शिक्षा का अनिवार्य अंग माना जाता है। पीआईबी के अनुसार राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2005 में स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा को कक्षा 1 से 10 तक अनिवार्य विषय माना गया है, इसलिए इसका क्षेत्र केवल खेल-पीरियड तक सीमित नहीं रहता।

पीटीआई परीक्षा के लिए यह फर्क याद रखना ज़रूरी है कि शारीरिक प्रशिक्षण, खेल-प्रशिक्षण और शारीरिक शिक्षा एक जैसे नहीं हैं। शारीरिक प्रशिक्षण अक्सर शरीर की क्षमता, शक्ति, सहनशक्ति और अनुशासन पर केंद्रित होता है। खेल-प्रशिक्षण किसी खेल की तकनीक, रणनीति और प्रदर्शन-सुधार से जुड़ा होता है। शारीरिक शिक्षा इन दोनों से व्यापक है; इसमें स्वास्थ्य-ज्ञान, सुरक्षा, मनोरंजन, व्यक्तित्व-विकास, सामाजिक सीख और जीवन-भर सक्रिय रहने की आदत भी आती है।

सार यह है: शारीरिक शिक्षा शरीर को साधन बनाकर पूरे व्यक्तित्व को विकसित करने की शैक्षिक प्रक्रिया है।

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